Category: मनोरंजन

  • हार्टी कल्चर टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा, रामगढ़ बनेगा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र – सांसद अजय भट्ट।

    हार्टी कल्चर टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा, रामगढ़ बनेगा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र – सांसद अजय भट्ट।

    भवाली—  उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में हार्टी टूरिज्म को बढ़ावा देने के प्रयास तेज़ हो गए हैं।

    मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद ने रामगढ़ स्थित सेब बागान का निरीक्षण करने के साथ ही चल रहे कार्यों की जानकारी ली।

    निरीक्षण के दौरान सांसद भट्ट ने कहा कि हार्टी टूरिज्म के माध्यम से पर्यटकों को नई तरह की अनुभवात्मक यात्रा का अवसर मिलने के साथ ही यह स्थानीय लोगों के अवसर व रोजगार के नए द्वार भी खोलेगा, बताया कि रामगढ़ में आठ एकड़ भूमि पर पाँच करोड़ से अधिक लागत से एक विशेष परियोजना विकसित की जा रही है।

    जिसके तहत न केवल पर्यटकों को सेब के बागीचों की सैर का सुखद अनुभव करने मिलेगा ,बल्कि किसानों के लिए प्रशिक्षण केंद्र और पर्यटकों के लिए आधुनिक कैफे हट्स में ठहरने की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

    जो क्षेत्रीय पर्यटन को नई दिशा देने के साथ ही कृषि आधारित स्वरोजगार को भी मजबूती देगी।

    इस दौरान महिला मोर्चा प्रदेश महामंत्री भावना मेहरा मण्डल अध्यक्ष ,अंकित पांडेय ,शिवांशु जोशी ,रवि नयाल ,प्रदीप ढेला भारत भूषण चुग ,कुंदन चिलवाल ,देवेंद्र बिष्ट, शुभम कुमार ,उद्यान अधीक्षक सरस्वती बृजवाल ,ए डी ओ विपिन चंद्र गरवाल मौजूद रहे।

  • अनोखी प्रतिभा– माचिस की तीलियों से प्रतिकृति को जीवित करता उत्तराखण्ड़ का लाल।

    अनोखी प्रतिभा– माचिस की तीलियों से प्रतिकृति को जीवित करता उत्तराखण्ड़ का लाल।

    पौडी—   उत्तराखण्ड की पावन धरती पर समय-समय पर ऐसे अद्भुत व्यक्तित्व पैदा होते रहे हैं। जिनकी प्रतिभा देखकर हम आश्चर्य से दांतों तले उंगलियाँ दबाने को विवश हो जाते हैं।

    ऐसी ही एक प्रतिभा से आज आपका परिचय कराने जा रहा हूँ जिन्होंने अपनी  कलाकृतियों (प्रतिकृतियों) से लोगों का मन मोह लिया है।

    मैं आज आपको मिलवाने जा रहा हूँ,  पंकज जी से,, तीलियों से प्रतिकृतियाँ गढ़ने में माहिर है।

    पंकज सुन्दरियाल का जन्म ग्राम मजगाँव,  किमगड़ीगाड़ पट्टी-चौन्दकोट, पौड़ी गढ़वाल में स्व. पुरुषोत्तम सुन्दरियाल एवं श्रीमती कान्ती देवी के अंशज के रूम में 6 जुलाई सन् 1981 को हुआ।

    प्रधानाचार्य पिता के पुत्र पंकज की प्रारम्भिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय-चौबट्टाखाल, पौड़ी गढ़वाल में हुई। माध्यमिक शिक्षा राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज चौबट्टाखाल एवं तत्पश्चात् पौड़ी कैम्पस से परास्नातक (एम.एससी.) परीक्षा उत्तीर्ण की।

    इसके पश्चात् उन्होंने पर्यटन और यौगिक सर्विस में पीजी डिप्लोमा हासिल किया। फिर बी.एड और विशिष्ट बीटीएस का प्रशिक्षण प्राप्त किया। सन् 2009 में आप श्री गुरु राम राय स्कूल पैठाणी में अध्यापक हो गये।

    वह सन् 2009 ही था जिसने पंकज सुन्दरियाल की जिन्दगी और सपनों को बदल कर रख दिया। जॉब लगने से पहले वह दुकानदारी करते थे, दुकानदारी के बाद जब वे घंटों अकेले बैठे रहते तो उनका क्रिएटिव मन कुछ ऐसा करने की ठान बैठा जो अलग हो, जिसे अकेले किया जाय और जो सपना साकार करें।

