
हलद्वानी– किसान मकान बचाओ संघर्ष समिति का हल्द्वानी रिंग रोड परियोजना के विरोध में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन 22वें दिन भी जारी रहा।
आज धरना स्थल पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी एवम लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती मनाई गई इस दौरान सभी ने धरने पर बैठकर महात्मा गांधी जी के सत्याग्रह को याद किया।
इस दौरान किसान मकान बचाओ संघर्ष समिति के संस्थापक अध्यक्ष कार्तिक उपाध्याय ने कहा की गांधी व्यक्ति नहीं,विचार हैं और विचार ना मरा करते हैं ना ही ख़त्म किए जा सकते हैं।

भारत के कई इतिहासकार अलग अलग तरह से महात्मा गांधी जी के व्यक्तित्व को लिख चुके हैं,जिन्हें हम पढ़ते हैं तो इच्छा होती हैं एक बार काश गांधी जी को सामने से देख पाते।
गांधी जी की स्पष्ट सोच थी जब भारत इन अंग्रेजों से आजाद होगा तो उसकी सबसे मजबूत सरकार और ताकत गांव में होगी,गांधी जी कहते थे,मैं ऐसा आजाद भारत देखना चाहता हूं जहां गांव में बसा हुआ हर व्यक्ति यह कह सके की ये मेरा भारत हैं इस भारत को आगे कैसे बड़ाना हैं,इसके लिए नीतियां कैसे बनानी हैं यह सरकार नहीं स्वयं ग्रामवासी तय करेगा।
लेकिन आज हालत आप देख सकते हैं बिल्कुल विपरीत हैं ग्रामीण किसानों को किसी योजना परियोजना के लिए सरकार द्वारा उतारने से पूर्व बताना तो छोड़िए उनके खेतों में भूमाफियाओं की तरह पिलर सरकारें गड़वा रही हैं।
एक दिन यही कि सरकार में बैठे हुए लोग अपने गांव के ग्रामीणों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करेंगे ,उनकी जमीनों में लगी फसलों को अपने भू माफिया रूपी अधिकारियों और मजदूरों से कुचलवा रहें हैं। गांधी जी की आत्मा रोती होगी,रोती होगी।
एक किताब में मैंने यह पढ़ा की महात्मा गांधी जी अपने साथ दो धोतियां लेकर चलते थे एक दिन जब उन्होंने अपने ग्रामीण इलाकों में देखा कि गांव के बच्चे नंगे घूम रहे हैं तो उन्होंने यह कहकर दूसरी धोती का त्याग कर दिया कि जब तक मेरे गांव के बच्चों के पास तन ढकने के लिए कपड़ा नहीं तब तक मुझे दूसरी धोती की आवश्यकता नहीं।
आज धरना स्थल से गांधी जी को नमन करते हुए यह कह सकता हूं कि मेरे अंदर उन्हीं की जीवनियां पढ़कर शायद यह ताकत हो की टेंट लगाने की सरकार के खिलाफ और उस तानाशाह सरकार के खिलाफ हिम्मत कर पाया हूं ।
जो संविधान के सारे नियमों का उल्लंघन करते हुए उत्तराखंड के हल्द्वानी भाबर के छोटे किसान(छोटे किसान अर्थात जिनके पास खेती करने के लिए बहुत बड़ी एक्कड़ो के हिसाब से भूमि नहीं बल्कि कुमाऊं के द्वार हल्द्वानी में कुछ बीघा का या एक दो एकड़ जमीन है,वरना जानता हूं किसान तो सारे एक समान मजबूत ताकत रखते हैं मजबूत अधिकार रखते हैं) के खेतों में गिद्धों की तरह नजर डाली हुई हैं,दिन रात बैठा हूं।
वही आज जयंती है परम आदरणीय लाल बहादुर शास्त्री जी की जिन्होंने इस देश को जय जवान जय किसान का नारा दिया,लेकिन दुर्भाग्य देखिए भारत देश को अंग्रेजों से आजाद करने वाले इन महानायकों के नारों का भी आज की वर्तमान सरकारें महत्व खत्म करने का प्रयास कर रहीं हैं,एक तरफ अग्निवीर जैसे विनाशकारी योजना से सेना में भर्ती होने के लिए तपस्या करने वाले युवाओं के मनोबल को तोड़ा हैं कई युवा आज फौज के सपने खत्म कर बैठने लगे हैं।
वहीं किसानों के हरे खेतों में सरकार और अधिकारियों ने गिद्धों भरी नज़र डाल रही है हमारे महानायक जिन किसानों की जय जयकार करते थे,आज की सरकार है उन्हें ही उजाड़ने में लगी हुई है,इतना बदल चुका है अंग्रेजों से आजाद होने के बाद मेरा भारत महान।
इस दौरान आनंद सिंह दरमवाल,ललित मोहन जोशी,नवीन चंद्र,निक्की दुर्गापाल,भरत दुर्गापाल,गुलशन दानी,दीपक बजवाल,त्रिभवन चंद्र,दक्ष बिष्ट,मनीष उपाध्याय सहित अन्य मौजूद रहें।
