Category: हल्द्वानी

  • नशे के खिलाफ कठोर कदम: हल्द्वानी में SOG‑कोतवाली टीम की बड़ी जीत, 3 तस्कर पकड़े….

    नशे के खिलाफ कठोर कदम: हल्द्वानी में SOG‑कोतवाली टीम की बड़ी जीत, 3 तस्कर पकड़े….

    हल्द्वानी – त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मद्देनज़र नशे के सौदागरों पर पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को एसओजी और कोतवाली हल्द्वानी पुलिस की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग दो किलो अवैध चरस के साथ तीन तस्करों को गिरफ्तार किया।

    वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल प्रहलाद नारायण मीणा के निर्देशानुसार जनपदभर में मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक नगर प्रकाश चन्द्र, क्षेत्राधिकारी नितिन लोहनी और प्रभारी निरीक्षक कोतवाली हल्द्वानी राजेश कुमार यादव के नेतृत्व में गठित टीम ने यह सफलता हासिल की।

    टीम ने फायर सर्विस से करीब 200 मीटर पहले मंडी बाईपास रोड हल्द्वानी में चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध आर्टिगा कार (UK04-TB-5996) को रोका। तलाशी लेने पर वाहन से 1.975 किलोग्राम अवैध चरस बरामद हुई, जिसे तीन लोग शहर में तस्करी के इरादे से ला रहे थे।

    गिरफ्तार अभियुक्तों के नाम व पते:

    नन्दन सिंह पुत्र भवान सिंह, निवासी ग्राम बेडचूला, थाना मुक्तेश्वर, जिला नैनीताल (उम्र 41 वर्ष)

    सौरभ मिश्रा पुत्र चन्द्रसेन मिश्रा, निवासी रायनवादा, थाना बहेड़ी, जिला बरेली (उ.प्र.) (उम्र 30 वर्ष)

    हरीश सिंह पुत्र नर सिंह, निवासी ग्राम बेडचूला, थाना मुक्तेश्वर, जिला नैनीताल (उम्र 35 वर्ष)

    बरामद की गई अवैध चरस:

    नन्दन सिंह के पास से – 1.080 किलो

    सौरभ मिश्रा के पास से – 476 ग्राम

    हरीश सिंह के पास से – 419 ग्राम

    कुल बरामदगी – 1.975 किलो अवैध चरस

    अभियुक्तों की पूछताछ में खुलासा हुआ कि वे गांवों से चरस इकट्ठा कर पर्याप्त मात्रा में होने पर इसे शहर में बेचने लाते हैं।

    अपराधिक इतिहास:

    नन्दन सिंह पर पहले भी NDPS एक्ट के तहत केस दर्ज है –

    एफआईआर संख्या 103/2024, थाना काठगोदाम

    वर्तमान मामला – एफआईआर संख्या 252/2025, थाना हल्द्वानी, धारा 8/20/60 NDPS एक्ट के अंतर्गत दर्ज

    गिरफ्तारी में शामिल टीम:

    व०उ०नि० महेन्द्र प्रसाद (कोतवाली हल्द्वानी)

    उ०नि० संजीत राठौर (प्रभारी, एसओजी)

    उ०नि० प्रेमराम विश्वकर्मा (प्रभारी, चौकी मंडी)

    का० ललित मेहरा (चौकी मंडी)

    का० सन्तोष विष्ट (एसओजी)

    का० अरुण राठौर (एसओजी)

    का० भूपेन्द्र जेष्ठा (एसओजी)

    नैनीताल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पंचायत चुनावों के दौरान नशे के अवैध धंधे में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। क्षेत्र में निगरानी और सघन चेकिंग अभियान लगातार जारी रहेगा।

