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कोटद्वार– कवि सोहनलाल द्विवेदी की प्रसिद्ध कविता लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती… की इन पंक्तियों को चरितार्थ किया है कोटद्वार के भव्य ब्रविम ध्यानी ने।

 

 

देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा लिए भव्य ने तीन बार के प्रयास में असफल होने के बाद भी अपना प्रयास जारी रखा और चौथी बार में अपनी कड़ी मेहनत और लगन की बदौलत भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग आफिसर पद पर कमीशन प्राप्त किया।

 

भव्य पौड़ी जनपद के मूल ग्राम भौन, विकास खंड नैनीडांडा, तहसील धुमाकोट के मूल निवासी और हाल में उनका निवास पदमपुर सुखरौ कोटद्वार में हैं।

 

शिक्षक राकेश मोहन ध्यानी व माता बबीता ध्यानी के होनहार बेटे भव्य का बचपन से ही डिफेंस ऑफिसर बनने का सपना था।

 

सेंट जोसफ कॉन्वेंट स्कूल कोटद्वार से 12वीं तक की शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने अपने सपने को साकार करने के प्रयास शुरू कर दिए।

 

दिल्ली विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। उसके बाद वायुसेना में कमीशन प्राप्त कर अपने परिजनों और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

 

 

फ्लाइंग आफिसर ध्यानी ने भारतीय वायुसेना अकादमी हैदराबाद से प्रशिक्षण प्राप्त कर भारतीय वायुसेना में अधिकारी बने हैं।

 

वे इससे पूर्व वे गणतंत्र दिवस में एनसीसी विंग के माध्यम से प्रतिभाग कर चुके हैं।

 

ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 15 जून को वायु सेना अकादमी हैदराबाद से पास आउट हुए।

 

पासिंग आउट परेड में उनके माता पिता के साथ बड़ी बहन डा. क्षितिजा मोहन ध्यानी भी सम्मलित हुई।

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भव्य की सफलता से पूरे परिवार, उनके मित्रों में खुशी का माहौल है।बताते चलें कि भव्य पौड़ी गढ़वाल के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय अम्बिका प्रसाद ध्यानी के प्रपौत्र हैं।

 

दादा जी स्व. कांन्ता प्रसाद ध्यानी व नाना जी चन्द्र प्रकाश अरोड़ा भी रक्षा सेवाओं में कार्यरत रहे हैं। भव्य ने अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों, माता पिता के मार्गदर्शन को दिया है।


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