हल्द्वानी– दीपावली का त्योहार खुशियों, रोशनी और उल्लास का पर्व है। इस अवसर पर बच्चे, बूढे हों या जवान, सभी आतिशबाजी का मजा लेना पसंद करते हैं।
हालांकि पटाखे जलाते समय की गई छोटी सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण भी बन सकती है। हर साल दीपावली के दौरान पटाखों से जलने, आंखों में चोट लगने और आगजनी की घटनाएं सामने आती हैं।
ऐसे में त्योहार की खुशियों को सुरक्षित बनाए रखने के लिए आतिशबाजी के दौरान विशेष सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार पटाखे हमेशा खुले और सुरक्षित स्थान पर ही जलाने चाहिए।
बच्चों को अकेले पटाखे जलाने की अनुमति बिलकुल ना दें और आतिशबाजी के दौरान किसी बड़े व्यक्ति की निगरानी में ही पटाखे जलाए।
पटाखे जलाते समय सूती कपड़े पहनें और ढीले, सिंथेटिक अथवा ज्वलनशील कपड़ों से बचें। पटाखों को हाथ में पकड़कर जलाने या जलते हुए पटाखों के पास झुकने कर देखने से बचना चाहिए।
पटाखे जलाने के लिए लंबी मोमबत्ती या अगरबत्ती का इस्तेमाल करें। एक बार में एक ही पटाखा जलाएं और उसके फटने के लिए पर्याप्त दूरी बनाए रखें।
यदि कोई पटाखा नहीं जलता है तो उसके पास तुरंत न जाएं और न ही उसे दोबारा जलाने का प्रयास करें। इसके अलावा पटाखों को घर के अंदर, वाहनों, बिजली के तारों, गैस सिलेंडर और ज्वलनशील वस्तुओं के पास नहीं जलाना चाहिए।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान—
– पटाखे हमेशा खुले मैदान में और बड़ों की निगरानी में जलाएं।
– बच्चों को माचिस और लाइटर से दूर रखें।
– पटाखे जलाते समय पानी की बाल्टी और प्राथमिक उपचार किट पास रखें।
– आंखों की सुरक्षा के लिए आतिशबाजी से उचित दूरी बनाए रखें।
– पटाखों को जेब में रखकर न घूमें और न ही उन्हें घर में जमा करें।
– पटाखे जलाने के बाद हाथ अच्छी तरह धोएं।
– तेज आवाज वाले पटाखों से बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को परेशानी हो सकती है, इसलिए इनसे बचें।
हादसा होने पर क्या करें–
पटाखे से जलने पर प्रभावित स्थान को लगभग 20 मिनट तक साफ बहते ठंडे पानी के नीचे रखें। जले हुए स्थान पर घी, तेल, टूथपेस्ट या बर्फ न लगाएं। जली हुई त्वचा पर चिपके कपड़े को जबरदस्ती न हटाएं।
आंख में पटाखे का कण जाने या चोट लगने पर आंख को न रगड़ें और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें। गंभीर रूप से जलने, आंख में चोट या अन्य आपात स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचें अथवा 112 पर सहायता लें।
दीपावली का असली आनंद अपनों के साथ खुशियां बांटने और सुरक्षित वातावरण में त्योहार मनाने में है। इसलिए आतिशबाजी करते समय सावधानी बरतें और दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें, ताकि दीपावली का पर्व किसी परिवार के लिए दुखद याद न बन जाए।


