Category: देहरादून

  • एक्जिट टेस्ट के विरोध में जंतर-मंतर,, नई दिल्ली पर फूटा देश भर के आयुष छात्र-छात्राओं का ग़ुस्सा।

    एक्जिट टेस्ट के विरोध में जंतर-मंतर,, नई दिल्ली पर फूटा देश भर के आयुष छात्र-छात्राओं का ग़ुस्सा।

    नई दिल्ली—   जंतर-मंतर पर आयुष के बैच 21-23 के सभी छात्र-छात्राओं ने नेक्स्ट एग्जाम परीक्षा को 2024 बैच से लागू करने की मांग को लेकर विनम्र सिंह की अध्यक्षता में एक विशाल धरना प्रदर्शन किया गया।

    जिसका मुख्य उद्देश्य नेशनल एग्जिट टेस्ट को सत्र 2024 से लागू करने की मांग की गई।

    जिस प्रकार एलोपैथ व आयुष के छात्र-छात्राओं को मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने के लिए एक समान परीक्षा नीट देनी पड़ती है। उस परीक्षा को पास करने के उपरांत ही मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलता है। ठीक उसी प्रकार से सरकार एक और परीक्षा का प्रावधान लेकर आई है जो एलोपैथ व आयुष सभी के छात्र-छात्राओं पर लागू की जा रही है।

    यह परीक्षा मेडिकल कॉलेज से निकलने अर्थात एक्जिट परीक्षा होगी जिसका नाम नेशनल एग्जिट टेस्ट रखा गया है। इस परीक्षा को पास करने के उपरांत ही सभी छात्र-छात्राओं को मेडिकल प्रैक्टिस करने की अनुमति प्रदान की जाएगी।

    एलोपैथ व फार्मेसी के छात्र-छात्राओं के लिए यह परीक्षा सत्र 2024 से लागू की जा रही है जबकि आयुष के छात्र-छात्राओं के लिए यह परीक्षा सत्र 2021 से लागू की जा रही है।

    जब सभी छात्र-छात्राओं की प्रवेश परीक्षा का माध्यम एक समान है तो एक्जिट परीक्षा को लागू भी समान बैच से करना चाहिए था अलग-अलग नहीं।

    जबकि भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी ने एक बयान दिया था कि एलोपैथ और आयुष समान है फिर सरकार एक्जिट टेस्ट को लागू करने में एलोपैथ और आयुष में सौतेला व्यवहार क्यों कर रही है?

    इस सौतेले व्यवहार को लेकर सभी छात्र-छात्राओं ने विनम्र सिंह की अध्यक्षता में जंतर-मंतर पर तीन धरने पहले भी रखे हैं जिसमें पहला धरना पिछले वर्ष अक्टूबर व दूसरा धरना दिसम्बर माह में था और तीसरा धरना इसी वर्ष जनवरी के माह में आयोजित किया गया था।

    तीन धरनो के बाद जून माह में आयुष मंत्री जी का बयान एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल के माध्यम से जारी हुआ था कि नेक्स्ट एग्जाम परीक्षा 2022 बैच तक हटा दी गई है लेकिन सितंबर के माह में 9 तारीख को मंत्रालय द्वारा एक पत्र जारी किया जाता है जिसमें यह दर्शाया जाता है कि एक्जिट परीक्षा 2021 बैच से ही लागू की जाएगी।

    आयुष मंत्री जी से बात करने पर यह पता चलता है कि उनके द्वारा धोखे से या गलती से ऐसा बयान दे दिया गया। जिसके बाद सभी छात्र-छात्राओं ने फिर से विनम्र सिंह के नेतृत्व में चौथा धरना प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आवाज उठाई।

    खराब मौसम व भीषण बारिश में भी हजारों छात्र-छात्राओं ने धरना स्थल पर रूककर भीगते हुए अपनी आवाज को उठाने का काम किया।

    धरने में आयुष मंत्रालय होश में आओ, आयुष मंत्रालय हाय-हाय, आयुष मंत्री हाय-हाय व आयुष मंत्री होश में आओ के नारे लगाए गए। छात्र-छात्राओं ने अपने रोश को अपने नारों के माध्यम से जाहिर किया।