    उस दिन बुधवार सुबह वे मंदिर गये और घर वापसी में अचानक माचिस और फेविकोल घर लेकर आ गये। बस यही कदम पंकज को बुलंदियों की ओर लेकर चल पड़ा। एक बार इन्होंने श्री केदारनाथ की पेंटिग बनाई थी, अब इनके मन में आया कि क्यों न श्री केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति माचिस की तीलियों से बनाई जाय। यही सोचकर वह बाजार से माचिस व फेविकोल घर ले आये थे।

    माचिस की तीलियों से श्री केदारनाथ मन्दिर की प्रतिकृति बनाने में जुट गये। श्री केदारनाथ का मंदिर पूरा होते ही पंकज श्री गुरू राम राय स्कूल पैठाणी में अध्यापक बन गये।

    पुनः सन् 2012 में उनका चयन सरकारी सेवा में अध्यापक के रूप में हो गया, किन्तु उन्होंने अध्यापन के साथ-साथ तीलियों से निर्माण का सफर जारी रखा, जिसकी परिणति है कि आज तक पंकज सुन्दरियाल ताजमहल, बोरगण्ड चर्च नार्वे, कार्नर टावर आफ चाइना और अब श्री राम मंदिर अयोध्या की नायाब प्रतिकृति तैयार कर चुके है।

    शिक्षक पंकज सुन्दरियाल बताते है कि वह माचिस की तीलियों से तीन साल में निर्मित श्री राम मंदिर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेट करना चाहते है, ताकि इसे भविष्य में बनने वाले अयोध्या के राम मन्दिर संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाए।

    पंकज सुन्दरियाल उत्तराखंड की स्थानीय कला व हुनर को भी संगठित, प्रोत्साहित व प्रसारित करना चाहते है। इस हेतु प्रशिक्षण केंद्र सहित प्रतिकृतियों का संग्रहालय भी भविष्य में स्थापित करना चाहते है। उन्होंने विद्यालय में भी शिक्षक पंकज बच्चों को हस्तशिल्प सिखाते रहते हैं। शिक्षक पंकज सुन्दरियाल ने बताया कि वे सभी धर्मों के वस्तु पर कार्य कर चुके है।

    भविष्य में वे गुरुद्वारा भी बनाना चाहते है। वे दुनिया को अपनी कला के जरिए सर्व धर्मसमभाव का संदेश देना चाहते है। पंकज सुन्दरियाल लगातार दो बार सन् 2021 और 2022 में इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में नाम दर्ज कराने वाले उत्तराखंड के पहले व्यक्ति बने है।

    पंकज सुन्दरियाल द्वारा बनाया हुआ श्री राम मंदिर इतना खूबसूरत है कि हर देखने वाले का सिर श्रद्धा से झुक जाता है। इसे देखने वालों के लिए इसमें जो आकर्षित करने वाला तथ्य है, वह है धैर्य के साथ जी तोड़ मेहनत और पंकज की लगनशीलता।

    चूंकि शिक्षक पंकज सुन्दरियाल के पिता भी एक अध्यापक थे तो उन्होंने पंकज को हमेशा धैर्य, लगनशीलता और निरंतरता का पाठ पढ़ाया। इस पाठ की परिणिति हम सबके सामने पंकज की उपलब्धियों के रूप में है।

    पंकज सुन्दरियाल वर्तमान समय में राजकीय प्राथमिक विद्यालय अन्सारी थापला कोटा संकुल , एकेश्वर ब्लॉक, पौड़ी गदवाल में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। एवं अध्यापन के साथ-साथ वे अपने छात्रों को प्रतिकृति निर्माण कला को भी हस्तान्तरित करने का सफल प्रयास कर रहे हैं।।

  • मुख्यमंत्री ने किया युवा एवरेस्ट विजेता को सम्मानित।

    मुख्यमंत्री ने किया युवा एवरेस्ट विजेता को सम्मानित।

    देहरादून—  मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने माउंट एवरेस्ट को विजय करने वाले युवा पर्वतारोही  रोहित भट्ट को आज मुख्यमंत्री आवास में सम्मानित किया |

    इस अवसर पर  रोहित भट्ट ने अपनी अब तक की विभिन्न पर्वतारोहण यात्राओं और अनुभवों को साझा किया।

    मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने पर्वतारोही  रोहित भट्ट को एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक आरोहण की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रोहित भट्ट जैसे साहसी युवाओं पर उत्तराखंड को गर्व है।

    उन्होंने न केवल कठिन पर्वतीय चुनौती को पार किया है, बल्कि हर युवा के हृदय में आत्मविश्वास का भाव भी जगाया है।

  • बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन’ विषय पर संत निरंकारी मिशन का व्यापक वृक्षारोपण एवं स्वच्छता अभियान।

    बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन’ विषय पर संत निरंकारी मिशन का व्यापक वृक्षारोपण एवं स्वच्छता अभियान।

    हरिद्वार—  प्रकृति मानव जीवन की सदा-संगीनी रही है, उसकी छांव में सभ्यताओं ने आकार लिया, संस्कृतियाँ पनपीं और जीवन निरंतर रूप से विकसित होता रहा।

    किंतु जब मानवीय स्वार्थ ने संतुलन का दायरा लांघा, तब इस जीवनदायिनी प्रकृति को क्षतिग्रस्त होना पड़ा।

    मानव शायद यह भूल जाता है कि वह स्वयं भी इसी प्रकृति का ही एक अंग है। आज, पर्यावरणीय संकट की गूंज वैश्विक चेतना को झकझोर रही है और इसी अनुभूति के तहत संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्रतिवर्ष 5 जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ आयोजित किया जाता है।

    इस वैश्विक पहल से प्रेरणा लेते हुए, संत निरंकारी मिशन की सामाजिक शाखा, संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन, सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के लोकमंगलकारी एवं दूरदर्शी नेतृत्व में, संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित थीम ‘बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन’ को केंद्र में रखते हुए देशभर के 18 प्रमुख पर्वतीय पर्यटक स्थलों पर 5 जून को प्रातः 8:00 से दोपहर 2:00 बजे तक एक व्यापक वृक्षारोपण एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन करने जा रहीं है।

    यह प्रयास न केवल स्वच्छ, हरित एवं संतुलित पर्यावरण की दिशा में एक सशक्त कदम है, बल्कि यह आज की युवा पीढ़ी को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने और संरक्षण की भावना को व्यवहार में उतारने की एक प्रेरणादायक पहल भी है।

    एक ऐसा अभियान जो सेवा, सद्भाव और सजगता को जनचेतना से जोड़ता है।

    संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के सचिव जोगिंदर सुखीजा ने जानकारी देते हुए बताया कि मिशन वर्ष 2014 से ही संयुक्त राष्ट्र के ‘युनाईटेड नेशन एनवाईरनमेंट प्रोग्राम‘ पर्यावरण कार्यक्रम की थीम पर ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ आयोजित कर रहा है।

    यह एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि एक सतत जनचेतना अभियान है जो प्रकृति और मानवता के बीच सौहार्द्रपूर्ण संबंध को पुनः सशक्त करता है।

    इस महाअभियान के अंतर्गत देश के विविध प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण 18 प्रमुख पर्वतीय एवं पर्यटक स्थलों को सम्मिलित किया गया है,

    जिनमें उत्तराखंड के मसूरी, ऋषिकेश, लैंसडाउन, नैनीताल, चकराता एवं भवाली; हिमाचल प्रदेश के शिमला, मनाली और धर्मशाला; गुजरात का सापुतारा; महाराष्ट्र के महाबलेश्वर, पंचगनी, खंडाला, लोनावाला, पन्हाला एवं सोमेश्वर; सिक्किम का गीजिंग और कर्नाटक की सुरम्य नंदी हिल्स विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

    ये स्थल न केवल प्रकृति की गोद में बसे हैं, बल्कि पर्यावरण जागृति के प्रति समर्पित ऐसे केंद्र बिंदु बन रहे हैं जहाँ निष्काम सेवा और सहभागिता एक साथ साकार हो रही हैं।

    इस अवसर पर मिशन के स्वयंसेवक, सेवादल सदस्य, श्रद्धालुजन एवं स्थानीय नागरिक एकजुट होकर प्रार्थना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे।

    तदोपरांत युवा स्वयंसेवक नुक्कड़ नाटकों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और रचनात्मक संदेशों के माध्यम से प्लास्टिक प्रदूषण के दुष्प्रभाव और समाधान पर जन-जागरूकता फैलाएंगे।

    पर्यावरण संरक्षण से समबद्ध युक्त तख्तियाँ व बैनर लिए मानव श्रृंखला बनाकर समाज को प्रेरित किया जाएगा।

    इस विश्व पर्यावरण दिवस पर संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन का यह समर्पित प्रयास एक सार्थक संदेश देता है, आइए, मिलकर पर्यावरण की रक्षा करें और भावी पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुंदर और संतुलित पृथ्वी का निर्माण कर सके।

