Category: देहरादून

  • पीएम पोषण योजना में करोड़ों का खेल! दो सदस्यीय समिति कर रही जांच….

    पीएम पोषण योजना में करोड़ों का खेल! दो सदस्यीय समिति कर रही जांच….

    देहरादून – प्रधानमंत्री पोषण योजना (पूर्व मिड-डे मील) में तीन करोड़ रुपये के कथित घपले की गूंज के बाद शासन ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। अपर निदेशक गढ़वाल कंचन देवराड़ी की अध्यक्षता में गठित इस समिति ने अपनी जांच शुरू कर दी है।

    शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह ने इस गंभीर प्रकरण की जांच के लिए कंचन देवराड़ी के साथ वित्त नियंत्रक हेमेंद्र गंगवार को भी समिति में शामिल किया है और दोनों अधिकारियों को दो दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

    जांच में शुरुआती तौर पर सामने आया है कि इस घोटाले में शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, बिना बैंककर्मियों की मिलीभगत के करोड़ों रुपये का लेन-देन संभव नहीं था। इतना ही नहीं, जब करोड़ों रुपये खातों से निकाले गए, तब विभाग को एक बार भी ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) नहीं मिला, जिससे तकनीकी घपले की भी आशंका गहराती जा रही है।

    अपर निदेशक कंचन देवराड़ी ने पुष्टि की कि समिति ने जांच की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है और सभी संबंधित दस्तावेजों की गहनता से छानबीन की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि मामला केवल विभागीय चूक का नहीं बल्कि संगठित वित्तीय अनियमितता का संकेत दे रहा है।

  • आंगनबाड़ी भोजन की गुणवत्ता जांचेंगे अफसर, नहीं मिले मानक तो जिम्मेदार होंगे दंडित….

    देहरादून – राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों में परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता की जांच अब अधिकारियों की पहली जिम्मेदारी होगी। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग ने सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब निरीक्षण पर गए अधिकारी खुद भोजन चखेंगे और अगर कहीं गुणवत्ता में कमी पाई गई, तो संबंधित कर्मियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

    खुद खाकर परखें गुणवत्ता

    महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की निदेशक रंजना राजगुरु ने राज्य के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों, ब्लॉक स्तर के बाल विकास परियोजना अधिकारियों और सुपरवाइजरों को निर्देशित किया है कि वे आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण करें और वहां परोसे जा रहे भोजन को स्वयं खाकर उसकी गुणवत्ता की जांच करें।

    अंतिम चेतावनी: सुधार करें वरना कार्रवाई तय

    निदेशक ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अधिकारियों के लिए अंतिम अवसर है। यदि निरीक्षण के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है और अधिकारी उसे रिपोर्ट नहीं करते, तो उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    वजन मशीनों पर भी होगी नजर

    भोजन की गुणवत्ता के साथ-साथ अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर रखी वजन मापने की मशीनों की सटीकता की भी जांच की जाएगी। कुछ स्थानों से वजन मशीनों के सही न दिखाने की शिकायतें मिली थीं, जिससे बच्चों के पोषण स्तर का सही मूल्यांकन नहीं हो पा रहा था। ऐसे में वजन मशीनों की कैलिब्रेशन जांच को भी अनिवार्य कर दिया गया है।

     सभी जिलों के लिए सख्त निर्देश

    यह आदेश राज्यभर के 13 जिला कार्यक्रम अधिकारी, 105 बाल विकास परियोजना अधिकारी और 595 सुपरवाइजरों पर लागू होगा। सभी को निर्देशित किया गया है कि वे नियमित निरीक्षण करें और भोजन, स्वच्छता व पोषण से जुड़ी गड़बड़ियों को तुरंत सुधारें।

    उद्देश्य: बच्चों को मिले पौष्टिक व गुणवत्तापूर्ण आहार

    राज्य सरकार की यह पहल कुपोषण की रोकथाम, पोषण स्तर के सटीक आकलन और स्वस्थ भविष्य की नींव रखने के इरादे से की गई है। विभाग का मानना है कि जब अधिकारी खुद खाने की गुणवत्ता जांचेंगे, तो जवाबदेही बढ़ेगी और सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा।

  • उत्तराखंड की विलुप्त होती लोककलाओं और परंपराओं के संरक्षण हेतु कलाकारों ने विधानसभा अध्यक्ष से की भेंट।

    उत्तराखंड की विलुप्त होती लोककलाओं और परंपराओं के संरक्षण हेतु कलाकारों ने विधानसभा अध्यक्ष से की भेंट।

