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सितारगंज – देशभर में बढ़ते दलित उत्पीड़न की घटनाओं के विरोध में सितारगंज में अनुसूचित जाति समाज के लोगों ने शुक्रवार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा। यह ज्ञापन एसडीएम सितारगंज के माध्यम से सौंपा गया, जिसमें समाज के लोगों ने कहा कि देश में लगातार दलितों के साथ हो रहे अत्याचार सुनियोजित और मनुवादी मानसिकता का परिणाम हैं।

ज्ञापन में कहा गया कि सर्वोच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस बी.आर. गवई पर द्वेषपूर्ण मानसिकता के तहत अदालत में हमला करने का प्रयास अत्यंत निंदनीय है। इसके साथ ही राजस्थान में आईपीएस अधिकारी पूरन कुमार द्वारा जातीय उत्पीड़न से तंग आकर की गई आत्महत्या और रायबरेली में 2 अक्टूबर को दिहाड़ी मजदूर की पीट-पीटकर हत्या जैसी घटनाएं समाज को झकझोर देने वाली हैं।

समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि देश के कई हिस्सों में दलितों के खिलाफ हो रही हिंसा अब चिंताजनक स्तर पर पहुँच चुकी है। ऐसी घटनाएं न केवल सामाजिक सौहार्द को आघात पहुंचा रही हैं, बल्कि यह हमारे संवैधानिक मूल्यों के भी विपरीत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दलितों के खिलाफ अत्याचार सुनियोजित तरीके से, कुटिल मानसिकता के तहत किए जा रहे हैं, जिससे समाज में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

ज्ञापन में राष्ट्रपति से मांग की गई कि दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएं। समाज के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो उत्तराखंड समेत देशभर में अनुसूचित जाति समाज व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

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