  • विकसित उत्तराखण्ड के लिए ग्राम स्तर से जनपद स्तर तक किए जाए कार्य:- मुख्यमंत्री

    विकसित उत्तराखण्ड के लिए ग्राम स्तर से जनपद स्तर तक किए जाए कार्य:- मुख्यमंत्री

    देहरादून—  2047 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने की दिशा में हर क्षेत्र में तेजी से कार्य किये जा रहे है।

    विकसित उत्तराखण्ड के लिए ग्राम स्तर से जनपद स्तर तक 2047 तक कैसा स्वरूप होगा, इस दिशा में जिलाधिकारियों द्वारा कार्य किये जाएं।

    समाज के अन्तिम छोर के लोगों तक पहुंचकर उन्हें जन कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ ही उनको मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में कार्य किये जाएं।

    ये निर्देश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास से वर्चुअल बैठक के दौरान सभी जिलाधिकारियों को दिये।

    मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि अपने जनपदों में जनहित से जुड़े 5-5 बैस्ट प्रैक्टिस और नवाचारों पर कार्य किया जाए।

    उन्होंने कहा कि राज्य में सबसे पहले टीबी मुक्त होने वाले तीन जनपदों को पुरस्कृत किया जायेगा। सभी जिलाधिकारियों को नियमित स्वच्छता अभियान चलाने के साथ ही 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस से 25 जुलाई तक जनपदों में बृहद स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये हैं।

    एक पेड़ माँ के नाम अभियान को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने के साथ ही प्लास्टिक मुक्त उत्तराखण्ड के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए।

    जलस्रोतों के संरक्षण और अमृत सरोवरों की कार्यप्रगति की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और प्रत्येक जनपद में इसके लिए नोडल अधिकारी बनाये जाएं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय मौसम विभाग द्वारा मानसून अवधि में राज्य में औसत से अधिक बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसको ध्यान में रखते हुए पूरी तैयारी की जाए।

    यह सुनिश्चित किया जाए कि मानसून शुरू होने से पहले नालों की सफाई हो जाए। मानसून सीजन को ध्यान में रखते हुए पेयजल, विद्युत, सड़कों की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। पानी की टंकिया स्वच्छ रखी जाएं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि डेंगू, मलेरिया और कोरोना से बचाव के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए।

    अस्पतालों में सभी आवश्यक व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जाए। सभी जिलों में आपदा प्रबंधन तंत्र को अलर्ट मोड में रखा जाए। टोल-फ्री नंबरों को सभी जिलों एवं तहसीलों में सक्रिय किया जाए।

    जिससे नागरिक आपात स्थिति में तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा रूट पर विशेष सतर्कता एवं सक्रियता बरती जाए। यातायात, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अतंरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए सभी जिलों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए। व्यापक स्तर पर योग शिविरों का आयोजन किया जाए।

    15 जून को होने वाले कैंची धाम स्थापना दिवस के अवसर पर ट्रैफिक प्रबंधन के लिए यातायात व्यवस्था के साथ ही आवश्यकतानुसार अस्थायी पार्किंग स्थलों की व्यवस्था की जाए।

    वैरिफिकेशन ड्राइव को और अधिक प्रभावी एवं तेज गति से संचालित किया जाए।

    अवैध रूप से बनाये गये आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड और अन्य दस्तावेजों के विरूद्ध सख्त अभियान निरंतर जारी रखा जाए।

    सड़कों के किनारे अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। सरकारी कार्यालय में 1064 हेल्पलाइन से संबंधित बोर्ड एवं बैनर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किये जाए और भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखण्ड के लिए लोगों को जागरूक किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दिया जाए और इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाए। एक जनपद दो उत्पाद पर विशेष ध्यान दिया जाए। सरकारी कार्यक्रमों में स्थानीय उत्पादों का उपयोग किया जाए, इसका पूर्णतः पालन किया जाए।

    जिलाधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री घोषणाओं की नियमित समीक्षा की जाए। सभी जिलाधिकारी अपने जनपदों में लैण्ड बैंक की स्थिति पर विशेष ध्यान दें।

    वर्षा जल संचय की दिशा में और प्रयास किये जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनाग्नि प्रबंधन के लिए भी हर प्रकार से सुरक्षात्मक उपाय किये जाएं।

    बैठक में प्रमुख सचिव  आर.के. सुधांशु, उपाध्यक्ष एमडीडीए श्री बंशीधर तिवारी, वर्चुअल माध्यम से कुमांऊँ कमिश्नर श्री दीपक रावत एवं सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को हरिद्वार पहुँचकर वात्सलय गंगा आश्रय का किया लोकार्पण।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को हरिद्वार पहुँचकर वात्सलय गंगा आश्रय का किया लोकार्पण।