  • सम्मान के साथ मृत्यु का अधिकार लागू करे राज्य सरकार-डॉ संतोष मिश्र

    सम्मान के साथ मृत्यु का अधिकार लागू करे राज्य सरकार-डॉ संतोष मिश्र

    हल्द्वानी—-   यदि सम्मान के साथ जीना संभव है तो मृत्यु भी सम्मानजनक ही होनी चाहिए।

    एमबीपीजी के पूर्व प्राध्यापक डॉ. संतोष मिश्र ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के हवाले से यह इच्छा व्यक्त की है कि जीवन में यदि कभी असाध्य रूप से बीमार हो जाएं या लगातार निष्क्रिय अवस्था में जाना पड़े तो चिकित्सा उपचार या जीवन रक्षक प्रणाली बंद कर दी जाय, जिससे उन्हें सम्मानजनक तरीके से मुक्ति मिल सके।

    डॉ. मिश्र ने राज्य सरकार से मांग की कि इस संबंध में सभी राजकीय और प्राइवेट अस्पतालों को समुचित दिशा निर्देश जारी करे।

    सम्मान के साथ मृत्यु का अधिकार” (Right to Die with Dignity) का सीधा अर्थ यह है कि एक व्यक्ति को, जो असाध्य बीमारी से पीड़ित है, अपने जीवन के अंतिम क्षणों में सम्मान और गरिमा के साथ निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए।

    इसमें यह तय करना शामिल है कि यदि वह चाहे तो उपचार या जीवन रक्षक उपायों को जारी रखने या बंद करने का विकल्प चुन सकता है।

    सर्वोच्च न्यायालय का 2018 का फैसला भारत में मृत्यु के अधिकार के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण था। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पाँच न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत “सम्मानपूर्वक मृत्यु के अधिकार” को एक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी।

    न्यायालय ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु को भी वैध ठहराया और “लिविंग विल” या अग्रिम निर्देश बनाने की अनुमति दी, जिससे गंभीर रूप से बीमार मरीज जीवन के अंतिम निर्णयों के बारे में अपनी इच्छाएँ व्यक्त कर सकें। इस फैसले को भारत में इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    2023 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में नियमों को और सरल करते हुए गंभीर बीमार रोगियों के लिए सम्मान के साथ मृत्यु का अधिकार की अनुमति दी थी, जिनके ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं या अब जीवन-निर्वाह इलाज से लाभ नहीं हो रहा है।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अग्रिम चिकित्सा निर्देश (Advance Medical Directive – AMD) एक प्रकार की जीवित वसीयत है, जिसमें मरीज भविष्य में अपनी चिकित्सा उपचार संबंधी इच्छाओं को रिकॉर्ड कर सकता है।

    अग्रिम चिकित्सा निर्देश के तहत मरीज को दो व्यक्तियों को नामांकित करने की आवश्यकता होगी, यदि वह अपना निर्णय लेने की क्षमता खो देता है तो उसकी ओर से स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेंगे। यह दस्तावेज चिकित्सा पेशेवरों को यह निर्णय लेने में सहायक होगा कि मरीज को किस प्रकार का चिकित्सा उपचार चाहिए या नहीं।

    केंद्र सरकार ने कहा- ‘निष्क्रिय” इच्छामृत्यु को लागू करना राज्यों की जिम्मेदारी

    मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में मंगलवार को केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य के राज्य का विषय होने के कारण राज्यों की प्राथमिक जिम्मेदारी बताया है। सरकार ने कहा कि, वे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में ‘निष्क्रिय’ इच्छामृत्यु और जीवनकाल हेतु वसीयत को अस्पताल प्रोटोकॉल में शामिल करके लागू करें।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा में कहा कि राज्यों की यह भी जिम्मेदारी है कि वे नैतिक सुरक्षा उपाय स्थापित करें। नड्डा ने उच्चतम न्यायालय के 2018 के एक फैसले के आलोक में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में ‘निष्क्रिय’ इच्छामृत्यु को लागू करने के लिए उठाए गए विशिष्ट उपायों को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में यह टिप्पणी की।

