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  • बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है दशहरा – जानें पौराणिक कथा

    बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है दशहरा – जानें पौराणिक कथा

    हल्द्वानी—   दशहरा जिसे विजयादशमी भी कहते हैं, सनातन धर्म का सबसे बड़ा पर्व है। यह हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है।

    दशहरा क्यों मनाते हैं? इसके 2 प्रमुख पौराणिक कारण हैं –

    1. भगवान राम की रावण पर विजय:-
    त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने 9 दिन तक माता दुर्गा की आराधना कर दसवें दिन लंकापति रावण का वध किया था। रावण ने माता सीता का हरण किया था। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इसलिए इसे विजयादशमी कहा जाता है।

    2. माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय:-
    देवी पुराण के अनुसार माँ दुर्गा ने 9 रातों और 10 दिनों तक महिषासुर से युद्ध कर दसवें दिन उसका वध किया था। इसलिए नवरात्रि के बाद दशमी को माँ की विजय के रूप में मनाया जाता है।

    दशहरे का महत्व:-
    – यह पर्व सिखाता है कि अहंकार, अधर्म और बुराई कितनी भी शक्तिशाली हो, अंत में सत्य की ही जीत होती है।
    – इस दिन शस्त्र पूजन, शमी वृक्ष पूजन का विशेष महत्व है।
    – इसी दिन से 20 दिन बाद दीपावली मनाई जाती है, क्योंकि इस दिन राम जी लंका जीतकर अयोध्या लौटने की यात्रा पर निकले थे।
    – मान्यता है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य में विजय प्राप्त होती है।