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हल्द्वानी– – अखिल एकता उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महासचिव और प्रदेश मीडिया प्रभारी सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संगठन की गलत नीतियों और आंतरिक राजनीति के विरोध में इस्तीफा दे दिया है। यह घटनाक्रम संगठन के प्रदेश में जड़ें जमाने से पहले ही उसके धराशायी होने की ओर इशारा कर रहा है।

 

 

प्रदेश महासचिव डिंपल पांडे ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि संगठन में राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तराखंड प्रभारी के अविवेकपूर्ण निर्णयों और तानाशाही रवैये के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन उत्तराखंड के व्यापारियों को छलने और उनसे पैसे वसूलने के उद्देश्य से काम कर रहा है।

 

 

पांडे ने बताया कि संगठन में पद देने के लिए व्यापारियों से एक निश्चित धनराशि वसूली जाती है, जो राष्ट्रीय अध्यक्ष के गूगल पे नंबर पर ऑनलाइन जमा करवाई जाती है। उन्होंने कहा, “संगठन के नाम पर पैसे वसूली का धंधा किया जा रहा है, जो पूरी तरह से अनैतिक और गलत है।”

 

 

इससे पहले, प्रदेश अध्यक्ष अनुज कांत अग्रवाल ने भी संगठन की गलत नीतियों और आंतरिक राजनीति के कारण इस्तीफा दे दिया था। गौरतलब है कि मात्र तीन महीने के भीतर यह दूसरा मौका है जब किसी प्रदेश अध्यक्ष ने संगठन छोड़ने का फैसला किया है।

 

 

डिंपल पांडे ने उत्तराखंड के व्यापारियों से अपील की है कि वे ऐसे संगठन का सहयोग न करें और प्रदेश भर में इसका बहिष्कार करें, ताकि कोई अन्य संगठन इस तरह की गलत प्रथाओं को अपनाकर उत्तराखंड में पांव न पसार सके।

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उन्होंने कहा कि सार्वजनिक तौर पर इस्तीफा देने का मकसद अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा को बरकरार रखने के साथ-साथ प्रदेश के व्यापारियों को ऐसे संगठन के बारे में आगाह करना है। पांडे ने आश्वासन दिया कि उनकी टीम पूर्व की भांति स्वतंत्र रूप से समाज हित के कार्य करती रहेगी।

 

 

इस घटनाक्रम ने अखिल एकता उद्योग व्यापार मंडल की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि संगठन की राष्ट्रीय टीम इन आरोपों का जवाब कैसे देती है और प्रदेश में अपनी स्थिति को सुधारने के लिए क्या कदम उठाती है।


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