    देहरादून—  उत्तरकाशी से आए लोकसंस्कृति से जुड़े प्रसिद्ध युवा कलाकार मुकुल बड़ुनी एवं ने आज उत्तराखण्ड विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण से शिष्टाचार भेंट की।

    यह भेंट उत्तराखण्ड की विलुप्त होती कला, संस्कृति एवं परंपराओं को अपने सृजन के माध्यम से पुनर्जीवित करने के प्रयासों के संदर्भ में की गई।

    इस अवसर पर उन्होंने अपने हस्तनिर्मित चित्रकला “माँ गंगा” की एक अनुपम कलाकृति विधानसभा अध्यक्ष को उपहार स्वरूप भेंट की, जिसे उन्होंने अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरणास्पद बताया। यह कलाकृति न केवल कला का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि उत्तराखण्ड की अध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है।

    विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण ने मुकुल बड़ूनी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर केवल हमारी पहचान ही नहीं, बल्कि हमारी आत्मा है। इसे संजोए रखना और नई पीढ़ी तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि लोककलाओं को मंच और प्रोत्साहन देकर हम अपने राज्य की सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक पहचान दिला सकते हैं।

    श्रीमती खण्डूडी भूषण ने इससे जुड़े सभी कलाकारों को उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं और आश्वस्त किया कि ऋतु खण्डूडी भूषण पारंपरिक कला एवं कलाकारों को निरंतर सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • बुजुर्गों की जगह अब युवा, पंचायत चुनाव में नई सोच की दस्तक….

    बुजुर्गों की जगह अब युवा, पंचायत चुनाव में नई सोच की दस्तक….

    देहरादून – उत्तराखंड के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव इस बार युवाओं के लिए राजनीति की ‘प्राथमिक पाठशाला’ साबित हो रहे हैं। छात्र राजनीति में सक्रिय रहे युवा अब गांवों की सेवा और विकास को लेकर नई सोच के साथ मैदान में उतर चुके हैं। पारंपरिक तौर पर बुजुर्गों के वर्चस्व वाले पंचायत चुनाव में अब युवा प्रत्याशियों की उपस्थिति नए बदलाव का संकेत दे रही है।

    इस बार प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) और जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए कई युवा प्रत्याशी जोर-शोर से प्रचार में जुटे हैं। उनके पास न सिर्फ आधुनिक सोच है, बल्कि योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की स्पष्ट रणनीति भी है।

    छात्र राजनीति से पंचायत की चौखट तक

    डीएवी कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सिद्धार्थ राणा ने क्षेत्र पंचायत रौंदेली से बीडीसी पद के लिए नामांकन किया है। उनका कहना है कि उन्होंने शहरी राजनीति में अनुभव प्राप्त किया है, जिसे अब गांव के विकास में लगाना चाहते हैं। इसी तरह प्रेमचंद नौटियाल, जो छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके हैं, मशक क्षेत्र पंचायत से चुनाव लड़ रहे हैं।

    श्याम सिंह चौहान, जो एनएसयूआई के प्रत्याशी के रूप में छात्र राजनीति में सक्रिय रहे, अब जिला पंचायत रायगी से सदस्य पद के लिए मैदान में हैं। उनका सपना क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना को मजबूत करना है।

    प्रमेश रावत (क्षेत्र पंचायत 10 प्यूनल), अंकिता पाल (ग्राम सभा खोलिया गांव, अस्कोट से ग्राम प्रधान पद) और नित्यानंद कोठियाल (बुढ़वां से बीडीसी प्रत्याशी) भी छात्र राजनीति से निकलकर अब गांव की सेवा के लिए तैयार हैं। इन सभी का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि बदलाव की शुरुआत करना है।

    विकास के प्रति प्रतिबद्ध

    युवा प्रत्याशियों का कहना है कि वे नेता बनने नहीं, सेवक बनने आए हैं। उनका एजेंडा है –

    • अस्पताल, शमशान घाट, खेल मैदान, बारातघर और कॉलेज की स्थापना
    • बुजुर्गों और दिव्यांगों की पेंशन योजनाओं को सक्रिय रूप से लागू करना
    • सरकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाना
    • स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना

    वह कहते हैं कि बुजुर्ग अब मार्गदर्शक बनें, प्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी अब युवा उठाएंगे।

    नई सोच, नया जोश – पंचायत में दिखेगा बदलाव

    उत्तराखंड का यह पंचायत चुनाव केवल जनप्रतिनिधि चुनने का मौका नहीं, बल्कि गांव-गांव में बदलाव की अलख जगाने का माध्यम बन गया है। युवाओं की यह भागीदारी आने वाले समय में राज्य की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने का संकेत देती है।

  • बालिकाओं के ड्रॉपआउट पर सख्त सीएम धामी, शिक्षा विभाग को दिए ठोस कार्रवाई के निर्देश….

