दिल्ली– राहुल गांधी और विपक्ष द्वारा ‘वोट चोरी’ के नाम पर देश में एक सोचा-समझा फर्जी नैरेटिव फैलाया जा रहा है। यह नैरेटिव न तथ्यों पर आधारित है, न सबूतों पर – इसका एकमात्र उद्देश्य संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना और हार की हताशा में अराजकता फैलाना है।

विपक्ष के फर्जी नैरेटिव की सच्चाई:
1. SIR को लेकर झूठ: मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कोई नई प्रक्रिया नहीं है। चुनाव आयोग 1952 से यही काम करता आ रहा है। इसका मकसद फर्जी, डुप्लीकेट और मृत वोटरों के नाम हटाना है, ताकि एक भी असली वोटर का हक न मरे। इसे ‘वोट चोरी’ बताना सरासर झूठ है।
2. EVM पर भ्रम: राहुल गांधी खुद कई बार EVM से जीतकर संसद पहुंचे हैं। जब जीतते हैं तो EVM ठीक, हारते हैं तो EVM खराब – यह दोहरा मापदंड देश देख रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी बार-बार EVM-VVPAT प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बताया है।
3. बिना सबूत आरोप: महीनों से ‘वोट चोरी’ का शोर मचाया जा रहा है, लेकिन आज तक चुनाव आयोग के सामने एक भी पुख्ता सबूत पेश नहीं किया गया। सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस, सोशल मीडिया पोस्ट और विदेशी मंचों पर बयानबाजी से लोकतंत्र नहीं चलता।
सच्चाई यह है कि जनता ने विपक्ष को लगातार नकारा है, इसलिए अब वे वोटर, वोटर लिस्ट और वोटिंग मशीन – तीनों पर सवाल उठाकर पूरे लोकतंत्र पर ही सवाल उठा रहे हैं।
केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का संकल्प साफ है – न एक वैध वोट कटेगा, न एक फर्जी वोट जुड़ेगा।
विपक्ष अराजकता फैलाना बंद करे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाए।
