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हल्द्वानी—   उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के एससी / एसटी प्रकोष्ठ एवं समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जनजाति गौरव दिवस टाउन हॉल कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।

जनजाति गौरव दिवस का उद्देश्य समाज के हर वर्ग में आदिवासी नायकों के योगदान, उनके आदर्शों और जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता फैलाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी उनके त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सकें।

उनकी संस्कृति और योगदान को उजागर करना और अगली पीढ़ी को अपनी विरासत की रक्षा के लिए प्रेरित करना है।

कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के सभागार में किया गया, माननीय कुलपति, मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं अन्य द्वारा कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ प्रारंभ कर अतिथियों का स्वागत प्रो.पी. डी. पन्त, निदेशक, अकादमिक एवं अध्यक्ष समान अवसर अनुभग ने किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जनजातीय नायक भगवान बिरसा मुण्डा की जयंती पर उनके जीवन, संघर्ष और आदिवासी समाज के योगदान पर विशेष चर्चा होगी। साथ ही जनजातीय संस्कृति, लोककला, नृत्य एवं परंपराओं के प्रदर्शन के माध्यम से समाज के गौरवशाली इतिहास को हमें जानना होगा।

कार्यक्रम की रूपरेखा एवं विषय प्रवेश प्रो. रेनू प्रकाश, निदेशक, समाज विज्ञान वि‌द्याशाखा ने किया और इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कहा कि जनजातीय गौरव दिवस पर टाउन हॉल कार्यक्रम आमतौर पर जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों, विशेषकर बिरसा मुंडा के योगदान को मनाने, उनकी विरासत का सम्मान करने और जनजातीय समुदायों की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किए जाते हैं। विशिष्ट अतिथियों का परिचय डॉ. ज्योति रानी द्वारा किया गया ।

विशिष्ट अतिथि आभा गर्खाल वित्त नियंत्रक जीबी पंत विश्वविद्यालय पंतनगर ने अपने वक्तव्य में कहा कि जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी और उपनिवेशवाद-विरोधी बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में भारत में हर साल 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस (जनजातीय गौरव) मनाया जाता है। जनजातीय समाज भारतीय समाज का अभिनंदन है यह समाज प्रकृति पूजक रहा है।

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मुख्य अतिथि मैत्री आंदोलन के प्रणेता एवं पद्मश्री से सम्मानित डॉ. कल्याण सिंह रावत ने अपने उद्बोधन में कहा कि जनजाति समाज प्रकृति का आधार है हमें इनका संरक्षण करना होगा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका में सुधार की दिशा में जैव-संसाधन केंद्रों को मजबूत करना एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दिवस भविष्य की पीढ़ियों को उनके बलिदानों के बारे में जागरूक करने के लिए है।

अध्यक्षीय उद्बोयधन में प्रो. नवीन चन्द लोहनी, माननीय कुलपति महोदय ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत के जनजातीय नायकों, उनकी संस्कृति और योगदान का सम्मान करने वाला एक राष्ट्रीय उत्सव है, यह दिवस बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। जनजाति समाज के आधार स्तंभ हैं समाज को जनजाति समुदाय का बड़ा योगदान रहा है।

धन्यवाद ज्ञापन प्रो० पी० के० सहगल, निदेशक, विज्ञान वि‌द्याशाखा एवं नोडल अधिकारी एससी/एसटी प्रकोष्ट ने किया ।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. नागेंद्र गंगोला ने किया। समन्वयक और आयोजन समिति के सभी सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के निदेशक गण, प्राध्यापक तथा प्रो. डिगर सिंह, डॉ. ज्योति रानी, डॉ. राजेन्द्र क्वीरा, डॉ. गोपाल सिंह गौनिया, डॉ. नीरज कुमार जोशी, श्रीमती शैलजा, डॉ. किशोर कुमार, श्रीमती भावना धौनी, डॉ. नमिता वर्मा, डॉ. द्विजेश उपाध्याय,  तरुण नेगी, श्री राजेश आर्या,  मोहित, विभु काण्डपपाल,  हरीश गोयल, श्रीमति सुनीता भाष्कर, रेनू भट्ट, ज्योति शर्मा,  नवीन जीशी सहित विश्वविद्यालय के अधिकांश लोग मौजूद रहे।


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