हल्द्वानी— उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय और एमबीपीजी कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग व एंटी ड्रग सेल के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को विश्व आत्महत्या निवारण दिवस पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित हुई। “सक्रिय पहल से आशा का सृजन” विषय पर हुई कार्यशाला विवि के जनरल बिपिन रावत सभागार में हुई।

कार्यक्रम का शुभारंभ समाज विज्ञान विद्याशाखा की निदेशक प्रो. रेणु प्रकाश ने किया। मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सीता ने कहा कि आधुनिक जीवन में बढ़ते एकाकीपन से नकारात्मक भावनाएं बढ़ रही हैं, जिन्हें दबाने के बजाय समय पर व्यक्त करना जरूरी है।
मुख्य अतिथि एमबीपीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एनएस बैंकोटी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को कलंक के रूप में नहीं, संवेदनशीलता के साथ देखना चाहिए। मुख्य वक्ता डॉ. युवराज पंत, सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य का सीधा असर शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
उप वक्ता डॉ. तनुश्री गौर ने समुदाय की भूमिका पर जोर देते हुए पांच चरणों की व्यावहारिक आकलन प्रक्रिया और टेली-मानस हेल्पलाइन की जानकारी दी।

कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि निरंतर संवाद और अपनों से विचार साझा करना बेहद जरूरी है।
इस दौरान एमबीपीजी कॉलेज की टीम ने नुक्कड़ नाटक के जरिए आत्महत्या निवारण में सामाजिक सहयोग का संदेश दिया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. भाग्यश्री जोशी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. किरण कर्नाटक ने दिया।