  • उत्तराखंड पुलिस महकमें में हुए तबादले,जानिए किसको कहां मिली तैनाती,,,,।

    उत्तराखंड पुलिस महकमें में हुए तबादले,जानिए किसको कहां मिली तैनाती,,,,।

    देहरादून—-   उत्तराखंड पुलिस विभाग में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल करते हुए सात पुलिस उपाधीक्षकों (डीएसपी) के तबादले किए गए हैं।

    इस क्रम में अधिकारियों को उनकी वर्तमान तैनाती से हटाकर नवीन तैनाती स्थलों पर भेजा गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।

    जारी तबादला सूची के अनुसार:,,,,,,

    1.*अमित कुमार* को जनपद चमोली से स्थानांतरित कर जनपद नैनीताल भेजा गया है।

    2.अंकुश मिश्रा, जो अब तक एसटीएफ देहरादून में तैनात थे, उन्हें अभिसूचना मुख्यालय, उत्तराखण्ड भेजा गया है।

    3.**आशीष भारद्वाज** को पुलिस मुख्यालय से स्थानांतरित कर आईआरबी-द्वितीय, देहरादून में नियुक्त किया गया है।

    4.संदीप नेगी, जो जनपद देहरादून में कार्यरत थे, अब देहरादून पुलिस मुख्यालय में सेवाएं देंगे।

    5.**परवेज अली** को आईआरबी-प्रथम, रामनगर (नैनीताल) से हटाकर एसटीएफ (एएनटीएफ), देहरादून में तैनात किया गया है।

    6.**त्रिवेन्द्र सिंह राणा** को जनपद पौड़ी गढ़वाल से स्थानांतरित कर जनपद चमोली में नियुक्त किया गया है।

    7.**पूर्णिमा गर्ग**, जो अब तक आईआरबी-द्वितीय, देहरादून में सेवाएं दे रही थीं, उन्हें जनपद देहरादून में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  • युवाओं के आक्रोश के बीच सीएम धामी का साहसिक कदम, पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच तय….

    युवाओं के आक्रोश के बीच सीएम धामी का साहसिक कदम, पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच तय….

    देहरादून – यूकेएसएसएससी परीक्षा लीक प्रकरण को लेकर उठे युवा आंदोलन ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया। आंदोलन की तपिश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ा। आखिरकार, उन्होंने धरना स्थल पर पहुंचकर सीबीआई जांच की घोषणा कर स्थिति को शांत किया।

    पिछले दिनों परेड ग्राउंड पर आंदोलनरत युवाओं के नारे—“वीक और लीक, गद्दी छोड़”—सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गए थे। लेकिन उसी मंच से जब सीएम धामी ने सीबीआई जांच की बात कही, तो वही युवा जिन्होंने तीखे नारों से सरकार को घेरा था, तालियों से उनका स्वागत करते दिखे। यह दृश्य युवाओं की परिपक्वता और लोकतांत्रिक मूल्यों की मिसाल भी पेश करता है।

    जानकारी के अनुसार, सरकार के सलाहकार मुख्यमंत्री को सीधे मंच पर जाने से रोकना चाहते थे, लेकिन सीएम ने सोमवार सुबह बिना किसी सलाह-मशविरे के खुद धरना स्थल जाने का निर्णय लिया। यहां तक कि विधायक खजानदास को भी अंतिम समय पर ही उनके इस फैसले की जानकारी दी गई।

    धरना स्थल पर युवाओं से सीएम का संवाद सरकार के लिए एक सेफ्टी वॉल्व साबित हुआ। जिलाधिकारी और एसएसपी को पहले ही मौके पर भेजकर प्रशासन ने आक्रोश का बड़ा हिस्सा झेल लिया था। मुख्यमंत्री ने युवाओं को आश्वस्त किया कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य की परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

    विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम में जहां सरकार के सलाहकारों पर सवाल उठे हैं, वहीं मुख्यमंत्री धामी ने युवाओं के प्रति संवेदनशीलता और साहस दिखाकर स्थिति को संभाला है। अब चुनौती सरकार के सामने यह है कि वह परेड ग्राउंड से उठे सवालों का ठोस और पारदर्शी समाधान दे सके।