    बालिकाओं के ड्रॉपआउट पर सख्त सीएम धामी, शिक्षा विभाग को दिए ठोस कार्रवाई के निर्देश….

    देहरादून – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में बालिका शिक्षा को लेकर गहरी चिंता जताते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्कूल छोड़ चुकी बेटियों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। उन्होंने बालिकाओं के ड्रॉपआउट दर को कम करने के लिए प्रभावी और ठोस प्रयास करने की जरूरत पर बल दिया है।

    मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग की “गेम चेंजर योजनाओं” की वर्चुअल समीक्षा करते हुए कहा कि बालिकाओं की शिक्षा केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य को संवारने की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रवेशोत्सव अभियान के तहत पहली, छठी और नवमी कक्षा में बच्चों का अधिकाधिक नामांकन सुनिश्चित किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि छात्र-छात्राओं को किताबें, नोटबुक और ड्रेस समय से उपलब्ध हों। उन्होंने विद्यालय परिसरों की सुरक्षा, बालिकाओं के लिए पृथक शौचालय और सैनिटरी पैड की उपलब्धता को भी अनिवार्य बताया।

    धामी ने शिक्षा में नवाचार, कला, रंगमंच और खेल गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने ‘फिट इंडिया’ अभियान के तहत बच्चों को स्वस्थ रहने और खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को चेताया कि शिक्षकों के रिक्त पदों को जल्द भरा जाए और जो परिसंपत्तियां वर्षों से निष्क्रिय पड़ी हैं, उनका समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

  • दोहरे नामों पर लगी कोर्ट की रोक, प्रत्याशियों की उम्मीदों को लगा झटका….

    दोहरे नामों पर लगी कोर्ट की रोक, प्रत्याशियों की उम्मीदों को लगा झटका….

    देहरादून – पंचायत चुनाव से पहले हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश ने कई प्रत्याशियों की रणनीति को झटका दे दिया है। पंचायती राज अधिनियम के तहत जिन मतदाताओं का नाम निकाय (शहरी क्षेत्र) की मतदाता सूची में दर्ज है, उन्हें अब पंचायत (ग्राम क्षेत्र) की मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने इस संबंध में जारी सर्कुलर पर रोक लगाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि दोहरी मतदाता सूची का कोई औचित्य नहीं है।

    इस फैसले के बाद उन प्रत्याशियों की चिंता बढ़ गई है, जो शहरी क्षेत्र में रहने वाले मूल ग्रामीण मतदाताओं को गांव वापस बुलाकर वोट डलवाते थे। खासतौर पर वे प्रत्याशी प्रभावित हुए हैं जिनका चुनावी समीकरण रिश्तेदारों, पारिवारिक जुड़ाव या व्यक्तिगत संपर्कों पर आधारित होता था।

    अब ऐसी स्थिति में शहरी क्षेत्रों में दर्ज इन ग्रामीण मतदाताओं को गांव तक लाना न केवल कठिन हो गया है, बल्कि कानूनी रूप से अमान्य भी। इससे कई क्षेत्रों में चुनावी नतीजों पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में यह परंपरा रही है कि पंचायत चुनावों के दौरान लोग रिश्तेदारी, सामाजिक संबंध या क्षेत्रीय जुड़ाव के कारण अपने मूल गांव आकर मतदान करते हैं। लेकिन अब दोहरे नाम के नियम और मतदाता सूची की स्पष्टता ने इस प्रक्रिया को जटिल बना दिया है।

    चुनाव में भाग्य आजमा रहे प्रत्याशी अब मतदाताओं को समझाने में जुटे हैं कि वे अपने नाम ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में ही दर्ज कराएं, लेकिन समय और प्रक्रिया की बाध्यता के चलते कई लोग मतदान से वंचित भी हो सकते हैं।

    हाईकोर्ट के आदेश ने मतदाता सूची की पारदर्शिता को मजबूती दी है, लेकिन प्रत्याशियों की पारंपरिक चुनावी रणनीतियों को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता भी उत्पन्न कर दी है।

  • राज्य को मिलेगा अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल, कैबिनेट तय करेगी संचालन की दिशा….

    राज्य को मिलेगा अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल, कैबिनेट तय करेगी संचालन की दिशा….

