श्रीनगर/गढ़वाल— उत्तराखंड में छात्रसंघ चुनावों को सत्ता की राजनीति का शुरुआती संकेत माना जाता है। ऐसे में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के बिड़ला परिसर में ABVP को मिली हार ने विधानसभा चुनाव से पहले चर्चा तेज कर दी है।

बिड़ला परिसर में अध्यक्ष पद पर जय हो ग्रुप के हिमांशु भंडारी ने ABVP के भुवन चमोली को करीब 1500 वोटों से हराया। सचिव पद पर NSUI के मयंक बहुगुणा ने ABVP के पंकज को हराया। उपाध्यक्ष पद पर छात्रम् के पुलकित अग्रवाल और सह-सचिव पद पर निर्दलीय प्रत्याशी जीते, जबकि कोषाध्यक्ष पद पर रामरूप गुर्जर निर्विरोध निर्वाचित हुए।
सबसे बड़ा संदेश पौड़ी परिसर से आया, जहां NSUI ने अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष समेत प्रमुख पदों पर कब्जा जमाया।
पौड़ी गढ़वाल को भाजपा का गढ़ माना जाता है। जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक हैं और कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत, सतपाल महाराज जैसे नेताओं का आधार भी यहीं से है। ऐसे में ABVP का कमजोर प्रदर्शन राजनीतिक विश्लेषण का विषय बन गया है।

हालांकि छात्रसंघ चुनाव के नतीजों को सीधे विधानसभा चुनाव का पैमाना मानना जल्दबाजी होगी। छात्रसंघ में स्थानीय मुद्दे और व्यक्तिगत पकड़ निर्णायक होती है, जबकि विधानसभा में सरकार का कामकाज, बेरोजगारी, विकास और राष्ट्रीय माहौल असर डालते हैं।
लेकिन गढ़वाल विवि की छात्र राजनीति से कई बड़े चेहरे निकले हैं, इसलिए परिसर में बदलती पसंद को ग्राउंड लेवल का संकेत माना जा रहा है। फिलहाल नतीजे भाजपा के लिए चेतावनी और NSUI के लिए उत्साह का संकेत बन गए हैं।
