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हल्द्वानी—  उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने गुरुवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया।

समारोह में विश्वविद्यालय ने उत्तराखंड की मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर गोविंद सिंह को विशेष रूप से सम्मानित किया।

इस अवसर पर प्रो. गोविंद सिंह ने विश्वविद्यालय से जुड़ी अपनी यादें साझा की और सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने जीवनकाल की घटनाओं को सिलसिलेवार याद करते हुए अपने शिक्षकों का स्मरण किया और कहा कि बिना शिक्षकों के तराशे, एक छात्र कुछ भी नहीं है।

उन्होंने अपने शिक्षकों रेवती देउपा और वीरेन्द्र मेंहदी रत्ता को विशेष तौर पर याद किया और कहा कि उनके निर्माण में उनके शिक्षकों का पूरा योगदान रहा।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने प्रो. गोविंद सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपने अनुभवों से हमें शिक्षक की भूमिका को बेहतर ढंग से समझने का अवसर दिया।

उन्होंने कहा, पिछले 35 वर्षों से मैं प्रो. गोविंद सिंह को जानता हूँ। पत्रकारिता की दुनिया में जहां-जहां वह गए, वहां मुझे लेखनी के तौर पर सहयोग का अवसर मिलता रहा. प्रो. लोहनी ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों के लिए संदेश दिया कि उन्हें हमेशा यह देखना चाहिए कि वह विद्यार्थी जो प्राकृतिक आपदा या संसाधनों की कमी के कारण पढ़ाई से वंचित रह जाता है, उसकी शिक्षा तक कैसे पहुँच बनाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि यह मुक्त और दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों का पहला कर्तव्य है। उन्होंने सभी शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपने विद्यार्थियों के प्रति इस तरह की प्रतिबद्धता रखें कि भविष्य में उन्हें भी इसी तरह सम्मानित किया जा सके।

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इस अवसर पर समारोह के संयोजक प्रो. पी. डी. पंत ने सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए कहा कि शिक्षक दायित्वों का निर्वाहन करना सबसे नोबल पेशा है।

कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के प्रो. शशांक शुक्ला ने किया।सम्मान समारोह में विश्वविद्यालय के संपूर्ण परिवार ने भाग लिया, जिनमें प्रमुख रूप से प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे, प्रो. एम. एम. जोशी, प्रो. रेनू प्रकाश, प्रो. मंजरी अग्रवाल, डॉ. भानू जोशी, प्रो. जीतेंद्र पांडे, सहित अन्य शिक्षक उपस्थित थे।


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