  • सड़क सुरक्षा और पॉल्युशन के प्रति जागरूकता के लिए की चित्रकला  प्रतियोगिता।

    सड़क सुरक्षा और पॉल्युशन के प्रति जागरूकता के लिए की चित्रकला प्रतियोगिता।

    देहरादून—  सड़क सुरक्षा एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आज सी.एन.आई. गर्ल्स इंटर कॉलेज, राजपुर रोड में छात्राओं द्वारा सड़क सुरक्षा और वाहन प्रदूषण विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस अवसर पर छात्राओं ने अपने रंगों और कल्पनाओं के माध्यम से सुरक्षित यातायात, प्रदूषण नियंत्रण और जिम्मेदार नागरिकता का संदेश समाज तक पहुँचाने का प्रयास किया।

    कार्यक्रम में विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती आर.एम. सिंह, अध्यापिका आशा जैकब गुरंग एवं श्रीमती कीर्ति गोयल की सक्रिय भागीदारी रही। सड़क सुरक्षा यातायात मित्र उमेश्वर सिंह रावत ने भी आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

    सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) डॉ. अनीता चमोला ने कहा कि –
    “बच्चों में सड़क सुरक्षा और पर्यावरण जागरूकता की शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे आने वाले कल के जिम्मेदार चालक और नागरिक हैं। इस तरह की प्रतियोगिताएँ न केवल उनकी रचनात्मकता को सामने लाती हैं, बल्कि उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदार भी बनाती हैं।”

    विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती आर.एम. सिंह ने आरटीओ देहरादून के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि –
    “हम आभारी हैं कि विद्यालय स्तर पर इस प्रकार के जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों को व्यवहारिक शिक्षा दी जा रही है। यह पहल छात्राओं को जीवनभर सुरक्षित और जिम्मेदार यातायात का पालन करने के लिए प्रेरित करेगी।”

    चित्रकला प्रतियोगिता के दौरान छात्राओं ने उत्साहपूर्वक विभिन्न विषयों पर रचनात्मक चित्र प्रस्तुत किए, जिनमें सड़क सुरक्षा नियमों का पालन, हेलमेट एवं सीट बेल्ट का महत्व, मोबाइल के प्रयोग से बचाव, और वाहनों से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम जैसे संदेश प्रमुख रूप से शामिल रहे।

  • पेपर लीक मामले में युवाओं के बीच पहुंच कर सीएम धामी ने किया सीबीआई जांच की संस्तुति।

    पेपर लीक मामले में युवाओं के बीच पहुंच कर सीएम धामी ने किया सीबीआई जांच की संस्तुति।

    देहरादून—   उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के स्नातक स्तरीय परीक्षा के पेपर लीक मामले में युवाओं का धरना जारी है। वहीं, आज सीएम पुष्कर सिंह धामी आज युवाओं के बीच पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सीबीआई जांच की संस्तुति की।

    युवाओं के धरने के बीच सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद पहुंचे और मौके पर ही सभी मांगों को मानते हुए सीबीआई जांच की संस्तुति की।

    मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए युवाओं द्वारा दिए गए सभी सुझावों पर विशेष कार्य किया जाएगा।

    उन्होंने साफ कहा कि “यह चर्चा मैं चाहूं तो दफ्तर में भी कर सकता था, लेकिन अपने भाई-बहनों और बच्चों के बीच आकर उनकी बात सुनना मेरा कर्तव्य है। मैं आप सबके साथ हूं।”

    मुख्यमंत्री के इस कदम से धरने पर बैठे युवाओं में उत्साह और विश्वास की नई लहर दौड़ गई।

    युवाओं ने धामी का आभार जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने एक बार फिर साबित किया है कि वह सचमुच जनता के मुख्यमंत्री हैं।

  • बादल फटा, घर बह गए… अब नींद और चैन भी छिन गया….

    बादल फटा, घर बह गए… अब नींद और चैन भी छिन गया….