    उन्होंने कहा कि 2018 के ‘कॉमन कॉज’ बनाम भारत संघ मामले में उच्चतम न्यायालय ने अग्रिम निर्देशों के क्रियान्वयन और ‘निष्क्रिय’ इच्छामृत्यु के कार्यान्वयन के लिए विशिष्ट दिशानिर्देश निर्धारित किए थे। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने ‘कॉमन कॉज’ बनाम भारत संघ संबंधी विविध आवेदन संख्या 1699 में इन दिशा-निर्देशों को क्रियान्वित करने संबंधी प्रक्रिया को 2023 में सरल बनाकर इनमें छूट दी है।

    मंत्री नड्डा ने कहा कि ‘स्वास्थ्य’ राज्य का विषय होने के कारण राज्यों एवं केंद्रशासित क्षेत्रों का यह प्राथमिक दायित्व है कि वे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में ‘निष्क्रिय’ इच्छामृत्यु और जीवनकाल के लिये वसीयत को अस्पताल प्रोटोकॉल में शामिल करके लागू करें। ‘निष्क्रिय’ इच्छामृत्यु में मृत्यु ‘प्राकृतिक’ तरीके से होती है, क्योंकि रोगी को जीवित रखने के लिए आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं रोक दी जाती हैं।

  • यूओयू के पूर्व कुलपति की विदाई में किया गया सम्‍मान समारोह।

    यूओयू के पूर्व कुलपति की विदाई में किया गया सम्‍मान समारोह।

    हल्द्वानी—  उत्‍तराखण्‍ड मुक्‍त विश्‍वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. ओ.पी.एस. नेगी की विदाई में विश्‍वविद्यालय में एक भव्‍य सम्‍मान समारोह का आयोजन किया गया,

    जिसकी अध्‍यक्षता नवनियुक्‍त कुलपति प्रो. नवीन चन्‍द्र लोहनी ने की। कार्यक्रम में विश्‍वविद्यालय के सभी शिक्षक, अधिकारी, कमर्चारी शामिल रहे ।

    सम्‍मान समारोह के अवसर पर विश्‍वविद्यालय के प्राध्‍यापकों ने पूर्व कुलपति प्रो. नेगी के 6 साल के कार्यकाल में प्राप्‍त उपलब्धियों पर अपने अपने विचार रखे और इसके लिए प्रो. नेगी का धन्‍यवाद किया तथा उनके स्‍वस्‍थ जीवन की कामना के लिए उन्‍हें शुभकामनाएं दीं।

    इस अवसर पर बोलते हुए प्रो. नेगी ने कहा कि उत्‍तराखण्‍ड मुक्‍त विश्‍वविद्यालय में उनकी जो भी उपलब्धियां रही हैं वह विश्‍वविद्यालय के सभी शिक्षकों, अधिकारियों व कार्मिकों की मेहनत और सहभागिता से रही हैं।

    कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करते हुए नवनियुक्‍त कुलपति प्रो. नवीन चन्‍द्र लोहनी ने कहा कि प्रो. नेगी ने जिन उंचाईयों तक विश्‍वविद्यालय को पहुंचाया है हम इसके लिए उनका धन्‍यवाद करते हैं तथा विश्‍वविद्यालय के लिए उनके द्वारा किए गये कार्यों को विश्‍वविद्यालय में हमेशा याद किया जाएगा। विश्‍वविद्यालय आगे भी उनके मार्गदर्शन को प्राप्‍त करता रहेगा।

    कार्यक्रम का संचालन विश्‍वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. खेमराज भट्ट ने किया । इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक प्रो. सोमेश कुमार, प्रो. पी. डी. पंत, वित्‍त नियंत्रक एस. पी. सिंह, प्रो. रेनू प्रकाश, प्रो. एम. एम. जोशी, प्रो. जितेन्‍द्र पाण्‍डेय, प्रो. डिगर सिंह फर्स्‍वान, प्रो. राकेश रयाल, प्रो. कमल देवलाल, प्रो. अरविन्‍द भट्ट, प्रो. पी.के. सहगल आदि सभी शिक्षक, अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे ।

