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दिल्ली– सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) से संबंधित तीन विशेष बख्तरबंद डीजल वाहनों की पंजीकरण अवधि पांच वर्ष के लिए बढ़ा दी।

 

न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ एसपीजी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

 

जिसमें राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के उस आदेश को चुनौती दी गई थी। जिसमें एक दशक से ज्यादा पुराने उसके वाहनों के पंजीकरण की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया गया था।

 

 

हालांकि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा वाहनों के महत्व का हवाला देते हुए विस्तार मांगे जाने के बाद शीर्ष अदालत की पीठ ने एसपीजी को छूट दे दी।

 

 

मेहता ने कहा कि ऐसे वाहन एसपीजी तकनीकी रसद का आवश्यक और अभिन्न अंग हैं।

 

एनजीटी ने 22 मार्च को यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था कि ऐसे डीजल वाहनों को 10 वर्ष पूरे होने पर एनसीआर में चलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

 

एनजीटी ने कहा, “हम इस तथ्य से वाकिफ हैं कि ये तीन वाहन विशेष प्रयोजन वाहन हैं। जो सामान्य रूप से उपलब्ध नहीं होते हैं। और ये वाहन पिछले 10 वर्षों में बहुत कम चले हैं। और प्रधानमंत्री की सुरक्षा के विशिष्ट उद्देश्य के लिए जरूरी हैं। लेकिन 29 अक्तूबर, 2018 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर एमए (विविध आवेदन) में की गई प्रार्थना को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।”

 

 

सर्वोच्च न्यायालय ने 29 अक्तूबर, 2018 को दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों के चलने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

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यह फैसला 2015 के एनजीटी के आदेश पर आधारित था, जिसमें एनसीआर में एक दशक से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी।

 

 

प्रधानमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके नजदीकी परिवार के सदस्यों को निकटतम सुरक्षा कवर प्रदान करने के मकसद से 1985 में एसपीजी की स्थापना की गई थी।


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