    देहरादून – हाल ही में हुई अतिवृष्टि और बादल फटने की घटनाओं ने न सिर्फ़ लोगों की ज़िंदगी और रोज़गार छीना बल्कि उनकी मनोदशा पर भी गहरा असर डाला है। आपदा के मंजर से गुज़रे अधिकांश लोग अब भी भय और सदमे में हैं। नींद न आना, बेचैनी, बार-बार भयावह दृश्य याद आना और हल्की-सी आवाज़ पर चौंक जाना जैसे लक्षण आम हो गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग पीटीएसडी (पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) से जूझ रहे हैं, जिसे उबरने में सालों लग सकते हैं।

    मालदेवता पीएचसी पहुँचे 150 से अधिक लोग

    देहरादून के मालदेवता क्षेत्र में सबसे ज़्यादा तबाही हुई। पीएचसी प्रभारी डॉ. एमए भट्ट के मुताबिक़, 150 से अधिक लोग इलाज और परामर्श के लिए पहुंचे। इन लोगों को घटना की बार-बार याद आने से बेचैनी, तेज धड़कन और अनिद्रा जैसे लक्षण थे।

    धराली, थराली और कर्णप्रयाग के जख्म गहरे

    • धराली (उत्तरकाशी): 5 अगस्त की आपदा में कई परिवारों की उम्रभर की कमाई मिनटों में बह गई। किसी का घर ढहा तो किसी का होटल और बागान जमींदोज हो गया। कई परिजनों की मौत ने परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया।
    • कर्णप्रयाग (चमोली): सेरा गांव में महिपाल सिंह गुसाईं का घर और गोशाला बह गए। बेटी की शादी का सपना भी आपदा के सैलाब में टूट गया। सदमे से उनकी पत्नी की हालत बिगड़ गई।
    • थराली और चेपड़ों: यहाँ रातोंरात बाजार और घर मलबे के ढेर में बदल गए। लोगों की दुकानें, वाहन और कारोबार सब तबाह हो गए। इससे आर्थिक बोझ के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ गया।

    डॉक्टरों की चेतावनी

    श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. मोहित सैनी ने कहा कि आपदा पीड़ितों में अवसाद, घबराहट और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण आम हैं। यह मनोदशा तीन-चार साल तक बनी रह सकती है। इसे “पोस्ट वियतनाम सिंड्रोम” भी कहा जाता है।

    कैसे मिलेगी राहत?

    विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लोगों को मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, योग, सामूहिक प्रार्थना और परिवार के साथ संवाद से राहत मिल सकती है। सामुदायिक सहयोग और परामर्श केंद्र स्थापित करने की ज़रूरत है, ताकि लोग इस मानसिक आघात से उबर सकें।

  • कन्या परिसर देहरादून में सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत स्वच्छता सप्ताह का हुआ आयोजन।

    कन्या परिसर देहरादून में सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत स्वच्छता सप्ताह का हुआ आयोजन।

    देहरादून—  गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के कन्या परिसर देहरादून में सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत चल रहे स्वच्छता सप्ताह के समापन समारोह में आज देहरादून नगर के मेयर सौरभ थपलियाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने परिसर में पौधारोपण के साथ की।परिसर समन्वयक प्रो. हेमन पाठक ने पौधा भेंट कर उनका मुख्य अतिथि के रूप में स्वागत किया।

    कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ निशा यादव ने छात्राओं को सेवा पखवाड़ा के मुख्य उद्वेश्य एवं स्वच्छता की महत्ता से छात्राओं को परिचित कराया।

    मुख्य अतिथि के रूप में सौरभ थपलियाल ने स्वच्छता को लेकर छात्राओं का मार्गदर्शन कर उन्हें स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। उन्होंने ने कहा सेवा पखवाड़ा हमें आपसी सहयोग एवं सद्भावना के लिए भी प्रेरित करता है। अतः हम सभी को सामाजिक सहयोग हेतु सदैव तत्पर रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि हमें सेवा पखवाड़ा में बढ़ चढ़कर भाग लेते हुए सफल बनाने में पूरा सहयोग करना चाहिए।

    देश की स्वच्छता हम सभी की जिम्मेदारी है। इसके पश्चात उन्होंने स्लोगन लेखन में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली छात्राओं को प्रमाण – पत्र वितरित कर उनका हौंसला बढ़ाया। इस अवसर पर उन्होंने परिसर की ओर से परिसर के सफाई कर्मचारियों को स्वच्छता किट प्रदान किए।

    सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत आयोजित स्वच्छता सप्ताह के इस समापन अवसर पर सभी छात्राओं, शिक्षक एवं कर्मचारियों ने स्वच्छता की शपथ भी ली। तत्पश्चात डॉ रीना वर्मा ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।

    इस साप्ताहिक कार्यक्रम का आयोजन हिंदी एवं अंग्रेजी विभाग द्वार संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं, शोधार्थियों के साथ ही शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • सतर्कता विभाग की एसपी रहीं रचिता जुयाल ने सरकारी सेवा को कहा अलविदा…..

