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पौड़ी/गढ़वाल—   कोट ब्लॉक मुख्यालय के समीप गुलदार की सक्रियता से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। देर रात करीब 1:30 बजे गुलदार ने एक बछड़े को अपना निवाला बना लिया।

इसके बाद सुबह करीब 3 बजे गुलदार ने एक अन्य बछड़े पर हमला कर दिया। हालांकि स्थानीय निवासियों ने शोर मचाकर और टॉर्च की रोशनी डालकर गुलदार को वहां से भगाया, जिससे बछड़े की जान बच सकी।

गुलदार के हमले में बछड़ा गंभीर रूप से घायल हुआ है। उसके गले पर गहरे दांतों के निशान हैं और गले में छोटा छेद भी हो गया है, जबकि कमर और पैरों पर गुलदार के पंजों के निशान मिले हैं।

घटना के बाद गुलदार के दोबारा हमला करने की आशंका को देखते हुए अंकित उनियाल और सजन कुमार पूरी रात मौके पर घायल बछड़े के साथ मौजूद रहे और सुबह होने तक उसकी निगरानी करते रहे।

उन्होंने आसपास के लोगों के साथ मिलकर सतर्कता बरती, ताकि गुलदार दोबारा बछड़े पर हमला न कर सके।घटना के बाद स्थानीय निवासी एवं समाजसेवी अंकित उनियाल ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी विशाल शर्मा से फोन पर संपर्क कर घायल बछड़े के उपचार की जानकारी दी।

सीवीओ ने बताया कि सुबह पशु चिकित्सा विभाग की टीम को मौके पर भेजकर बछड़े का उपचार कराया जाएगा। सुबह होते ही पशुधन प्रसार अधिकारी मनीष रावत आए और उनके द्वारा समय पर बछड़े का उपचार किया गया।

वहीं कोट ब्लॉक क्षेत्र में निराश्रित गोवंश की समस्या भी लगातार बनी हुई है। एक ओर गुलदार आए दिन गोवंश को अपना शिकार बना रहा है, वहीं दूसरी ओर आसपास के गांवों से लोग गाय-बछड़ों को ब्लॉक मुख्यालय के आसपास छोड़ जाते हैं, जिसके चलते यहां गोवंश का झुंड बढ़ता जा रहा है और उनकी सुरक्षा भी खतरे में बनी हुई है।

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अंकित उनियाल ने बताया कि उनके घर के सामने भी बड़ी संख्या में गायों का झुंड रहता है। और इस प्रकार की घटनाएं बहुत बार हो चुकी है और उपचार के लिए हमेशा से पशुपालन विभाग हमेशा समय सहयोग रहता है। उन्होंने बताया गोशाला निर्माण को लेकर वह जिलाधिकारी पौड़ी से कई बार वार्ता कर चुके हैं, लेकिन क्षेत्रीय जगह से ही भूमि उपलब्ध न होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

उन्होंने बताया कि ब्लॉक मुख्यालय से करीब 1000 मीटर की दूरी पर ग्राम कठूड़ की भूमि गोशाला निर्माण के लिए उपयुक्त थी,जो कि गाँव के लास्ट छोर पर थी और ब्लॉक के पास थी।लेकिन ग्राम कठूड़ के ग्रामीणों द्वारा भूमि देने से साफ इनकार किए जाने के बाद वहां निर्माण की प्रक्रिया रुक गई। अब दूसरी भूमि की तलाश की जा रही है और भूमि उपलब्ध होते ही गोशाला निर्माण की आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

अंकित उनियाल ने कहा कि गोशाला निर्माण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के सभी लोगों का दायित्व है। उन्होंने कहा कि गोशाला एक धार्मिक और सामाजिक कार्य है, इसलिए सभी लोगों को दलगत या व्यक्तिगत सोच से ऊपर उठकर आगे आना चाहिए और गोशाला निर्माण में सहयोग एवं समर्थन करना चाहिए।

लगातार गुलदार के हमलों और निराश्रित गोवंश की बढ़ती समस्या को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन और वन विभाग से क्षेत्र में प्रभावी कदम उठाने की मांग की है, ताकि गोवंश के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।


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