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हल्द्वानी- में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण हटाए जाने के नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, पूरे मामले में जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एएस ओका की बेंच सुनवाई कर रही है सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह बिल्कुल ठीक है कि रेलवे लाइन के पास अतिक्रमण नहीं दिया जा सकता। लेकिन उनके लिए पुनर्वास और अधिकारों पर तो गैर करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अचानक इतनी सख्त कार्यवाही कैसे कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कई सवाल करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट के 1 सप्ताह के नोटिस में अतिक्रमण खाली करने के आदेश पर अगले आदेशों तक अंतरिम रोक लगा दी।

हल्द्वानी– अतिक्रमण मामले में अदालत की टिप्पणी

कितनी जमीन रेलवे की, कितनी राज्य सरकार की ? – SC
इस मामले को मानवीय नजरिए से भी देखना होगा
अगली सुनवाई सात फ़रवरी को होगी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमीन खरीद-फरोख्त का सवाल है।

सात दिन में 50 हजार लोगों को इस तरह से नहीं हटाया जा सकता।

पुनर्वास की व्यवस्था क्या है।

भूमि की प्रकृति क्या रही है

इन सवालों पर जवाब दें रेलवे

  • रेलवे अतिक्रमण पर हजारों लोगों को राहत, ऐसे पहुंची खुशी की खबर

हल्द्वानी में रेलवे के अतिक्रमण मामले में जैसे ही सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिलने की खबर बनभूलपुरा पहुंची तो सुबह से दुआएं कर रहे लोगों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के 1 सप्ताह के नोटिस पर अतिक्रमण हटाए जाने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है और अगली सुनवाई के लिए 7 फरवरी की तारीख मुकर्रर की है जैसे ही यह खबर गफूर बस्ती और बनभूलपुरा क्षेत्र के हजारों लोगों तक पहुंची तो उन्होंने अल्लाह ताला का हल्द्वानी धन्यवाद दिया

और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह उनकी जीत की शुरुआत है क्योंकि वह कई दशकों से इस जमीन पर रह रहे हैं और आज रेलवे उसे अपनी बता रहा है बनभूलपुरा के महिलाएं बुजुर्ग सुबह से ही सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान फैसला उनके हक में आने की इबादत करते हुए दुआ मांग रहे थे। वही वनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले में आज सुबह से लगातार दुआएं चल रहीं हैं

महिलाएं और पुरूष लगातार दुआएं कर रहे हैं कि फैसला उनके हक में आये। एन्टी caa आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहीं उजमा परवीन भी लोगो के बीच पहुची और उन्होंने साफ तौर पर कहा एक राजनीतिक षड्यंत्र के तहत यह सब घटनाक्रम घटा है लेकिन उम्मीद है सब अच्छा होगा..लोगों की दुआएं जरूर कबूल होंगी।

 

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हल्द्वानी रेलवे ट्रैक के पास अतिक्रमण हटाने का मामला

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ” सबसे बड़ी बात यह है कि जो वहां रह रहे वो भी इंसान हैं, और वे    दशकों से रह रहे हैं…

अदालतें निर्दयी नहीं हो सकतीं

अदालतों को भी संतुलन बनाए रखने की ज़रूरत है और राज्य को भी कुछ करने की ज़रूरत है

रेलवे ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है

अगर आप लोगों को बेदखल करना चाहते हैं तो नोटिस जारी करें;

जनहित याचिका के सहारे क्यों? इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता”

वही रेलवे की तरफ से कहा गया की वो बंदे भारत वहां चलाना चाहते है

इसको लेकर प्लेटफॉर्म को बढ़ा करने की जरूरत है

इसके अलावा ट्रैक पर पानी भर जाता है

उतराखंड सरकार कानूी रुप से हकदार लोगों का पुनर्वास कर सकती है

दरअसल पिछले साल जनवरी में हल्द्वानी में नियोजित बेदखली अभियान से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने पर रोक लगा दी थी

मामले की सुनवाई जारी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम रेलवे की बात के समझ रहे है लेकिन इसमें बेलेंस करने की जरूरत हैं

हम बस ये जानना चाहते है की पुनर्वास को लेकर क्या योजना है?

ये बताया जाए कि कितनी जमीन रेलवे को चाहिए और पुनर्वास की क्या योजना है

SC: रेलवे ने रिकॉर्ड पर कहा है कि उन्हें अपनी ज़मीनों के बारे में जानकारी नहीं है। आगे बढ़ने का एक रास्ता है…हमें आगे बढ़ने का रास्ता खोजना होगा

सुनवाई जारी

SC ने अपने आदेश में कहा इस मामले में जल्द करवाई की जरूरत है- 4365 घर है वहां पर – ⁠50 हजार लोग वहा रह रहे है- ⁠सुनवाई के दौरान हमें कुछ वीडियो और फोटो दिए गए- ⁠कई परिवार वाला कई सालों से रह रहे हैं

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SC: ये पुनर्वास योजना ऐसी हो जिसमें सब सहमत हो।

SC: जो परिवार प्रभावित है उनकी तुरंत पहचान होनी चाहिए।


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