    हरिद्वार—-  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को हरिद्वार पहुँचकर वात्सलय गंगा आश्रय का लोकार्पण किया तथा श्री कृष्ण कथा में प्रतिभाग करते हुए साधु सन्तों का आशीर्वाद प्राप्त किया।

    इस अवसर पर उन्होंने माँ गंगा की आराधना कर समस्त प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की भी प्रार्थना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि साध्वी ऋतम्भरा द्वारा जो प्रकल्प चलाए जा रहे हैं, उनके बारे में जितना कहा जाए उतना ही कम है।

    उनके के नेतृत्व में निराश्रित बेटियों को नव जीवन देने का जो दिव्य कार्य हो रहा है, वह समाज में आशा, करुणा और पुनर्निर्माण का सशक्त प्रतीक है।

    उनके संकल्प से अनेक बेटियों का जीवन सकारात्मक दिशा में परिवर्तित हुआ है। यह वास्तव में समाजसेवा की प्रेरणादायी मिसाल है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन से देवभूमि उत्तराखंड में अनेक प्रकार के विकास कार्य हो रहे हैं जिसमें समान नागरिक संहिता प्रमुुख है,

    देवभूमि उत्तराखण्ड से जैसे मां गंगा निकलती है और यहां से निकलकर पूरे देश को जल और जीवन देने का काम करती हैं इस प्रकार समान नागरिक संहिता की यह गंगोत्री उत्तराखंड से निकली है और आगे आने वाले समय में पूरे देश को इसका लाभ मिलने वाला है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में धार्मिक पुनरुत्थान का महा पर्व चल रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भव्य और दिव्य केदार का निर्माण हुआ है। हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर और शारदा कोरिडोर का कार्य किया जा रहा हैं।

    उन्होंने कहा कि अभी चार धाम यात्रा चल रही है, चार धाम यात्रा का इस वर्ष अभी तक लगभग 18 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन कर लिए हैं। बहुत अच्छी तरीके से यात्रा चल रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली -देहरादून एलीवेटेड रोड का निर्माण पूरा होने वाला है । यह काम पूरा होते ही यह दूरी लगभग दो से ढाई घंटे में पूरी हो जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए उत्तराखंड सरकार कृत संकल्पित है।

    प्रदेश के मूल स्वरूप को बनाए रखने के लिए लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसी विकृत मानसिकताओं के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देवभूमि का जो मूल अस्तित्व है, वह बचा रहना चाहिए।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रदेश में सराहनीय कार्य किए जा रहे हैं, यह दिल्ली के लिए प्रेरणा है।

    उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि है और धामी जी पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा कि जो भी अच्छी योजनाएं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लायेंगे वह दिल्ली में भी जायेंगी। उन्होंने कहा कि मां यमुना स्वच्छ हो, मां गंगा जी के चरणों में आकर अपने इस प्रण को पुनः दोहराया।

    इस दौरान साध्वी ऋतम्भरा जी, परमानन्द गिरी जी महाराज, आचार्य बाल कृष्ण, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महन्त रविन्द्रपुरी जी महाराज,महानिर्वाणी पीठ के आचार्य महामंडलेश्वर विशोखानंद ,महामंडलेश्वर संतोषी माता,महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद महाराज, साध्वी मैत्रीगिरी, विधायक मदन कौशिक, विधायक आदेश चौहान, विधायक प्रदीप बत्रा, मेयर किरन जेसल, जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह, एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल, उपाध्यक्ष एचआरडीए अंशुल सिंह, नगर आयुक्त नन्दन सिंह, अपर जिलाधिकारी दीपेन्द्र सिंह नेगी, दर्जा राज्यमंत्री देशराज कर्णवाल, डॉ.जयपाल सिंह चौहान, ओमप्रकाश जमदग्नि, शौभाराम प्रजापति सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि आदि उपस्थित थे।

  • 31 मई से आयोजित होगा कंडोलिया महोत्सव,  तैयारियों को लेकर डीएम ने सभी विभागों को दिये समन्वय के निर्देश।

    31 मई से आयोजित होगा कंडोलिया महोत्सव, तैयारियों को लेकर डीएम ने सभी विभागों को दिये समन्वय के निर्देश।

    पौडी—-   पौड़ी को पर्यटन के नक्शे पर उभारने के लिये तथा पुराना वर्चस्व लौटाने के लिये 31 मई से पौड़ी मुख्यालय में जय कंडोलिया, पौड़ी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

    जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जिला कार्यालय सभागार में नगर पालिका अध्यक्ष हिमानी नेगी, व्यापार सभा व संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ तैयारी बैठक की।

    सात दिवसीय जय कंडोलिया पौड़ी महोत्सव 31 मई से 6 जून तक आयोजित किया जायेगा।

    वहीं 6 से 8 जून तक कंडोलिया मंदिर में वार्षिक पूजन, जागरण व भंडारे का आयोजन होगा।

    जिलाधिकारी ने महोत्सव की सभी व्यवस्थाओं को पूरा करने व कंडोलिया मंदिर में वार्षिक पूजन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के लिये संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिये हैं।

    उन्होंने कहा कि कंडोलिया मंदिर को भी सिद्वबली, नीलकंठ, धारी देवी व ज्वाल्पा जैसा भव्य स्वरूप दिया जायेगा, जिससे यहां भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच सकें, जिससे पर्यटन की अपार संभावनाएं बढ़ सकेंगी।

    जिलाधिकारी ने कहा कि पौड़ी मुख्यालय अपने अप्रतिम सौंदर्य के लिए विख्यात है। देवदार, बांज, बुरांस के पेड़ों से घिरा कंडोलिया मंदिर श्रद्धालुओं के साथ ही सैलानियों के लिये भी आकर्षण का केंद्र है। यहां से बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियां दिखाई देती हैं, जिन्हें देखकर लोग सारी थकान भूल जाते हैं।

    जिलाधिकारी ने जय कंडोलिया महोत्सव में विभिन्न विभागों को बहुउद्देशीय शिविर में स्टॉल लगाने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि सात दिवसीय इस महोत्सव में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे।

    इसके लिए उन्होंने शिक्षा विभाग को स्कूली बच्चों से झांकी, पेंटिंग प्रतियोगिता, क्विज प्रतियोगिता सहित अन्य प्रतियोगिताएं आयोजित कराने को कहा। साथ ही उन्होंने संबंधित विभागों को कवि सम्मेलन, बैडमिंटन, डॉग शो, फैन्सी शो, बेबी शो, सांस्कृतिक कार्यक्रम, फोटोग्राफी प्रदर्शन, मैराथन, साइकलिंग, रस्साकस्सी, संगीत, नवांकुर नाटक, फुटबॉल, हॉट एयर बलून सहित अन्य कार्यक्रमों की रूपरेखा जल्द तैयार करने के निर्देश दिये हैं।

    साथ ही उन्होंने नगर पालिका व व्यापार सभा के पदाधिकारियों से सुझाव मांगे और कहा कि महोत्सव को बड़े स्तर पर आयोजित किये जाने के लिये सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे।

    बैठक में अपर जिलाधिकारी अनिल सिंह गर्ब्याल, जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर, उपजिलाधिकारी रेखा आर्या, सीओ सदर त्रिवेंद्र सिंह, जिला पर्यटन अधिकारी खुशाल सिंह नेगी, मुख्य शिक्षाधिकारी नागेंद्र बर्तवाल, नगर पालिका ईओ शांति प्रसाद जोशी, खंड विकास अधिकारी सौरभ हांडा सहित अन्य अधिकारी, व्यापार सभा के पदाधिकारी व नगर पालिका के वार्ड सदस्य उपस्थित थे।

  • बच्चों ने लिखा, प्रकृति तूने हमे बहुत कुछ दिया,पर हमने तेरा धन्यवाद भी नही कहा।

    बच्चों ने लिखा, प्रकृति तूने हमे बहुत कुछ दिया,पर हमने तेरा धन्यवाद भी नही कहा।

    बागपत/प्रतापगढ़—   प्रतापगढ़ से “एक पत्र प्रकृति के नाम” अभियान का भावनात्मक और संकल्पपूर्ण शुभारंभ हुआ।

    यह अभियान भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के मिशन लाइफ कार्यक्रम के अंतर्गत नेचर ग्रीन फ्यूचर ट्रस्ट एवं उड़ान यूथ क्लब के सहयोग से प्रारंभ हुआ है, जो एक राष्ट्रीय जनभागीदारी अभियान का रूप लेने वाला है।

    इसका उद्देश्य देशभर के युवाओं को प्रकृति से एक आत्मीय संवाद की ओर प्रेरित करना है।

    इस अभियान की विशेष बात यह है कि देशभर से 11,000 से अधिक पत्रों को संकलित कर उन्हें आगामी 5 जून — विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा जाएगा।

