
भीमताल— उत्तराखंड की पर्वतीय धरती पर आज एक नई सेब क्रांति की नींव रखी गई, जब इंडो डच हॉर्टिकल्चर टेक्नोलॉजीज एवं कोका-कोला इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से “उन्नति उत्कृष्ट किसान सम्मान समारोह” का आयोजन किय गया, जिस समारोह में राज्य के विभिन्न दूरस्थ इलाकों के 100 किसानों को उनके अद्वितीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
इस गौरवशाली कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और मंच से 50 चयनित किसानों को प्रशस्ति पत्र, नगद पुरस्कार और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ये किसान आने वाले समय में उत्तराखंड की एक नई पहचान बनेंगे। अब सेब, सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों की प्रगति का प्रतीक बनेगा।

इस कार्यक्रम में पंतनगर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर और पूर्व डीन, डॉ. शिवेंद्र कश्यप ने भी भाग लिया। उन्होंने ‘उन्नति एप्पल योजना’ को आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक क्रांतिकारी प्रयोग बताया।
इस योजना से किसानों की आय 10 गुना तक बढ़ी है, उन्होंने बताया, कि इससे उत्तराखंड के गांवों में एक नया विश्वास पैदा हुआ है।
कार्यक्रम के दौरान बलराज पासी ने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि आप अपनी भूमि को छोड़ने के बजाय, उसी भूमि को सोना उगलने वाला बनाएँ।
इस अवसर पर इंडो डच हॉर्टिकल्चर टेक्नोलॉजीज के संस्थापक सुधीर चड्ढा जी ने बताया कि अब तक उत्तराखंड में 3,000 से अधिक उन्नति बागों की स्थापना की जा चुकी है।
यह सिर्फ एक परियोजना नहीं, बल्कि एक लाल क्रांति है।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि आने वाले समय में अखरोट, कीवी, आडू, प्लम, खुमानी एवं बादाम की विदेशी उन्नत किस्मों के पौधे भी किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
चड्ढा जी ने आगे बताया कि इस वर्ष कंपनी द्वारा 5 लाख हाई-टेक फेदर प्लांट्स तैयार किए गए हैं — जो देश में अपनी तरह का सबसे बड़ा उत्पादन है।
कार्यक्रम में उत्तरकाशी, पुरोला, पौड़ी, देहरादून, चकराता और सांकरी जैसे सुदूर क्षेत्रों के किसानों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया और मंच से अपने प्रेरणादायक अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विशेष संदेश पढ़ा गया, जिसमें उन्होंने सभी किसानों को बधाई देते हुए कहा:
“आप सभी उत्तराखंड की शान हैं, और आपका योगदान राज्य के भविष्य को समृद्ध बना रहा है।”
यह आयोजन न केवल किसानों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बना, बल्कि राज्य के कृषि विकास की दिशा में एक निर्णायक कदम भी सिद्ध हुआ।