    देहरादून – राजधानी के हर्रावाला में 106 करोड़ की लागत से तैयार हुआ सुपर स्पेशियलिटी कैंसर अस्पताल अब संचालन की दहलीज पर पहुंच चुका है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर संचालित करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए राजीव गांधी कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र, नई दिल्ली के साथ वार्ता पूरी हो चुकी है। अब अंतिम निर्णय कैबिनेट की बैठक में लिया जाएगा।

    तीन सौ बेड के इस अत्याधुनिक अस्पताल का निर्माण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से किया गया है। अस्पताल के शुरू होने से उत्तराखण्ड के कैंसर मरीजों को बाहर के राज्यों में इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

    यहाँ कैंसर से संबंधित सभी आधुनिक सुविधाएं जैसे कि परामर्श, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, उच्च स्तरीय सर्जरी एवं जांच सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने जानकारी दी कि अस्पताल के सफल संचालन हेतु PPP मोड को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे मरीजों को गुणवत्ता पूर्ण और समयबद्ध उपचार उपलब्ध हो सके।

    गौरतलब है कि इस अस्पताल का शिलान्यास वर्ष 2020 में किया गया था। अब यह अपने अंतिम चरण में है और संचालन शुरू होते ही यह उत्तराखंड में कैंसर इलाज का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

  • हिमालय क्षेत्र में जमा हो रही ऊर्जा, उत्तराखंड में बड़े भूकंप का खतरा बढ़ा….

    हिमालय क्षेत्र में जमा हो रही ऊर्जा, उत्तराखंड में बड़े भूकंप का खतरा बढ़ा….

    देहरादून – उत्तराखंड में एक बार फिर से भूकंप को लेकर खतरे की घंटी बज चुकी है। भूगर्भ वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र, विशेष रूप से उत्तराखंड में आने वाले समय में एक भयावह भूकंप आ सकता है, जिसकी तीव्रता 7.0 रिक्टर स्केल तक हो सकती है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान और एफआरआई देहरादून में आयोजित दो महत्वपूर्ण कार्यशालाओं में देशभर के भूवैज्ञानिकों ने इस आशंका को लेकर गंभीर चर्चा की। “अंडरस्टैंडिंग हिमालयन अर्थक्वेक्स” और “अर्थक्वेक रिस्क असेसमेंट” विषय पर हुई बैठकों में विशेषज्ञों ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की भूगर्भीय प्लेटें ‘लॉक’ हो चुकी हैं, जिससे वहां भारी मात्रा में ऊर्जा एकत्र हो रही है – जो किसी भी समय बड़े भूकंप का कारण बन सकती है।

    छोटे झटकों की संख्या में वृद्धि

    नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार, बीते छह महीनों में उत्तराखंड में 22 छोटे भूकंप आए हैं, जिनकी तीव्रता 1.8 से 3.6 के बीच थी। सबसे अधिक झटके चमोली, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और बागेश्वर में महसूस किए गए। वैज्ञानिकों का कहना है कि छोटे-छोटे झटकों की श्रृंखला एक बड़े भूकंप की भूमिका बनाते हैं।

    1991 और 1999 की आपदाएं याद

    उत्तराखंड में पहले भी बड़े भूकंप तबाही ला चुके हैं। 1991 में उत्तरकाशी में 7.0 और 1999 में चमोली में 6.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें सैकड़ों जानें गई थीं और व्यापक तबाही हुई थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि तब से अब तक कोई बड़ा झटका नहीं आया है, जो चिंता का विषय है।

    क्यों आता है भूकंप?

    वाडिया संस्थान के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत ने बताया कि उत्तराखंड में दो टेक्टोनिक प्लेटों की गति असमान है। जब एक प्लेट ‘लॉक’ हो जाती है, तो वह तनाव का केंद्र बनती है। यही तनाव भविष्य में भूकंप के रूप में ऊर्जा को बाहर निकालता है।

    देहरादून की जमीन की होगी जांच

    भूकंप की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्र सरकार ने देहरादून सहित कुछ प्रमुख शहरों में जमीन की मजबूती का आकलन करने का निर्णय लिया है। इस कार्य के लिए CSIR बेंगलुरु द्वारा विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। पूर्व में वाडिया और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण भी इस दिशा में काम कर चुके हैं।

    चेतावनी देने वाले सेंसर सक्रिय

    प्रदेश में 169 स्थानों पर भूकंप पूर्व चेतावनी देने वाले सेंसर लगाए गए हैं। आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यदि भूकंप 5.0 तीव्रता से अधिक का होगा, तो 15 से 30 सेकंड पहले “भूदेव एप” के माध्यम से चेतावनी लोगों को दी जाएगी।