    यह अभियान 5 जून तक पूरे भारत के विभिन्न विद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों एवं ऑनलाइन माध्यमों में चरणबद्ध रूप से संचालित होगा।

    अभियान की शुरुआत सोमवार को प्रतापगढ़ के विभिन्न विद्यालयों में हुई, जहाँ बच्चों ने कलम उठाकर प्रकृति माँ को पत्र लिखे।

    इस पहल का नेतृत्व राज्य युवा पुरस्कार से सम्मानित दो युवा पर्यावरणविद् — प्रतापगढ़ के सुंदरम तिवारी और बागपत के अमन कुमार कर रहे हैं।

    डॉल्फिन पब्लिक स्कूल, दिलीपुर और कंपोजिट विद्यालय, घीनापुर दमदम में आयोजित सत्रों में 700 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया और अपने मन की बात कागज़ पर उतारी।

    बच्चों के पत्रों में भावनाएँ थीं, पश्चाताप था, और भविष्य के लिए संकल्प भी।

    किसी ने लिखा — “प्यारी प्रकृति, माफ़ करना, हमने तुम्हारा ध्यान नहीं रखा।”

    किसी ने सवाल किया — “जब पेड़ हमें जीवन देते हैं, तो लोग उन्हें क्यों काटते हैं?” और कई बच्चों ने वादा किया — “मैं अब थर्माकोल की प्लेट नहीं लूँगा, खुद अपनी बोतल लाऊँगा, हर साल एक पेड़ लगाऊँगा।”

    कुछ पत्रों में चित्र थे — फूल, नदी, रोती हुई धरती। एक बच्चे ने लिखा — “तुमने हमें सब कुछ दिया, हमने तुम्हें ‘धन्यवाद’ तक नहीं कहा।”

    यह सिर्फ लेखन नहीं था, यह संवेदना की पुनर्स्थापना थी।

    पर्यावरणविद् सुंदरम तिवारी ने बच्चों से संवाद करते हुए पूछा — “कब आखिरी बार तुमने मिट्टी को हाथ से छुआ?”

    उनके शब्दों ने बच्चों के भीतर सोच का बीज बोया। उन्होंने समझाया कि पानी की बर्बादी रोकना, प्लास्टिक से परहेज़, और प्रकृति से जुड़ाव — छोटे कदम हैं, लेकिन उनका असर बहुत बड़ा हो सकता है।

    प्रधानाचार्य मनोज तिवारी ने कहा — “बच्चे प्रतियोगिता के लिए नहीं, दिल से लिख रहे थे।” उन्होंने इसे एक ऐसा अनुभव बताया जिसमें “किताबों से परे बच्चों की चेतना को झकझोरा गया।”

    शिक्षिका गायत्री त्रिपाठी ने कहा — “संवेदनशीलता पाठ्यक्रम से नहीं, ऐसे अनुभवों से आती है।”

    कार्यक्रम में शिक्षकों की एक समर्पित टीम — प्रवीण सिंह, शिव शंकर निगम, सरवेश सिंह, प्रखर शुक्ला, अजय पांडे, विनय रंजन ओझा, विनोद पांडे, सतीश पांडे, राजेश पांडे, अभिषेक शर्मा, राज गौरव तिवारी — बच्चों को मार्गदर्शन देते रहे।

    यह केवल प्रतापगढ़ तक सीमित पहल नहीं रही। देशभर में इस अभियान से दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज, समृद्ध संस्कृति फाउंडेशन, ‘मेरा युवा भारत’ सहित अनेक संस्थान जुड़ रहे हैं।

    ऑनलाइन गूगल फॉर्म के माध्यम से प्रतिभागी अपने पत्र भेज सकते हैं, और सभी को डिजिटल प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जा रहे हैं।

    सभी संकलित पत्र न केवल प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे जाएंगे, बल्कि उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर भी साझा किया जाएगा ताकि बच्चों की भावनाएँ पूरे देश के नागरिकों तक पहुँचें, और एक साझा चेतना का निर्माण हो सके।

  • एम.आई.ई.टी. कुमाऊँ में 9 मई को होगा वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव “उल्लास 2025”।

    एम.आई.ई.टी. कुमाऊँ में 9 मई को होगा वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव “उल्लास 2025”।

    हल्द्वानी—  एम.आई.ई.टी. कुमाऊँ में दिनांक 9 मई 2025* को बहुप्रतीक्षित वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव “उल्लास 2025” का आयोजन होने जा रहा है।

