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उत्तराखंड—-  राजधानी देहरादून एक बार फिर गोलियों की आवाज़ से दहल उठी। शहर के बीचों-बीच स्थित सिल्वर सिटी मॉल में दिनदहाड़े एक कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है—क्योंकि महज़ 16 दिनों में यह पांचवीं हत्या है।

मॉल की सीढ़ियों पर मौत

सुबह करीब 10:30 बजे, जिम से नीचे उतरते समय 45 वर्षीय विक्रम शर्मा पर तीन हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। तीन राउंड गोलियां चलीं, जिनमें दो सीधे उन्हें लगीं। पुलिस के मुताबिक हमलावर पूरी प्लानिंग के साथ आए थे। दो शूटर अंदर दाखिल हुए, जबकि तीसरा साथी मुख्य सड़क पर बाइक लेकर तैयार खड़ा रहा। वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों फरार हो गए।

घटना के बाद मॉल परिसर को सील कर दिया गया। सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है, फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं और एसटीएफ को जांच में लगाया गया है। वरिष्ठ अधिकारी खुद निगरानी कर रहे हैं।

‘जान का खतरा’ और जेब में पिस्टल

प्राप्त हो रही प्रारंभिक जानकारी में बताया जा रहा है कि मृतक को पहले से खतरे की आशंका थी। उनके पास एक पिस्टल भी मिली, लेकिन हमलावरों ने उन्हें हथियार निकालने का मौका तक नहीं दिया। यह तथ्य इस वारदात को और भी संगठित और पूर्व-नियोजित बनाता है।

विक्रम शर्मा मूल रूप से झारखंड के निवासी थे और काशीपुर में स्टोन क्रशर का व्यवसाय करते थे। हाल के दिनों में उनके व्यावसायिक संबंधों और संभावित रंजिशों की जांच की जा रही है। पुलिस व्यक्तिगत दुश्मनी, कारोबारी विवाद और अन्य एंगल से पड़ताल कर रही है।

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16 दिन में 5 मर्डर – डर का बढ़ता ग्राफ

देहरादून और आसपास के इलाकों में हालिया घटनाएं चिंताजनक पैटर्न दिखाती हैं-

29 जनवरी, विकासनगर – 18 वर्षीय छात्रा की हत्या।

31 जनवरी, ऋषिकेश – घर में घुसकर महिला को गोली मारी गई।

02 फरवरी, पलटन बाजार – 23 वर्षीय युवती की गला काटकर हत्या।

11 फरवरी, तिब्बती मार्केट – कारोबारी अर्जुन शर्मा की गोली मारकर हत्या।

13 फरवरी, सिल्वर सिटी मॉल – दिनदहाड़े फायरिंग में विक्रम शर्मा की मौत।

लगातार हो रही इन वारदातों ने आम लोगों के मन में असुरक्षा की भावना गहरी कर दी है। बाजारों में दहशत है, व्यापारियों में आक्रोश है और आम नागरिकों के मन में सवाल,, क्या राजधानी सुरक्षित है ?

सवाल सिर्फ एक घटना का नहीं

राजधानी में इस तरह की आये दिन फायरिंग यह इशारा है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।


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