  • कार्यभार संभालते ही नवनियुक्‍त कुलपति ने लीं महत्‍वपूर्ण बैठकें।

    कार्यभार संभालते ही नवनियुक्‍त कुलपति ने लीं महत्‍वपूर्ण बैठकें।

    हल्द्वानी—  उत्‍तराखण्‍ड मुक्‍त विश्‍वविद्यालय के नवनियुक्‍त कुलपति प्रो. नवीन चन्‍द्र लोहनी ने अपने कार्यकाल के पहले दिन विश्‍वविद्यालय में कई प्रशासनिक व अकादमिक बैठकें लीं हैं ।

    प्रो. लोहनी ने सर्वप्रथम विश्‍वविद्यालय के सभी प्रशासनिक अधिकारियों कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक सहायक कुलसचिव के साथ एक बैठक की तथा विश्‍वविद्यालय की प्रशासनिक व्‍यवस्‍था को समझ कर प्रशासनिक व्‍यवस्‍था को सुदृढ करने की बात की ।

    इसके साथ ही विश्‍वविद्यालय के प्रचार – प्रसार को लेकर प्रचार- प्रसार अनुभाग व आई सीटी अनुभाग के सभी कार्मिकों की बैठक ली और कहा कि हमें विश्‍वविद्यालय का प्रचार प्रसार पर जोर देना होगा, जिससे कि हमारी पहुंच राज्‍य के सुदूर क्षेत्र के लोगों तक हो सके, इसके लिए उन्‍होंने अनुभाग को प्रचार प्रसार योजना पर कार्य करने को कहा।

    इसी क्रम में उन्‍होंने विश्‍वविद्यालय के सभी विद्याशाखाओं के निदेशकों के साथ भी एक बैठक की जिसमें सभी विद्याशाखाओं के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों की जानकारी ली गई तथा उनके प्रचार –प्रसार के लिए प्रचार – प्रसार सामग्री तैयार करने के लिए कहा गया और छात्र संख्‍या को बढाने पर जोर देने को कहा गया ।

  • प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार संभाला।

    प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार संभाला।

    हल्द्वानी—-   उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी में आज प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी ने विश्वविद्यालय के नवम कुलपति के रूप में विधिवत रूप से कार्यभार ग्रहण कर लिया है।

    विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित एक संक्षिप्त एवं गरिमामय स्वागत समारोह के बाद उन्होंने कुलपति पद की जिम्मेदारी संभाली।

    प्रो. लोहनी एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् व शोधकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। शिक्षण, अनुसंधान एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनके तीन दशकों से अधिक का समृद्ध अनुभव रहा है।

    कुलपति पद की जिम्मेदारी संभालने के पश्चात उन्होंने सभी कर्मचारियों व शिक्षकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि हम सभ मिल कर विश्वविद्यालय को ऊंचाईयों तक पहुंचाएंगे।

    प्रो. लोहनी ने कहा कि पूर्व कुलपति प्रो. ओ. पी. एस. नेगी जी ने जो कार्य शुरू किये हैँ उन्हें हम आगे बढ़ाएंगे और राज्य को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणीय राज्यों में ले जाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने सभी से कहा कि सब कर्तव्यनिष्ठा से मिलजुलकर काम करेंगे।

    इस अवसर पर विश्वविद्यालय के निदेशकों, अधिकारियों, और शिक्षकों ने उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं दीं और आशा व्यक्त की है कि उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय नई ऊँचाइयों को छुएगा।

