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ग़ाज़ियाबाद—   सेव मदर अर्थ मिशन की स्थापना श्री श्याम तायल, श्रीमती तनु अग्रवाल और डॉ भारती गर्ग ने मिलकर अगस्त 2020 में की थी।

 

शुरुवात में तो सिर्फ 25-30 लोग ही जुड़े पर समय के साथ कारवां बढ़ता चला गया। मिशन के सह संयोजक श्याम तायल ने सभी भागीदारों की सराहना की। इस संगठन की उपलब्धियों मद कुछ इस प्रकार हैं—-

 

– 2,50,000 किलोग्राम प्लास्टिक अपशिष्ट संग्रहण का आंकड़ा पार करना!

– 56 महीनों में, हमने प्रति माह औसतन 4,500 किलोग्राम प्लास्टिक अपशिष्ट संग्रहित किया है।

– 20,000 से अधिक व्यक्ति, 250+ सोसाइटी, शैक्षणिक संस्थान, कार्यालय और कंपनियां इस मिशन में शामिल हैं।

 

– 58 सोसाइटियों ने 1,000 किलोग्राम का आंकड़ा पार किया है।

– 2 सोसाइटी ने 15,000 किलोग्राम से अधिक संग्रहित किया है।

– 2 सोसाइटी ने 10,000 किलोग्राम और 15,000 किलोग्राम के बीच संग्रहित किया है।

– 4 सोसाइटी ने 5,000 किलोग्राम और 10,000 किलोग्राम के बीच संग्रहित किया है।

– 50 सोसाइटी ने 1,000 किलोग्राम और 5,000 किलोग्राम के बीच संग्रहित किया है।

 

पर्यावरण पर प्रभाव:—

– इस प्लास्टिक अपशिष्ट को संग्रहित और रिसाइकल करके, हमने लगभग 8,75,000 किलोग्राम CO2 को पर्यावरण से कम करने में सफलता प्राप्त की है।

 

सेव मदर अर्थ मिशन के आयोजकों ने मदर अर्थ को बचाने के लिए सभी से जुड़ें रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अपने साथ और को जोड़े ताकि ज्यादा से ज्यादा प्लास्टिक को कूड़े के ढेर में जाने से बचाया जा सके।

 

मिशन को टीम आईपीसीए और डाबर इंडिया का समर्थन प्राप्त है। मिशन के आयोजकों ने इन दोनों संगठनों के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया है।

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मिशन के आयोजकों ने सभी से अपील की है कि वे प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के उनके प्रयासों में शामिल हों। उन्होंने कहा कि आइए हम साथ मिलकर प्रदूषण को कम करने में सहयोग जारी रखें और एक स्वच्छ, हरित भविष्य बनाने के सामूहिक प्रयास का हिस्सा बनें।

 

संस्थापक सदस्यों तनु अग्रवाल, भारती गर्ग और श्याम तायल ने सभी टीम भागीदारों और समर्थकों के समर्पण और मेहनत की सराहना की और कहा कि आपके प्रयासों ने महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है, और हम आगे भी सहयोग की अपेक्षा करते हैं।

 

मीडिया कॉर्डिनेटर मनोज अग्रवाल ने टीम आईपीसीए, डाबर इंडिया, और मिशन के सभी सहयोगियों को अटूट समर्थन के लिए धन्यवाद देते हुए अपील की कि आइए हम प्लास्टिक प्रदूषण-मुक्त भविष्य की दिशा में काम करना जारी रखें!


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