    मैदानों में ज़्यादा खतरा

    विशेषज्ञों का कहना है कि समान तीव्रता के भूकंप आने पर मैदानी क्षेत्रों में नुकसान की आशंका पहाड़ी क्षेत्रों की तुलना में अधिक होती है। चूंकि बड़े भूकंप अपेक्षाकृत कम गहराई में आते हैं (10 किमी तक), इसलिए उनकी मारक क्षमता अधिक होती है।

    सावधानी ही बचाव है

    वैज्ञानिकों की चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन, जागरूकता और सतर्कता ही संभावित नुकसान को कम कर सकते हैं। सरकार और आम जन को मिलकर इस चुनौती के लिए तैयार रहना होगा।

  • हरीश रावत का बड़ा ऐलान: कांग्रेस की सरकार आई तो गैरसैंण को देंगे राजधानी का दर्जा….

    हरीश रावत का बड़ा ऐलान: कांग्रेस की सरकार आई तो गैरसैंण को देंगे राजधानी का दर्जा….

    देहरादून  – उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कहा कि अगर जनता 2027 में कांग्रेस को सत्ता में लाती है, तो गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाया जाएगा।

    हरीश रावत ने लिखा, “जो लोग कहते हैं कि मुझे मौका मिला था और मैंने गैरसैंण को राजधानी नहीं बनाया, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि 2027 में कांग्रेस को मौका दीजिए, हम गैरसैंण को राजधानी बनाकर दिखाएंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान गैरसैंण में 2500 लोगों के ठहरने की क्षमता विकसित की गई थी, जबकि पहले वहां रात में 20 लोग भी नहीं रुक सकते थे।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद उन्होंने राज्य को उभारने का काम किया। गैरसैंण में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 57 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था और निर्माण एजेंसी भी तय कर दी गई थी। भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन की आधारशिला रखने के साथ-साथ पांच हजार लोगों की आवासीय क्षमता के भवन निर्माण की शुरुआत की गई थी।

    हरीश रावत ने प्रदेश सरकार पर तंज कसते हुए गन्ना किसानों के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि गन्ने का मूल्य तय करने में हमेशा देरी की गई है, लेकिन इस बार तो मूल्य घोषित ही नहीं किया गया। बरसात के बाद गन्ने की कटाई शुरू हो जाएगी, लेकिन प्रदेश सरकार ने अभी तक पिछले वर्ष का भुगतान भी तय नहीं किया है। किसानों को पुराने रेट पर भुगतान करने को कहा जा रहा है, जबकि किसान 450 रुपये प्रति क्विंटल की दर की मांग कर रहे हैं।

  • राज्य निर्वाचन आयोग ने सिंबल आवंटन की प्रक्रिया की स्थगित ।

    राज्य निर्वाचन आयोग ने सिंबल आवंटन की प्रक्रिया की स्थगित ।

    देहरादून–– राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ा निर्णय लेते हुए सिंबल आवंटन की प्रक्रिया को सोमवार दोपहर 2:00 बजे तक स्थगित कर दिया है। यह फैसला हाई कोर्ट में सोमवार को होने वाली सुनवाई को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अंतरिम आदेश में ऐसे प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई है जो निकाय और पंचायत दोनों की वोटर लिस्ट में शामिल हैं। इस पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए आयोग ने हाई कोर्ट में आवेदन दायर किया है।

    सोमवार को आयोग के वकील अदालत में अपना पक्ष रखेंगे और निर्देशों की स्पष्टता के लिए आग्रह करेंगे।

    जारी आदेश के मुताबिक मा० उच्च न्यायालय, उत्तराखण्ड, नैनीताल में योजित रिट याचिका संख्या 503 (एम०बी०) वर्ष 2025 शक्ति सिंह बर्थवाल बनाम राज्य निर्वाचन आयोग एवं अन्य में दिनांक 11 जुलाई, 2025 को पारित आदेश के संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग, उत्तराखण्ड द्वारा एक स्पष्टता(Clarification) प्रार्थना-पत्र मा० उच्च न्यायालय में दाखिल किया गया है जिस पर दिनांक 14.7.2025 को पूर्वाह में सुनाई होली नियत हुई है।

    अतः इस संबंध में आयोग की अधिसूचना (संशोधित) संख्या 1303/रा०नि०आ० अनु०-2/4324/2025 दिनांक 28 जून, 2025 में ‘निर्वाचन प्रतीक आवंटन की तिथि हेतु विनिर्दिष्ट दिनांक 14.7.2025 को उम्मीदवारों हेतु निर्वाचन प्रतीक आवंटन की कार्यवाही को अपराह्न 02.00 बच्चे तक स्थगित किया जाता है।