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मुम्बई–   महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी धमाका हुआ है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को सोमवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब उसके 9 में से 6 सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया।

इस घटनाक्रम ने न केवल उद्धव गुट की ताकत को कमजोर किया है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी नई हलचल पैदा कर दी है।

मुंबई स्थित नंदनवन बंगले पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ हुई बैठक के बाद बागी सांसदों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने फैसले का ऐलान किया।

इस दौरान शिंदे ने तंज भरे अंदाज में कहा कि वर्ष 2022 में 40 विधायकों के साथ शुरू हुआ आंदोलन अब अगले चरण में पहुंच गया है।

उन्होंने कहा, “तब चौके लगे थे, अब छक्के लग रहे हैं। हमारी लड़ाई बालासाहेब ठाकरे के विचारों और शिवसेना की असली पहचान को बचाने की है।”

उद्धव खेमे में मचा हड़कंप–

6 सांसदों के जाने के बाद लोकसभा में शिंदे गुट की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो जाएगी, जबकि उद्धव गुट के पास अब केवल 3 सांसद बचेंगे। इस घटनाक्रम के बाद उद्धव ठाकरे ने अपने विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की आपात बैठक बुलाई। हालांकि बैठक में कुछ विधायक नहीं पहुंचे, जिससे पार्टी में और टूट की अटकलें तेज हो गई हैं।

बैठक के बाद उद्धव ठाकरे ने संयमित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बागी सांसदों को अपना पक्ष रखने दिया जाए, समय आने पर वह भी जवाब देंगे।

सांसदों के पाला बदलने पर आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं ने साबित कर दिया है कि उनकी वफादारी बिकाऊ है और उन्होंने लालच के लिए अपने सिद्धांतों को छोड़ दिया।

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राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भी बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि शिंदे ने छह नए गद्दार पैदा कर दिए हैं। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी अब हालात संभालने के लिए बड़े राजनीतिक कदम उठा सकती है।

जनता के बीच जाएंगे उद्धव–

बढ़ते राजनीतिक संकट के बीच उद्धव ठाकरे ने 27 जून से महाराष्ट्र में जनसंपर्क अभियान शुरू करने का फैसला किया है। खास बात यह है कि वह उन लोकसभा क्षेत्रों का भी दौरा करेंगे, जहां से बागी सांसद चुने गए हैं। इसे शक्ति प्रदर्शन और संगठन बचाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

दल-बदल कानून से बच सकते हैं बागी सांसद–

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, लोकसभा में शिवसेना (UBT) के कुल 9 सांसद हैं। इनमें से 6 सांसदों का एक साथ अलग होना दल-बदल कानून के तहत दो-तिहाई संख्या की शर्त पूरी करता है। ऐसे में इन सांसदों को अयोग्यता से राहत मिलने की संभावना है।

चार साल में दूसरी बड़ी टूट–

यह पहली बार नहीं है जब उद्धव ठाकरे की शिवसेना को बड़ा झटका लगा हो। जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों की बगावत ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। चुनाव आयोग ने बाद में शिंदे गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह भी दे दिया था। अब सांसदों की यह बगावत उद्धव गुट के लिए चार साल में दूसरा सबसे बड़ा राजनीतिक झटका मानी जा रही है।

महाराष्ट्र की राजनीति में यह घटनाक्रम सिर्फ सांसदों के पाला बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शक्ति संतुलन बदलने वाला घटनाक्रम माना जा रहा है। एक तरफ शिंदे गुट अपनी पकड़ मजबूत करता दिख रहा है, तो दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे के सामने संगठन और समर्थकों को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

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