    विश्वविद्यालय के निवर्तमान कुलपति प्रो. ओ. पी. एस. नेगी व कुलसचिव डॉ. खेमराज भट्ट, निदेशक अकादमिक प्रो. पी डी पंत, परीक्षा नियंत्रक प्रो. सोमेश कुमार, वित्त नियंत्रक एस. पी. सिंह ने पुष्प गुच्छ देकर प्रो. लोहनी का स्वागत किया।

    इस अवसर पर प्रो. रेनू प्रकाश, प्रो राकेश रयाल, प्रो. एम एम जोशी, प्रो. डिगर सिंह, प्रो. जितेंद्र पाण्डेय, प्रो. आशुतोष भट्ट, प्रो. अरविन्द भट्ट, प्रो. पी के सहगल,विमल चौहान आदि सभी शिक्षक, अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।

    कार्यक्रम का संचालन कुलसचिव खेमराज भट्ट जी ने किया।

  • हरियाली के बीच रोजगार की राह, लाखनमंडी में ईको विलेज का सपना होगा साकार….

    हरियाली के बीच रोजगार की राह, लाखनमंडी में ईको विलेज का सपना होगा साकार….

    हल्द्वानी – उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक नई सौगात तैयार हो रही है। हल्द्वानी वन प्रभाग ने नंधौर रेंज के लाखनमंडी क्षेत्र को “ईको विलेज” के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। आम के पेड़ों से घिरे इस शांत वन क्षेत्र को अब ईको टूरिज्म के केंद्र के रूप में संवारा जाएगा।

    पांच करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया शासन को

    ईको विलेज को आकार देने के लिए वन विभाग ने करीब पांच करोड़ रुपये की लागत का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है। इस परियोजना के तहत रिसेप्शन भवन, ईको हट्स, पर्यटक कॉटेज, कैफेटेरिया, रसोई, स्वच्छ शौचालय, पेयजल व्यवस्था, कूड़ा प्रबंधन प्रणाली और प्रवेश द्वार का निर्माण प्रस्तावित है। साथ ही पूरे क्षेत्र का सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा।

    पर्यटन के साथ-साथ युवाओं को मिलेगा रोजगार

    प्रभागीय वनाधिकारी कुंदन कुमार ने बताया कि यह परियोजना केवल पर्यटन को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड के रूप में प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। विशेष रूप से नंधौर और चोरगलिया जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को इससे सीधा लाभ होगा।

    प्राकृतिक संसाधनों का होगा संरक्षण

    यह ईको विलेज न केवल पर्यटकों को जंगल की गोद में प्रकृति से जुड़ने का अनुभव देगा, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को भी मजबूत करेगा। यह परियोजना राज्य में हरित पर्यटन की दिशा में एक मॉडल उदाहरण बन सकती है।

  • शिवभक्त कावड़ियों का पुष्प वर्षा कर किया स्वागत।

    शिवभक्त कावड़ियों का पुष्प वर्षा कर किया स्वागत।

    हल्द्वानी—   सावन के महीने में बहुत से शिव भक्त कावड़िये देश के विभिन्न शहरों से गंगा जल लेकर आते हैं तथा शिव जी का गंगाजल से जलाभिषेक करते हैं,

    इन कावड़ियों का समाज के विभिन्न वर्ग के लोग पुष्प वर्षा कर स्वागत करते हैं,

    इसी क्रम में आज हल्द्वानी में नगर मंत्री कार्तिक चौहान( युवा मोर्चा ) भा.ज.पा. द्वारा राजपुरा आर्मी गेट के समक्ष हरिद्वार से कावड़ लेकर लौट रहे कावड़ियो पर पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया गया ।

    इस कार्यक्रम मे जिलाध्यक्ष युवा मोर्चा कार्तिक हर्बोला ,नगरअध्यक्ष युवा मोर्चा विशु शर्मा,दिपावली शर्मा ,रोहित श्रीवास्तव,योगेन्द्र परमार आदि शामिल रहे

  • कमिश्नर रावत का आदेश: 15 सितंबर तक हल्द्वानी होगी ‘पशु–मुक्त’, नगर निगम ने पहले दिन की शानदार शुरुआत….

