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  • भाजपा :- युवा मोर्चा की नई टीम का हुआ ऐलान,,, जानिए किसको मिली जिम्मेदारी,,।

    भाजपा :- युवा मोर्चा की नई टीम का हुआ ऐलान,,, जानिए किसको मिली जिम्मेदारी,,।

    नईदिल्ली–   भारतीय जनता पार्टी  ने अपनी युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) की नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर दी है। युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हेमांग जोशी ने मंगलवार को नई नियुक्तियों का ऐलान किया।

    पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के निर्देश पर की गई इन नियुक्तियों में झारखंड के युवा नेता अमन यादव को राष्ट्रीय मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस नियुक्ति को झारखंड के लिए संगठनात्मक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

    गुमला जिले के सिसई निवासी अमन यादव अब तक झारखंड भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। छात्र जीवन से ही संगठन से जुड़े अमन ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के माध्यम से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। सरस्वती विद्या मंदिर, सिसई से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने छात्र राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई।

    छात्र राजनीति से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच-

    अमन यादव ने संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते हुए अपनी पहचान बनाई। वे प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, प्रदेश उपाध्यक्ष और प्रदेश सोशल मीडिया प्रभारी जैसे पदों पर काम कर चुके हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान भी उन्होंने बूथ प्रबंधन सहित संगठन के विभिन्न कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। गुमला से लेकर रांची तक पार्टी की गतिविधियों में उनकी भागीदारी रही है।

    अब राष्ट्रीय मंत्री की जिम्मेदारी मिलने के बाद अमन यादव की भूमिका राज्य से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर होगी। उनकी नियुक्ति को झारखंड के युवा कार्यकर्ताओं के लिए भी संगठन में आगे बढ़ने का अवसर माना जा रहा है।

    सात राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और तीन महामंत्री भी नियुक्त-

    BJYM की नई राष्ट्रीय टीम में विभिन्न राज्यों के नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है। सात नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और तीन को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। इसके अलावा राष्ट्रीय सचिव, कोषाध्यक्ष, मीडिया प्रभारी और सोशल मीडिया टीम में भी नियुक्तियां की गई हैं।

    राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में जम्मू-कश्मीर की विधायक शगुन परिहार, पश्चिम बंगाल के विधायक सौमेन करफा, उत्तर प्रदेश के निखिल मणि तिवारी, नगालैंड के अरविंद दमानी, तेलंगाना की मालोथ कोमली नाइक, बिहार के राज राजेंद्र सिंह और छत्तीसगढ़ के भूपेंद्र नाग को जिम्मेदारी दी गई है।

    राष्ट्रीय महामंत्री के पद पर ओडिशा की अर्पिता अपराजिता बदजेना, उत्तर प्रदेश के हर्ष वर्धन सिंह और आंध्र प्रदेश के मित्त वामशी कृष्णा को नियुक्त किया गया है। उत्तर प्रदेश के विनीत वत्स त्यागी राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और राजस्थान के देवव्रत सिंह राजावत राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष बनाए गए हैं। बिहार के हिमांशु यादव को राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है।

    पार्टी के अनुसार, सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।

  • नैनीताल में कल लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत,,,, समझौते से खत्म होंगे पुराने मुकदमे,,।

    नैनीताल में कल लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत,,,, समझौते से खत्म होंगे पुराने मुकदमे,,।

    नैनीताल—  अगर कोई मुकदमा लंबे समय से अदालत में चल रहा है और तारीख पर तारीख से परेशान हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। 12 सितंबर 2026, शनिवार को नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है।

    राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के निर्देश पर उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति की ओर से आयोजित इस लोक अदालत का मकसद है कि आपसी सहमति और समझौते के जरिए मामलों का जल्द और सरल तरीके से समाधान हो सके।

    किन मामलों का होगा निस्तारण ?

    राष्ट्रीय लोक अदालत में कई तरह के शमनीय मामलों को रखा जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से

    चेक बाउंस (N.I. Act की धारा 138) से जुड़े मामले।

    बैंक लोन और वित्तीय विवाद।

    श्रम एवं रोजगार से जुड़े विवाद, जैसे वेतन, छंटनी और औद्योगिक विवाद।

    बिजली-पानी के बकाया बिलों से संबंधित मामले।

    पारिवारिक और वैवाहिक विवाद, जिनमें आपसी समझौते की संभावना हो।

    भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, किराया और इंजंक्शन से जुड़े दीवानी मामले।

    मोटर दुर्घटना दावा (MACT) से संबंधित मामले।

    अन्य ऐसे दीवानी और शमनीय आपराधिक मामले, जिनका समझौते के जरिए समाधान संभव है।

    लोक अदालत में समझौते का सबसे बड़ा फायदा क्या?

