हल्द्वानी— हल्द्वानी स्थित एक बैंकट हॉल में बुधवार को सवर्ण समाज (यूजीसी रोलबैक) काले कानून के विरोध में पूर्व दर्जा राज्य मंत्री प्रकाश हर्बोला द्वारा एक जनसंवाद बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक की अध्यक्षता डॉ. आशुतोष पंत ने की, जबकि संचालन पंडित मदन मोहन जोशी ने किया।
सभा को संबोधित करते हुए प्रकाश हर्बोला ने कहा कि आज हम देश को विकसित भारत और विश्व गुरु बनाने की बात करते हैं, लेकिन माइनस 40 प्रतिशत वालों से क्या विकसित भारत बन सकता है। उन्होंने कहा कि आज हमारे योग्य और प्रतिभाशाली बच्चे आरक्षण के कारण देश में काम करने का मौका न मिलने से विदेश जा रहे हैं। हमें अपने देश की कार्य संस्कृति सुधारनी पड़ेगी और जो कानून इसमें बाधक हैं, उन्हें समाप्त करना पड़ेगा।
उन्होंने ऐलान किया कि 15 नवंबर से घर-घर जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा और दिसंबर में एक विशाल रैली का आयोजन किया जाएगा।
बैठक में एडवोकेट पूरन सिंह रावत ने यूजीसी कानून और एससी-एसटी एक्ट को विस्तार से समझाया और कहा कि समाज में केवल दो ही वर्ग हैं – एक सामान्य वर्ग और दूसरा आरक्षण वर्ग, इसके अलावा कोई वर्ग नहीं है।
गांधी स्कूल के प्रबंधक मोहन बोरा ने कहा कि यूजीसी का यह काला कानून हमारे बच्चों को अपराधी बनाने की ओर ले जा रहा है। बच्चे पढ़ नहीं पाएंगे तो रोजगार कैसे पाएंगे और यदि इस कानून में जेल गए तो अपराधी बनना तय है।
मनोहर मिश्रा ने कहा कि वे स्वयं प्रमोशन में आरक्षण का शिकार हुए हैं, जिसको उन्होंने नौकरी दी वही उनका साहब बन गया, ऐसे कानून को बदलना आवश्यक है।
योगेंद्र बिष्ट ने कहा कि यह काला कानून युवाओं के लिए बहुत खतरनाक है, यदि आज विरोध नहीं किया तो कुछ समय बाद सामान्य वर्ग के बच्चे कॉलेज में जा ही नहीं पाएंगे।
नगर व्यापार मंडल अध्यक्ष कैलाश जोशी ने कहा कि कानूनी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो वास्तविक पीड़ितों को न्याय दे और किसी अन्य के साथ अन्याय न हो।
प्रदेश महामंत्री व्यापार मंडल हर्षवर्धन पांडे ने कहा कि आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट समाप्त करने के प्रस्ताव पर खुली चर्चा के बाद सुधार आवश्यक है।
इस दौरान सत्येंद्र तोमर, पार्षद गोपाल भट्ट, जी.एस. उप्रेती अपर सचिव, भुवन भट्ट, तेज सिंह कार्की, विशाल शर्मा, हयात सिंह रावत, जितेंद्र रौतेला, पीतांबर बिष्ट आदि मौजूद रहे।
