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हल्द्वानी–   उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में मंगलवार को हिमालय दिवस के अवसर पर विज्ञान ब्लॉक में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण, जैव विविधता और सतत विकास पर मंथन हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ अकादमिक निदेशक प्रो. पी.डी. पंत ने किया। उन्होंने हिमालय को *’एशिया का जल स्तंभ’* बताते हुए कहा कि हिमालय की प्रकृति और संवेदनशीलता को समझे बिना कोई भी विकास योजना सफल नहीं हो सकती। आने वाली पीढ़ियों के लिए हिमालय को संरक्षित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शेर सिंह सामंत ने ‘हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण एवं प्रबंधन की आवश्यकता’ पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने कहा कि हिमालय के संरक्षण के लिए दीर्घकालिक अध्ययन जरूरी है। उन्होंने एक्स-सीटू कंजर्वेशन, पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर, इकोलॉजिकल निश मॉडलिंग और आर्बोरेटम जैसी पहल को संरक्षण के लिए जरूरी बताया। साथ ही स्थानीय समुदाय की भागीदारी और सिटिजन साइंस को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

अनुसंधान निदेशालय के प्रमुख प्रो. गिरिजा पांडे ने कहा कि जलवायु आपदाओं को देखते हुए पर्यावरणीय खतरों के विश्लेषण को नीति निर्माण का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण विकास में समन्वय न होने से ‘प्रचुरता के बीच गरीबी’ जैसी स्थिति बन रही है। हिमालय में संसाधनों के विवेकपूर्ण प्रबंधन की जरूरत है।

अंत में कुलसचिव ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कहा कि “हम हिमालय का हिस्सा हैं और हिमालय हमारे अस्तित्व का आधार है।”

कार्यक्रम का संचालन डॉ. बीना तिवारी फुलारा एवं डॉ. प्रीति पंत ने किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी और अधिकारी मौजूद रहे।

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