    लोक अदालत का सबसे बड़ा फायदा यह है कि दोनों पक्षों की सहमति से विवाद का समाधान होने पर लंबी कानूनी प्रक्रिया, बार-बार की तारीखों और अतिरिक्त खर्च से राहत मिलती है। मामलों के निस्तारण के बाद कोर्ट फीस की वापसी का भी प्रावधान है।

    आपसी सहमति से विवाद खत्म होने पर रिश्तों में चली आ रही कटुता भी कम होती है और दोनों पक्ष आगे की जिंदगी बिना पुराने विवाद के बढ़ा सकते हैं।

    कोर्ट पहुंचना मुश्किल है तो ऑनलाइन जुड़ सकेंगे

    जो वादकारी या अधिवक्ता शारीरिक रूप से उच्च न्यायालय परिसर में उपस्थित नहीं हो सकते, वे उच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से वर्चुअल रूप से भी लोक अदालत की कार्यवाही में शामिल हो सकते हैं।

    उत्तराखंड उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति की सचिव नेहा कुशवाहा ने वादकारियों और अधिवक्ताओं से अपील की है कि जो लोग अपने मामलों का निस्तारण लोक अदालत के माध्यम से कराना चाहते हैं, वे समय रहते संबंधित पीठ के समक्ष अपना मामला सूचीबद्ध करा लें, ताकि आवश्यक तैयारियां पूरी की जा सकें।

    मदद के लिए यहां करें संपर्क

    अपने मामले की सूची या अन्य जानकारी के लिए उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।

    📞 संपर्क कर सकते हैं इस नम्बर और ई मेल पर 9412979696
    ईमेल_ [hclsc-hc@uk.gov.in](mailto:hclsc-hc@uk.gov.in)

  • Uttrakhand _नहीं रहे पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी_प्रदेश में शोक,,,,

    Uttrakhand _नहीं रहे पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी_प्रदेश में शोक,,,,

    देहरादून—-  उत्तराखंड की राजनीति से आज एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता भुवन चंद खंडूड़ी निधन हो गया है। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक जगत में गहरा दुख व्याप्त है।

    पिछले कई दिनों से उनके आवास पर नेताओं, शुभचिंतकों और परिजनों का लगातार आना-जाना लगा हुआ था। आज उनके निधन के साथ ही उत्तराखंड ने एक ऐसे सादगीपूर्ण, अनुशासित और ईमानदार जननेता को खो दिया, जिन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में स्वच्छ छवि और दृढ़ नेतृत्व की मिसाल कायम की।

     

    सेना से राजनीति तक_ अनुशासन और ईमानदारी की पहचान बने खंडूड़ी

    Bhuvan Chandra Khanduri भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद राजनीति में आए थे। उन्हें देश के पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee राजनीति में लेकर आए थे। वर्ष 1990 के दशक में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के साथ सक्रिय राजनीतिक सफर शुरू किया और बहुत कम समय में अपनी साफ-सुथरी छवि, कार्यशैली और संगठन के प्रति समर्पण से शीर्ष नेतृत्व का विश्वास जीत लिया।

    पहली बार लोकसभा पहुंचने के महज दो वर्षों के भीतर ही उन्हें पार्टी का मुख्य सचेतक बनाया गया। यह उनके प्रति पार्टी नेतृत्व के भरोसे और राजनीतिक क्षमता का बड़ा प्रमाण माना गया।

    उत्तराखंड की कमान संभालने वाले मजबूत प्रशासक

    साल 2007 में जब उत्तराखंड में भाजपा आंतरिक गुटबाजी और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रही थी, तब पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर भरोसा भुवन चंद्र खंडूरी पर जताया। तमाम राजनीतिक समीकरणों और दबावों के बावजूद प्रदेश की कमान उनके हाथों में सौंपी गई।

    उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए पारदर्शिता, अनुशासन और विकास को प्राथमिकता दी। सादगीपूर्ण जीवनशैली और कठोर प्रशासनिक फैसलों के कारण वे आम जनता के बीच अलग पहचान रखते थे।

    प्रदेशभर में शोक, श्रद्धांजलियों का दौर शुरू

    पूर्व मुख्यमंत्री के निधन की सूचना मिलते ही प्रदेशभर से शोक संदेश आने शुरू हो गए हैं। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उत्तराखंड की राजनीति के एक ईमानदार और अनुशासित चेहरे के रूप में याद किया है।

    उनका जाना केवल एक राजनीतिक क्षति नहीं, बल्कि उत्तराखंड की जनभावनाओं और स्वच्छ राजनीति की एक बड़ी अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।