हलद्वानी— श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर रेलवे बाजार में विगत 3 दिन से चल रहे पर्युषण पर्व के पावन अवसर पर चतुर्थ दिवस उत्तम शौच के दिन मंदिर जी में देवाधिदेव श्री 1008 पुष्पदंत भगवान के मोक्षकल्याणक पर्व के अवसर पर मंदिर जी में सुबह श्री जी के मस्तक पर 108 कलशों से अभिषेक और शांतिधारा की गई ।
तत्पश्चात पुष्पदंत भगवान को निर्वाण लाडू समर्पित किया गया ।
सांगानेर जयपुर से पधारे विद्वत श्री कुशाल जी जैन शास्त्री ने बताया कि इन 108 मंत्रो में बड़ा अतिशय है यह मंत्र पूज्य सुधासागर जी महाराज की अमूल्य निधिया है जिसका सकारात्मक प्रभाव हमारे जीवन में पड़ता है।
सायं कालीन प्रवचन में भैया जी ने बताया की आज हमें हमारे अंदर छिपे लोभ भाव को नष्ट करके उत्तम शौच धर्म को स्वीकार करके सत्य धर्म की प्राप्ति करनी है ।
भैया जी ने बताया कि आज वर्तमान समय में मनुष्य के अंदर तृष्णा भाव बढ़ता जा रहा है और संतुष्ट भाव घटता जा रहा है तो यः उत्तम शौच धर्म हमारे लोभ भाव को खत्म करके मोक्ष मार्ग में आगे बढ़ता है।
प्रवचन के पश्चात मंदिर जी में संगीतमय कुर्सी दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिस्मे लोगो ने भाग लेकर आनंद लाभ प्राप्त किया ।
