
अल्मोड़ा— उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और दमनकारी प्रशासनिक रवैये पर सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने कड़ा प्रहार किया है।
अल्मोड़ा जिला अस्पताल में ई एन टी सर्जन की लगातार गैरमौजूदगी के बावजूद, स्वास्थ्य महानिदेशालय द्वारा 14 मई को जारी एक पत्र में अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एच.सी. गड़कोटी को ई एन टी सर्जन मानते हुए उनसे ENT सर्जरी कराने का आदेश दिया गया।
संजय पांडे को मिले पत्र में कहा गया कि अस्पताल में ENT सर्जन नहीं तो CMS से ही ऑपरेशन करा लो — क्या यही है स्वास्थ्य विभाग की सजगता? अधिकारियों की उदासीनता और लचर प्रबंधन से मरीज बेहाल हैं।”

डॉ. एच.सी. गड़कोटी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक हैं, न कि ई एन टी सर्जन।, ई एन टी सर्जन का पद वर्षों से खाली पड़ा है, जिससे अस्पताल में ई एन टी से संबंधित गंभीर चिकित्सा सेवा बाधित है।
डॉ. मोनिका सम्मल का स्थानांतरण आदेश पहले ही जारी हो चुका है, लेकिन उन्हें ड्यूटी ग्रहण करने से रोक दिया गया है।
संजय पाण्डे ने आरोप लगाया है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश चंद्र पंत और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरीश गड़कोटी द्वारा डॉ मोनिका को जोइनिंग नही दी जा रही, आखिर क्यों?
यह प्रकरण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेशों का सीधा उल्लंघन है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि शिकायतकर्ता की सहमति के बिना कोई शिकायत बंद नहीं की जाएगी।
यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य विभाग जानबूझकर शिकायतों को दबाने, भटकाने और निस्तारित होने से रोकने का प्रयास कर रहा है।
संजय पाण्डे ने इस गंभीर मसले पर नई शिकायत दर्ज कराई है । जिसमे तत्काल ई एन टी सर्जन की नियुक्ति की मांग की गई हैं।
यह गंभीर मामला प्रधानमंत्री कार्यालय, माननीय राज्यपाल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, मुख्य सचिव उत्तराखंड एवं विधानसभा अध्यक्ष महोदय को भी तत्काल सूचित कर दिया गया है।
इनके त्वरित हस्तक्षेप एवं प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा है ताकि जनता को उत्तम स्वास्थ्य सेवाएं मिल सके।
