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उधम सिंह नगरजीएसटी विभाग में बैठे जिम्मेदार अधिकारी अब खुद ही टैक्स चोरी के रक्षक बन चुके हैं! विभाग के डिप्टी कमिश्नर पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने अपने पद की गरिमा को ताक पर रखकर जीएसटी चोरी करने वालों से सांठगांठ कर ली है। सूत्रों की माने तो डिप्टी कमिश्नर हर महीने जीएसटी चोर कारोबारियों से मोटी “मासिक सुविधा शुल्क” की रकम वसूलते हैं — और बदले में उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं करते।

 विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि जिन पटाखा गोदामों पर हाल में विभाग ने छापेमारी की है, उनकी सूचना भी किसी शिकायतकर्ता ने ही दी थी। यानी कार्रवाई मजबूरी में की गई — ताकि दिखाया जा सके कि विभाग सक्रिय है। जबकि सच्चाई यह है कि जिन गाड़ियों को रोका गया, वे भी शिकायत के दबाव में रोकी गईं। इसके पुख्ता साक्ष्य हमारे अख़बार के पास मौजूद हैं।

अब सवाल उठता है — क्या सूचना मिलने से पहले जिले में कोई टैक्स चोरी नहीं हो रही थी? क्या विभाग की आंखें तब तक बंद थीं जब तक कोई शिकायत न कर दे?

सूत्रों के अनुसार, रुद्रपुर के एक बड़े पटाखा कारोबारी के करीब 11 गोदाम हैं, जिनमें करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी की गई। लेकिन विभाग ने इस भारी घोटाले को सिर्फ 40 लाख रुपये की चोरी दिखाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया — और राजस्व को करोड़ों का नुकसान पहुँचा दिया।

यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से चल रहा है — सूचना देने वालों को उपयोग कर, विभाग खुद को सक्रिय दिखाने की कोशिश कर रहा है, जबकि हकीकत में टैक्स चोरी का असली साम्राज्य उन्हीं की नाक के नीचे फल-फूल रहा है।

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