    सतर्कता विभाग की एसपी रहीं रचिता जुयाल ने सरकारी सेवा को कहा अलविदा…..

    देहरादून – उत्तराखंड कैडर की 2015 बैच की आईपीएस अधिकारी रचिता जुयाल का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। उन्होंने कुछ महीने पहले निजी और पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के लिए आवेदन किया था।

    रचिता जुयाल वर्तमान में सतर्कता विभाग में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थीं। अपने कार्यकाल में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। वह राजभवन में राज्यपाल की एडीसी भी रहीं और बाद में इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सेवाएँ दीं।

    सूत्रों का कहना है कि पारिवारिक कारणों के साथ-साथ निजी क्षेत्र में बेहतर संभावनाओं को देखते हुए रचिता ने सरकारी सेवा छोड़ने का निर्णय लिया है। उनके इस्तीफे को लेकर हाल ही में सोशल मीडिया पर चर्चाएँ भी तेज हो गई थीं।

    आईपीएस रचिता जुयाल को उनकी मेहनत और ईमानदार छवि के लिए जाना जाता है। सेवा काल के दौरान उन्होंने पुलिसिंग के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मजबूत कार्यशैली की छाप छोड़ी।

  • आईपीएस रचिता जुयाल का इस्तीफा स्वीकार, हुई सेवा मुक्त..।

    आईपीएस रचिता जुयाल का इस्तीफा स्वीकार, हुई सेवा मुक्त..।

    देहरादून—   केंद्र सरकार ने उत्तराखंड कैडर की आईपीएस अधिकारी रचिता जुयाल के इस्तीफे को मंजूरी दे दी है।

    गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति ने रचिता जुयाल के त्यागपत्र को 16 सितंबर 2025 की अपराह्न से प्रभावी मानते हुए उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) से मुक्त कर दिया है।

    गृह मंत्रालय के पुलिस-I प्रभाग के अवर सचिव संजीव कुमार द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि 2015 बैच की यह अधिकारी अब आईपीएस सेवा का हिस्सा नहीं हैं।

    इससे पूर्व, उत्तराखंड सरकार के मुख्य सचिव द्वारा 25 अगस्त 2025 को रचिता जुयाल के इस्तीफे से संबंधित प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था। प्रस्ताव पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के उपरांत गृह मंत्रालय ने इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी।

    रचिता जुयाल उत्तराखंड कैडर की तेजतर्रार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों में गिनी जाती रही हैं। उनके इस्तीफे को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा रही, हालांकि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से सेवा त्यागने का निर्णय लिया था।

    गृह मंत्रालय की अधिसूचना के साथ ही अब रचिता जुयाल का औपचारिक रूप से आईपीएस सेवा से कार्यकाल समाप्त हो चुका है।

  • अवसर मिलने पर “अपना सर्वश्रेष्ठ स्वरुप करें प्रस्तुत ” पर हुई सॉफ्ट स्किल कार्यशाला।

    अवसर मिलने पर “अपना सर्वश्रेष्ठ स्वरुप करें प्रस्तुत ” पर हुई सॉफ्ट स्किल कार्यशाला।

    देहरादून—  आज के प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक और व्यावसायिक परिवेश में, ज्ञान और योग्यताएँ अपरिहार्य हैं। हालाँकि, अवसरों को आकार देने में दिखावे, शारीरिक भाषा और शिष्टाचार के माध्यम से आत्मविश्वास से खुद को प्रस्तुत करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