    कमिश्नर रावत का आदेश: 15 सितंबर तक हल्द्वानी होगी ‘पशु–मुक्त’, नगर निगम ने पहले दिन की शानदार शुरुआत….

    हल्द्वानी – कुमाऊँ कमिश्नर दीपक रावत ने हल्द्वानी को “गोवंश-मुक्त” करने के उद्देश्य से नगर निगम एवं पशुपालन विभाग को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अमर उजाला के अभियान के प्रभाव से प्रेरित होकर, उन्होंने हार्दिक रूप से उन पशुपालकों की पहचान करने तथा उन पर जुर्माना लगाने की व्यवस्था पर जोर दिया है, जो गाय, घोड़ा, खच्चर जैसे पालतू या दुधारू पशुओं को लावारिस छोड़ देते हैं ।

    नगर निगम की टीम ने पहले दिन ही बरेली रोड से तीन गोवंश पकड़कर गोशाला भेजे हैं और नगर आयुक्त ऋचा सिंह के अनुसार शुक्रवार, 20 अगस्त से बड़े पैमाने पर सक्रिय अभियान शुरू होगा, तथा 15 सितंबर तक पूरे हल्द्वानी क्षेत्र को पशु मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है । यह कदम सड़कों पर अप्रत्याशित दुर्घटनाओं तथा यातायात बाधा को रोकने के लिए उठाया गया है, जो पिछले दिनों शहरवासियों की चिंताओं का विषय बना हुआ था

  • एमआईईटी कुमाऊँ में “व्यास पूजन: गुरु-शिष्य ज्ञान परंपरा” विषयक संगोष्ठी का हुआ आयोजन।

    एमआईईटी कुमाऊँ में “व्यास पूजन: गुरु-शिष्य ज्ञान परंपरा” विषयक संगोष्ठी का हुआ आयोजन।

    हल्द्वानी—   एमआईईटी कुमाऊँ, शिक्षा नगर, लामाचौड़, हल्द्वानी में भारतीय शिक्षण मंडल, उत्तराखंड प्रांत के तत्वावधान में व्यास पूजन: गुरु-शिष्य ज्ञान परंपरा” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम  जिसमें शिक्षा जगत की जानी-मानी हस्तियों ने सहभागिता की।

    संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. आशुतोष भट्ट, निदेशक, व्यावसायिक अध्ययन विभाग, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय रहे। उन्होंने भारतीय परंपरा में गुरु-शिष्य संबंध की ऐतिहासिकता, महत्व तथा वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर विस्तृत प्रकाश डाला।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रो. (डॉ.) गीता तिवारी, संयुक्त निदेशक, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल ने अपने संबोधन में छात्रों को गुरु-शिष्य परंपरा की आध्यात्मिक गहराई और बौद्धिक अनुशासन को समझने के लिए प्रेरित किया।

    उन्होंने कहा गुरु केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण के मार्गदर्शक होते हैं। आज के तकनीकी युग में भी यदि छात्र सच्चे अर्थों में ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने अंदर जिज्ञासा, विनम्रता और अनुशासन की भावना विकसित करनी होगी।

    उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे शिक्षा को केवल नौकरी का माध्यम न मानें, बल्कि उसे आत्मविकास और समाज सेवा का साधन बनाएं।भारतीय शिक्षा पद्धति की आत्मा गुरु-शिष्य के रिश्ते में निहित है। हमें इस परंपरा को समझकर ही भविष्य की सशक्त और नैतिक पीढ़ी तैयार करनी होगी।

    मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. डॉ. अमित जोशी, विभागाध्यक्ष, प्रबंधन विभाग, कुमाऊँ विश्वविद्यालय उपस्थित रहे। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों और उसकी निरंतरता की आवश्यकता पर बल देते हुए युवाओं को इस दिशा में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित किया।

