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हल्द्वानी–उत्तराखंड में एक दिन पूर्व ही पंचायत का कार्यकाल खत्म हुआ , और प्रशासक कई जगह नियुक्त कर दिए गए हैं तो कहीं होने वाले हैं।

 

लेकिन कार्यकाल खत्म होते ही गांव में पंचायत के कार्यकाल और इस दौरान हुए भ्रष्टाचार को लेकर चर्चा हर दुकान गली-गली में है,विशेष कर यह चर्चा गांव के भीतर चल रही है कि जो सोलर लाइट गांव में पंचायत द्वारा लगाई गई ,उसमें एक बड़ा घोटाला हुआ है।

 

बाजार में 6000 से 7000 मूल्य की सोलर लाइटों को पंचायत द्वारा दुगनी कीमत में खरीदा गया है ऐसा चर्चाओं में कहा जा रहा है।

 

इन चर्चाओं पर विराम लगे इस उद्देश्य से किसान मकान बचाओ संघर्ष समिति ने हल्द्वानी उप जिला अधिकारी को एक पत्र सौंपा है,जिसमें समिति द्वारा हल्द्वानी उप जिलाधिकारी से पंचायतों द्वारा गांव में लगी सोलर लाइट के व्यय की जांच किए जाने की मांग करी है।

 

किसान मकान बचाओ संघर्ष समिति के संस्थापक एवं किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष कार्तिक उपाध्याय ने बताया कि पिछले 5 साल में गांव की जो सरकार रही, उनके द्वारा किस गांव में कितनी सोलर ऊर्जा लाइट लगाई गई,किस कंपनी से खरीदी गई,किस मद से लगाई गई एवं उक्त सोलर लाइट की बाजार कीमत कितनी है इसकी जांच करने का अनुरोध उप जिलाअधिकारी से किया गया है।

 

समिति ने एसडीएम को लिखे पत्र में यह स्पष्ट किया है कि समिति किसी भी पंचायत प्रतिनिधि अधिकारी पर किसी तरह के भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगा रही है,परंतु गांव के भीतर यह आम चर्चा है इसलिए जागरूक समिति के संस्थापक होने के कारण उन्होंने जांच की मांग की है , ताकि यह खुलासा हो सके कि क्या गांव के भीतर सोलर ऊर्जा लाइट लगाने में भ्रष्टाचार हुआ है अन्यथा नहीं, और यदि भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के प्रति कार्यवाही की जाए।

 

 

उपाध्याय ने कहा कि जांच इसलिए भी आवश्यक है ताकि ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों व राज्य सरकार की छवि गांववासियों के बीच धूमिल ना हो और अफवाह न उड़े, लेकिन यदि भ्रष्टाचार हुआ है तो कार्यवाही भी जरूरी हैं।

 

उप जिलाअधिकारी ने आश्वस्त किया है कि सीडीओ के माध्यम से इसकी जांच कराई जाएगी और जिसकी जानकारी समिति को पत्राचार के माध्यम से भेज दी जाएगी जिसको लेकर समिति संस्थापक ने एसडीएम परितोष वर्मा जी का आभार व्यक्त किया।

 

अब देखना होगा कि यह जांच कब तक होती हैं और क्या वाकई दुगनी कीमत में सोलर लाइट पंचायतों द्वारा खरीदी गई हैं ।

यदि ऐसा होता हैं तो इस भ्रष्टाचार का खुलासा आवश्यक हैं, और कार्यवाही भी।


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