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बद्रीनाथ—  उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने मामले में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के पूर्व टेंपल अधिकारी राजेंद्र सिंह चौहान को गिरफ्तार कर लिया है।

एसआईटी ने करीब चार घंटे तक पूछताछ करने के बाद उन्हें हिरासत में लिया। अदालत में पेश कर आगे की पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की जा सकती है।

गिरफ्तारी के बाद एसआईटी ने राजेंद्र सिंह चौहान से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान जांच टीम को अलग-अलग देशों की विदेशी मुद्रा , महंगी केसर और अन्य सामग्री बरामद हुई है।

एसआईटी ने पुष्टि की है कि विदेशी मुद्रा और केसर समेत कुछ अन्य सामान जांच के दौरान मिला है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि इन वस्तुओं का इस मामले से क्या संबंध है और इन्हें किन परिस्थितियों में रखा गया था।

सोशल मीडिया से शुरू हुआ मामला, जांच तक पहुंचा

बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित गड़बड़ियों के आरोप सबसे पहले सोशल मीडिया पर सामने आए। इसके बाद भैरव सेना’ नामक संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई। मामला तूल पकड़ने पर उत्तराखंड सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए।

राज्य सरकार ने गढ़वाल मंडल आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने विस्तृत जांच के बाद अपनी 18 पन्नों की रिपोर्ट सरकार को सौंपी। रिपोर्ट में चढ़ावे की गिनती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए, जिनमें गिनती के दौरान ड्रेस कोड, अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे मजबूत निगरानी व्यवस्था और पारदर्शी प्रक्रिया लागू करने की सिफारिश शामिल है।

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पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

इस मामले में इससे पहले BKTC अध्यक्ष कार्यालय में तैनात निजी सहायक प्रमोद नौटियाल को निलंबित किया गया था। बाद में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। वहीं चढ़ावे के रजिस्टर में ओवरराइटिंग पाए जाने के बाद मंदिर के कोषाध्यक्ष का भी तबादला कर दिया गया था।

पुराने CCTV फुटेज भी खंगाल रही SIT

जांच एजेंसी अब पुराने सीसीटीवी फुटेज की गहन पड़ताल कर रही है। डिलीट किए गए वीडियो को रिकवर करने का प्रयास भी जारी है। एसआईटी का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों से पूरे मामले की कई और अहम कड़ियां सामने आ सकती हैं और जांच का दायरा आगे बढ़ सकता है।

जांच अभी जारी है

एसआईटी का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण से आगे बढ़ रही है और सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है। फिलहाल किसी भी व्यक्ति की अंतिम जिम्मेदारी या दोष का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि इस कथित अनियमितता में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है। श्रद्धालुओं की अपेक्षा है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों के आधार पर पूरी हो, ताकि सच सामने आए और यदि कोई दोषी है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।


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