    इसी उद्देश्य से, देहरादून स्थित कन्या गुरुकुल परिसर के अंग्रेजी विभाग ने महिला सशक्तिकरण व्याख्यान श्रृंखला  को स्नातकोत्तर छात्राओं के लिए “अपना सर्वश्रेष्ठ रूप प्रस्तुत करें – दिखावे, शारीरिक भाषा और शिष्टाचार के माध्यम से” विषय पर एक अत्यधिक केंद्रित दो घंटे की इंटरैक्टिव कार्यशाला का आयोजन किया। सॉफ्ट स्किल्स प्रशिक्षक और छवि सलाहकार सुश्री मेहर कौर द्वारा संचालित इस सत्र का उद्देश्य छात्राओं को शैक्षणिक और व्यावसायिक दोनों ही परिस्थितियों में आत्मविश्वास, आत्म-जागरूकता और व्यावसायिकता विकसित करने में मदद करना था,

    साथ ही साक्षात्कारों, प्रस्तुतियों और समूह बातचीत में प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए उनके गैर-मौखिक संचार और समग्र रूप को निखारना भी था।

    10-20 प्रतिभागियों के एक छोटे समूह के लिए डिज़ाइन की गई इस कार्यशाला में व्यावहारिक प्रदर्शनों, निर्देशित अभ्यास और शारीरिक भाषा, सौंदर्य-प्रसाधन और शिष्टाचार पर चर्चाओं पर ज़ोर दिया गया। सत्र के बेहद आकर्षक प्रारूप का उद्देश्य बुनियादी सौंदर्य-प्रसाधन और शिष्टाचार के ऐसे अभ्यासों को सिखाना था जो आत्म-जागरूकता और व्यावसायिकता को दर्शाते हों, जिससे छात्र भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास और संयम के साथ सामना करने के लिए तैयार हों।

    कार्यशाला की शुरुआत डॉ. अनामिका साहा गुप्ता के गर्मजोशी भरे स्वागत और परिचय के साथ हुई, जिन्होंने आत्मविश्वास बढ़ाने और पेशेवर पहचान बनाने में सॉफ्ट स्किल्स के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला।

    व्यक्तिगत रूप से संवादात्मक रूप में आयोजित इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को प्रभावी ढंग से शामिल करने के लिए प्रदर्शनों, निर्देशित अभ्यास और चर्चाओं को अपनाया गया।

    मुख्य फोकस क्षेत्रों में सार्वजनिक सेटिंग्स में आत्म-जागरूकता और आत्मविश्वास विकसित करना, साक्षात्कार और प्रस्तुतियों के लिए प्रभावी शारीरिक भाषा का अभ्यास करना, स्थायी प्रथम छाप बनाने में उपस्थिति की भूमिका को समझना और औपचारिक और अर्ध-औपचारिक दोनों संदर्भों के लिए उचित शिष्टाचार सीखना शामिल था।

    इन व्यावहारिक अंतर्दृष्टि ने छात्रों को सिद्धांत को वास्तविक जीवन के अनुप्रयोगों के साथ जोड़ने में सक्षम बनाया, जिससे सत्र उनके शैक्षणिक और व्यावसायिक विकास के लिए प्रभावशाली और तत्काल प्रासंगिक हो गया।

    कार्यशाला प्रतिभागियों के लिए व्यावहारिक और समृद्ध साबित हुई। छात्रों ने शारीरिक भाषा और सौंदर्य के महत्व पर स्पष्टता प्राप्त की, साथ ही शैक्षणिक और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों में अपनी प्रस्तुति को बेहतर बनाने के लिए व्यावहारिक रणनीतियों को भी प्राप्त किया।

    इंटरैक्टिव डिज़ाइन ने सुनिश्चित किया कि प्रतिभागियों ने न केवल इन कौशलों को सीखा बल्कि उनका अभ्यास भी किया, जिससे संचार और आचरण के लिए एक अधिक आत्मविश्वास और परिष्कृत दृष्टिकोण विकसित हुआ।

    अंत में, सृष्टि मालकोटी और सैजसी रावत ने सुश्री मेहर कौर के समृद्ध और प्रभावशाली सत्र के लिए आभार व्यक्त करते हुए औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

    कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय भागीदारी और सहयोग के लिए सभी संकाय सदस्यों, आयोजन समिति और छात्रों की भी सराहना की गई। महिला सशक्तिकरण व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत कार्यशाला के आयोजन में निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग के लिए डॉ. रीना वर्मा का विशेष आभार व्यक्त किया गया।