    इस आयोजन की पूर्व संध्या पर आज 8 मई 2025 को संस्थान परिसर में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें कार्यक्रम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा की गईं।

    प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. बी.एस. बिष्ट (मैनेजिंग डायरेक्टर, एम.आई.ई.टी. कुमाऊँ), डॉ. तरुण कुमार सक्सेना (डायरेक्टर, एम.आई.ई.टी. कुमाऊँ), डॉ. कमल सिंह रावत (सीईओ, एसीआईसी देवभूमि फाउंडेशन), प्रो. उषा पॉल (प्रिंसिपल, कॉलेज ऑफ नर्सिंग), डॉ. शेफाली कपूर (प्रिंसिपल, कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज़), श्री तरा दत्त तिवारी (एचओडी, मैनेजमेंट) और श्रीमती हेमा नेगी (एचओडी, कंप्यूटर साइंस) ने बताया कि यह उत्सव विशेष रूप से उत्तराखंड की संस्कृति को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है।

    उल्लास 2025 न केवल छात्रों को पारंपरिक लोकसंस्कृति के प्रति जागरूक करेगा, बल्कि उन्हें शैक्षणिक तनाव से राहत प्रदान कर आत्मीय और आनंददायक पल बिताने का अवसर भी देगा। आयोजकों का मानना है कि छात्रों को पढ़ाई के बीच इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों से न केवल रचनात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है, बल्कि उनमें सामाजिक समरसता और संस्कृति के प्रति समझ भी विकसित होती है।

    प्रोफेसर डॉ. बी.एस. बिष्ट ने बताया कि इस महोत्सव में उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोकगायिका प्रियंका मेहर अपनी सुमधुर आवाज़ से युवाओं को ऊर्जा से भर देंगी। उनकी प्रस्तुति महोत्सव का प्रमुख आकर्षण होगी, जो पूरे कार्यक्रम को जीवंत बना देगी।

    “उल्लास 2025” में रंगारंग प्रस्तुतियाँ, लोकनृत्य, फैशन शो, संगीत कार्यक्रम, खेलकूद एवं कई अन्य सांस्कृतिक गतिविधियाँ होंगी, जो विद्यार्थियों को विविध रंगों में सराबोर कर देंगी

  • मुख्यमंत्री अर्पित फाउंडेशन द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में हुए शामिल ।

    मुख्यमंत्री अर्पित फाउंडेशन द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में हुए शामिल ।

    मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी गुरूवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में अर्पित फाउंडेशन द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में शामिल हुए।

     

    इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनका व्यक्तिगत नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सवा करोड़ जनता के सहयोग और समर्थन का प्रतीक है, जिन्होंने हर ऐतिहासिक निर्णय में सरकार का साथ दिया।

     

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पहले नकल और पेपर लीक जैसी समस्याओं से युवाओं के सपने टूटते थे, राज्य में देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद पारदर्शिता से परीक्षाएं हो रही हैं और पिछले साढ़े तीन वर्षों में 23 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है।

     

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त करने के लिए अनेक योजनाएं लागू की गई हैं।

     

    संसद में एक तिहाही आरक्षण, उज्ज्वला योजना, लखपति दीदी योजना जैसी अनेक कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसी दिशा में उत्तराखंड सरकार ने भी मुख्यमंत्री नारी सशक्तिकरण योजना, महालक्ष्मी योजना, वात्सल्य योजना, आंचल अमृत योजना और पोषण अभियान जैसे कई प्रभावी कदम उठाए हैं।

     

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पहला राज्य है जहाँ समान नागरिक संहिता को लागू किया गया है, जिससे समाज में समरसता और महिलाओं को समान अधिकार मिले हैं। लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य कर महिलाओं और बच्चों को कानूनी संरक्षण देने का कार्य किया गया है।

     

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में धर्मांतरण, लव जिहाद, लैंड जिहाद जैसी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। दंगारोधी कानून और सख्त भू-कानून लागू कर राज्य को सुरक्षित और संरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। ये सभी निर्णय उत्तराखंड को एक आदर्श और सुरक्षित राज्य बनाने की दिशा में मजबूत नींव हैं। राज्य सरकार प्रदेश को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

     

    इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द मुनी महाराज, स्वामी यतीन्द्रानन्द गिरी, स्वामी कृष्ण गिरी, स्वामी भरत गिरी, वरिष्ठ भाजपा नेता श्री श्याम जाजू, विधायक श्री दुर्गेश्वर लाल, अर्पित फाउण्डेशन की अध्यक्ष श्रीमती हनी पाठक और सामाजिक और सैनिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।