कोटद्वार— पिछले दिनों श्री सिद्धबली मंदिर के समीप खोह नदी में मौज-मस्ती कर रहे लोगों को हथिनी ने खदेड़ दिया। सौभाग्य यह रहा कि इस घटना के दौरान किसी को कोई चोट नहीं आई।
माना जा रहा है कि अपने बच्चे के साथ खोह नदी में पानी पीने उतरी हथिनी ने बच्चे की सुरक्षा के दृष्टिगत आक्रामक रूख अपनाया हो।
दरअसल, कोटद्वार क्षेत्र की बात करें तो यहां गर्मियों में हाथी पानी की तलाश में जंगल से बाहर निकल खोह नदी में उतरते हैं। इस दौरान हाथियों के आसपास जाना खतरनाक हो सकता है।
खोह नदी में पानी पीने के लिए हाथियों के झुंड लगातार राष्ट्रीय राजमार्ग को पार कर नदी में उतर रहे हैं। भारी गर्मी के बीच जबरदस्त उमस के कारण हाथियों का नदी में उतरने का सिलसिला भी लगातार बढ़ रहा है।
ऐसे में थोड़ी सी असावधानी जानलेवा साबित हो सकती है। कोटद्वार क्षेत्र के हाथी भले ही शांत प्रवृत्ति के हों, लेकिन झुंड में मौजूद शिशु हाथी की सुरक्षा के दृष्टिगत हथिनी कब आक्रामक होकर हमला कर दे, कहा नहीं जा सकता।
भारी पड़ सकता है सेल्फी का शौक
हाथियों के व्यवहार से पूरी तरह अपरिचित युवा सोशल मीडिया में फोटो अपलोड करने के लिए हाथियों के झुंड के समीप पहुंच सेल्फी खींचने का भी प्रयास करते नजर आते हैं, जो कि जानलेवा साबित हो सकता है। भले ही हाथी शांत नजर आ रहा हो, लेकिन कब उग्र हो जाए, कहा नहीं जा सकता।
ऐसे में हाथियों के झुंड से दूरी बनाए रखने में ही भलाई है। कई वाहन चालक हाथियों के झुंड के सड़क में होने के बावजूद झुंड के करीब से वाहन निकालने का प्रयास भी करते हैं, जो कि मौत को गले लगाने समान है।इन बातों का रखे ध्यान हाथियों का झुंड दूर से देखने में भले ही शांत नजर आए।
लेकिन, हाथी कब आक्रामक रूख अख्तियार कर ले, यह कह पाना संभव नहीं। झुंड में शिशु हाथियों की सुरक्षा के प्रति हाथी काफी संवेदनशील होते हैं। झुंड अपने आसपास एक दायरा निश्चित किए रहता है व उस दायरे के भीतर पहुंचने का अंजाम काफी बुरा हो सकता है।
इतना ही नहीं, हाथियों के झुंड की ओर कभी पत्थर न फेंके और न ही हाथियों को देख शोर मचाए। इन हरकतों से हाथी आक्रामक रूख अख्तियार कर सकते हैं। सबसे बेहतर यही है कि हाथियों से दूरी बना प्रकृति की इस अनमोल धरोहर कर दीदार करें।
