उत्तराखंड— नैनीताल में लेक ब्रिज चुंगी टेंडर को लेकर उठे विवाद के बीच जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने बड़ा कदम उठाया है।
नगर पालिका परिषद नैनीताल द्वारा जारी निविदा (टेंडर) की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी गई है। डीएम ने समिति को दो सप्ताह के भीतर पूरी रिपोर्ट निष्कर्षों सहित सौंपने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी ने जारी आदेश में कहा है कि विभिन्न सूचना स्रोतों से यह जानकारी मिली कि लेक ब्रिज चुंगी टेंडर का जनमानस द्वारा विरोध किया जा रहा है। जनभावनाओं और विरोध प्रदर्शनों को गंभीरता से लेते हुए प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने का निर्णय लिया गया है।
जांच समिति में उप जिलाधिकारी, नैनीताल,, उप निदेशक (वित्त), डॉ. आर. एस. टोलिया, उत्तराखण्ड प्रशासन अकादमी,, अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग, नैनीताल को जिम्मेदारी दी गयी है।
इन बिंदुओं पर होगी जांच
क्या तकनीकी निविदा नियमावली के अनुसार पूरी हुई?
क्या टेंडर सेवा शर्तों, नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप था?
क्या नगर पालिका बोर्ड बैठक, नगर पालिका परिषद अधिनियम 1916 की धारा 96 के प्रावधानों के अनुसार हुई?
दो सप्ताह में आएगा सच
डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच समिति मामले की गहन जांच कर दो सप्ताह के भीतर पूरी रिपोर्ट निष्कर्षों सहित उपलब्ध कराए। अब सबकी नजर इस रिपोर्ट पर टिकी है, जो लेक ब्रिज चुंगी टेंडर विवाद की तस्वीर साफ कर सकती है।
लेक ब्रिज चुंगी विवाद शुरू कहां से हुआ?
नैनीताल पालिका में इस बार लेक ब्रिज चुंगी का 24 करोड़ रुपये का टेंडर 21 महीने की अवधि के लिए हुआ। टेंडर के बाद सबसे बड़ा विवाद तब शुरू हुआ, जब दोपहिया वाहनों से भी चुंगी वसूली शुरू कर दी गई और इसके लिए ₹100 शुल्क तय किया गया।
दोपहिया वाहनों से टोल वसूली का नैनीताल के व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध किया। मामला इतना बढ़ा कि पालिका बोर्ड की बैठकों में सभासदों ने हंगामा किया और टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
विवाद बढ़ते-बढ़ते कैबिनेट मंत्री तक पहुंच गया, जहां जांच की मांग उठी। अब जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है, जो टेंडर प्रक्रिया की हर पहलू से जांच करेगी।
