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नेपाल—  नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने तबाही के साथ कई परिवारों को अपनों की तलाश में छोड़ दिया है। 163 लोगों की मौत के बीच सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें 133 भारतीय तीर्थयात्री भी शामिल हैं।

नेपाल त्रासदी में मरने वालों का आंकड़ा 163 पहुंच गया है. सैकड़ों लोग लापता हैं. ताजा जानकारी के मुताबिक, रसुवा जिले में 403 नेपाली और विदेशी पर्यटक लापता हैं. इनमें से 133 भारतीय हैं.

बिहार और उत्तर प्रदेश में नेपाल से सटे जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. रेस्क्यू और सर्च ऑपरेशन के लिए सेना और पुलिस को तैनात किया गया है. फंसे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

बाढ़ की वजह क्या है?

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद (प्रतिनिधि सभा) को बताया कि इस बाढ़ की शुरुआती और मुख्य वजह तिब्बत क्षेत्र में आया भूकंप और उससे हुआ हिमस्खलन (Avalanche) है. विदेश मंत्री के मुताबिक, तिब्बत में सुबह 8:37 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए. इसके ठीक तीन मिनट बाद ही अचानक बाढ़ आने की खबरें मिलने लगीं।

उन्होंने बताया कि इससे साफ संकेत मिलता है कि भूकंप के तेज झटकों की वजह से ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर गिर गया. इसने ल्हेंडे खोला नदी के प्रवाह को अस्थायी रूप से रोक दिया था. इसके बाद मलबे से बना प्राकृतिक बांध अचानक टूट गया और पानी का भारी सैलाब भोटेकोशी नदी में आ गया।

हालांकि, अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने इसकी वजह कुछ और ही बताई है. USGS के मुताबिक, कोई अलग से भूकंप नहीं आया था, बल्कि इतनी ऊंचाई से बड़े ग्लेशियर और चट्टान के गिरने (ग्लेशियल कोलैप्स) की ताकत इतनी भयानक थी कि उससे खुद 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसे झटके दर्ज किए गए थे. ग्लेशियर का हिस्सा टूटने के बाद बर्फ और चट्टानों का यह सैलाब पहाड़ों से बेहद तेज रफ्तार में नीचे की तरफ बढ़ा. हालांकि अधिकारी अभी भी घटनाओं के सही क्रम की जांच कर रहे हैं.
भारत ने भेजी मदद
भारत ने नेपाल की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की और उन्हें हर संभव मानवीय सहायता का भरोसा दिलाया. इसके बाद भारत ने 10 टन राहत सामग्री भेजी. इसमें अस्थायी शेल्टर, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाएं शामिल थीं. यह सामान भारतीय वायु सेना के C-130J एयरक्राफ्ट से काठमांडू पहुंचाया गया।

बिहार और यूपी अलर्ट पर
नेपाल में आई बाढ़ की वजह से निचले इलाकों में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है. बिहार में बाढ़ के संभावित खतरे की समीक्षा की जा रही है, क्योंकि गंडक नदी में बाढ़ का पानी घुस गया है. पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली के साथ-साथ सीतामढ़ी और शिवहर जैसे संवेदनशील जिलों को खास सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए. वहीं, उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर प्रशासन को गंडक-नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना के चलते हाई अलर्ट पर रखा गया है।

नेपाल के पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक, बाढ़ के बाद लापता हुए लोगों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कम से कम 133 भारतीय तीर्थयात्री शामिल हैं. ईशा फाउंडेशन ने बताया कि बाढ़ आने के समय उसके 77 सदस्य एक इमिग्रेशन सेंटर पर थे और अभी उनका कोई पता नहीं चल पाया है. फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने कहा कि इमिग्रेशन ऑफिस में मौजूद लोगों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।

विनाशकारी जल प्रलय _लोगों को संभालने का भी मौका नहीं मिला

नेपाल के रसुवा में बुधवार सुबह आई अचानक बाढ़ ने कुछ ही पलों में भारी तबाही मचा दी। हिमस्खलन के कारण ल्हेंदे नदी का बहाव रुकने के बाद जमा पानी अचानक भोटेकोशी नदी में जा मिला और करीब 100 मीटर ऊंची लहर जैसी बाढ़ ने तिमुरे बाजार को अपने साथ बहा लिया।

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सबसे दर्दनाक बात यह रही कि इलाके में बारिश की कोई सूचना नहीं थी, इसलिए लोगों को इस आफत का अंदाजा तक नहीं था। लोग अपने रोजमर्रा के काम में व्यस्त थे और देखते ही देखते घर, दुकानें, पुल और सड़कें पानी के तेज बहाव में समा गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाढ़ इतनी तेजी से आई कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें विदेशी नागरिक और सुरक्षा कर्मी भी शामिल हैं। बड़ी संख्या में भारतीय श्रद्धालुओं के लापता होने की खबर है, जिनमें कई कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले थे।

बाढ़ ने रसुवा और नुवाकोट के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। बिजली परियोजनाएं, पुल, हाईवे, घर और बाजार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। त्रिशूली बाजार का भी बड़ा हिस्सा डूब गया है।

यह सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गई है, जिन्होंने कुछ ही मिनटों में अपना घर, रोज़गार और अपनों को खो दिया। नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है, जबकि लापता लोगों की तलाश में परिजन अब भी अपनों के लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।


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