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कोटद्वार– कोटद्वार नगरनिगम प्रशासन, भाजपा, कांग्रेस और कोटद्वार के पूर्व सैनिक संगठनों ने देश की सीमाओं पर शहीद होने वाले सैनिकों के बलिदान को तुच्छ मानसिकता का परिचय देते हुए गढ़वाल कुमाऊं की सीमाओं में बांधने का काम किया है।

 

 

मामला कोटद्वार नगर निगम के वार्ड नं ३ लालपानी सनेह क्षेत्र का है जहां का कुमाऊं मूल के 2006 में कारगिल युद्ध की समाप्ति के दौरान पाकिस्तान की सेना द्वारा सेना के कैम्प में किए अचानक हमले में शहीद नरेंद्र सिंह अधिकारी पुत्र स्व. हयात सिंह अधिकारी निवासी लालपानी ने अपना बलिदान दिया था।

 

 

शहीद सैनिक नरेंद्र सिंह अधिकारी अपने तीन अन्य साथियों के साथ वीरगति को प्राप्त हुआ।

 

शहीद नरेंद्र अधिकारी महार रेजीमेंट का सैनिक था।शहीद सैनिक नरेंद्र अधिकारी के समय भाजपा की खंडूरी की सरकार थी,उस समय की सरकार ने शहीद नरेंद्र के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी व पेट्रोल पंप आबंटित करने का वादा किया था जो आज तक पूरा नहीं हो पाया।

 

 

नगर निगम बनने के बाद परिजनों के अनुसार नगरनिगम कब उनके घर के समीप शहीद के नाम से मार्ग का बोर्ड लगा गया उन्हें जानकारी तक नहीं दी गई,और न ही मार्ग का निर्माण किया….!

 

 

परिजनों का कहना है कि जितना भी मार्ग में सीसी निर्माण है वह उनके परिवार ने स्वयं के खर्च से बनाया।

 

मामले का संज्ञान तब सामने आया जब विगत 2 अगस्त शुक्रवार को शहीद नरेंद्र अधिकारी के पिता का वार्षिक श्राद्ध था, तो कुछ लोगों की नजर बिना बने शहीद के नाम के बोर्ड पर पड़ा तो कुछ कुमाऊं मूल के सैनिकों और पूर्व सैनिकों ने शहीद सैनिक के नाम का बलिदान का दुरुपयोग और मज़ाक बनाने की सूचना लोक संवाद टुडे को दी।

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लोक संवाद टुडे के संवाददाता पुष्कर सिंह पवार ने शहीद नरेंद्र अधिकारी के बड़े भाई जो कि स्वयं पूर्व सैनिक हैं ,जानकारी चाही तो उन्होंने भी नगरनिगम और प्रशासन द्वारा शहीद के नाम पर मार्ग बनाने की अनुमति लेने की जानकारी से अनभिज्ञता जताई।

 

 

पूर्व सैनिक संघर्ष समिति से जुड़े कुबेर जलाल ने इसे सीधे सीधे तौर पर गढ़वाल/कोटद्वार में रह रहे शहीद सैनिक के बलिदान से गढ़वाली कुमाऊनी की ओछी मानसिकता का आरोप लगाया है।

 

 

उनके अनुसार कोटद्वार में पूर्व सैनिक संगठन, प्रशासन और भाजपा कांग्रेसियों द्वारा शहीद के नाम दुरुपयोग और मज़ाक बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व सैनिक संगठन को इस संबंध में जानकारी देने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया तक नहीं जताई गई इससे साफ पता चलता है कि कोटद्वार में देश के लिए बलिदान देने वाले अन्य जातियों के लिए कितना मान-सम्मान है….?

 

 

सैनिकों के नाम पर राजनीति करने वाले संगठनों, राजनीतिक दलों और सरकारी मशीनरियों से गढ़वाल/कोटद्वार के बाहर की जातियों को अब सजग रहते हुए ऐसे संगठनों, राजनीतिक दलों और सरकारी मशीनरी के दलालों को सबक सिखाना होगा । क्योंकि सैनिक किसी जाति, सम्प्रदाय, धर्म, राज्य और मंडल की सीमाओं से नहीं बंधा है और न ही किसी संगठन राजनीतिक दल और सरकार के लिए ,वरना वह भारत की समस्त जनमानस के लिए बलिदान देने में अपने प्राणों का बलिदान देने के लिए रात-दिन, गर्मी, सर्दी और भारी बरसात की भी परवाह नहीं करता।


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