    इस अवसर पर एमआईईटी कुमाऊँ के कार्यकारी निदेशक डॉ. तरुण सक्सेना तथा एसीआईसी के सीईओ डॉ. कमल रावत विशेष रूप से उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम का समन्वय एमआईईटी कुमाऊँ द्वारा किया गया, जिसमें संस्थान के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों—डॉ. उषा पॉल, डॉ. शैफाली, डा लतिका, हेमा नेगी , तारा दत्त, डॉ. वात्सल्य, और अन्य शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

    छात्रों की उत्साही उपस्थिति एवं सहभागिता ने कार्यक्रम को जीवंत एवं प्रेरणास्पद बना दिया। यह संगोष्ठी भारतीय शिक्षा प्रणाली की मूल आत्मा गुरु-शिष्य परंपराके महत्व को समझने और आत्मसात करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुई।

  • प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल से जुड़े दर्जनों व्यापारी, समाज को नशे से बचाने का लिया संकल्प।

    प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल से जुड़े दर्जनों व्यापारी, समाज को नशे से बचाने का लिया संकल्प।

    हल्द्वानी—-  कई दर्जन व्यापारी प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल से जुड़े, प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र फर्स्वाण ने सभी का माल्यार्पण किया और सर्वसम्मति से हल्द्वानी में नशीले पदार्थ की बिक्री को पूर्ण रूप से बंद करने का संकल्प लिया।

    प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल के युवा अध्यक्ष कुंदन रावत के नेतृत्व में आज कई दर्जन प्रतिष्ठित व्यापारियों ने प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल से जुड़कर संगठन के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

    सभी नए सदस्यों का संगठन के प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र फर्स्वाण ने माल्यार्पण कर स्वागत किया और संगठन के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि यह  संगठन गैर राजनीतिक हैं, तथा व्यापारी हितों के साथ साथ समय समय पर सामाजिक हितों के मुद्दे के लिए संघर्षरत रहता हैं।

    युवा अध्यक्ष कुंदन रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर धामी  द्वारा प्रदेश में नशीले पदार्थों को पूर्ण रूप से बंदी का जो अभियान चलाया हैं, प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल उसका पूर्ण रूप से समर्थन करता हैं, और नशीले पदार्थों की बिक्री करने वालों पर रासुका के तहत कार्यवाही की मांग करता हैं।

    इस संदर्भ में अति शीघ्र व्यापार मंडल पुलिस व ड्रग विभाग के आला अधिकारियों से मिलेगा और उनसे नशीले पदार्थों की बिक्री की रोकथाम की मांग करेगा। परंतु नशे के खिलाफ अभियान में ईमानदार और समाज के प्रति संकल्पीत व्यापारी का उत्पीड़न नही ना हों, इस बात का ध्यान रक्खा जाना अतिआवश्यक हैं।

    आज के कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रदेशमहामंत्री राजेन्द्र फर्स्वाण, प्रदेश संगठन प्रभारी विरेंद्र गुप्ता, महानगर अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, महामंत्री रिषभ पाठक, जिला महामंत्री प्रज्ञान भारद्वाज, युवा अध्यक्ष कुंदन रावत ,युवा महामंत्री ललित जायसवाल, पंकज फ़ुलारा, योगी गिरी गोस्वामी, गिरीश राजपूत, राहुल सागर ,अंकुर श्रीवास्तव, चेतन जायसवाल ,राहुल गोस्वामी, हरेंद्र बिष्ट, उमेश माथुर ,बसंत दिवाकर, रमाकांत रावत ,विक्की राजपूत, विशाल सिंह, शुभम् रावत, कोस्तुभ नेगी, अखिलेश पाल ,गौरव सोनकर, कृत पाल ,रोहित सनवाल ,देव सोनकर आदि कई दर्जन व्यापारी उपस्थित थे।