
हल्द्वानी– महिला दिवस की पूर्व संध्या में आंतरिक शिकायत समिति एवं महिला सशक्तिकरण प्रकोष्ठ उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी के संयुक्त तत्वाधान में “महिला सशक्तिकरण के विविध आयाम:एक परिचर्चा”नामक विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया l
सेमिनार में प्रोफेसर दिव्या उपाध्याय, निदेशक यूजीसी मालवीय मिशन शिक्षण प्रशिक्षण केंद्र कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल ने मुख्य वक्ता व ज्योति शाह,उपाध्यक्ष राज्य महिला आयोग उत्तराखंड ने मुख्य अतिथि के रूप में सेमिनार में अपने व्याख्यान को प्रस्तुत किया l
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि व विशिष्ठ अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई l तत्पश्चात मुख्य अतिथियों को शाल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया l कार्यक्रम संयोजक ,पीठासीन अधिकारी आंतरिक शिकायत समिति एवं निदेशक मानविकी ,प्रोफेसर रेनू प्रकाश जी ने तत्पश्चात विषयोस्थापन के द्वारा उक्त विषय में अपने विचार व्यक्त किए तथा सभी वक्ताओं का आभार व्यक्त कियाl

उन्होंने कहा कि आज महिलाओं ने परिवार की जिम्मेदारियां को निभाने के अतिरिक्त समाज में अपने आप को शीर्ष पदों पर स्थापित किया हैI इस बात को कई व्यावहारिक उदाहरणों से प्रस्तुत किया व इस बात पर भी जोर दिया कि आज महिलाएं पुरुष प्रधान कार्यों जैसे पर्वतारोहण और सैन्य सेवाओं में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं Iउन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जो महिलाएं भागीदारी में पीछे छूट गई है उन्हें आगे लाने की जिम्मेदारी आज सभी की हैI
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रोफेसर दिव्या उपाध्याय जी ने कहा कि निसंदेह भारतवर्ष की ही बात करें तो पहले की अपेक्षा आज नारियां बहुत आगे निकल आई है lइसे महसूस करने के लिए हमारी अपनी जिंदगी की कहानियां ही बहुत है आंकड़ों की नहीं lतो इस संख्या महिला दिवस की पूर्व संध्या पर जश्न को मनाने के लिए एक अच्छा मौका कहा जा सकता है l
हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कोविड-19 ने महिला विकास की गति को धीमा किया व उनकी दुनिया को बदला है lवर्तमान में पुरुष एवं नारियों के बीच 2006 से अब तक सिर्फ 68.4% अंतर ही कम हो पाया है और इसलिए हमें जरूरत है किन आंकड़ों को और सुदृढ़ किया जाए l और एक गणना के अनुसार अगर यही स्थिति रही तो पुरुष और नारी को बराबरी पर आने पर अभी 131 वर्ष और लग सकते हैंl
तत्पश्चात मुख्य अतिथि ज्योति शाह जी ने इस बात पर जोर दिया की बराबरी की शुरुआत सर्वप्रथम व्यावहारिक रूप से घर से ही शुरू करनी होगी ,क्योंकि यही से एक पुरुष प्रधान मानसिकता की शुरुआत का बीज चाहे अनचाहे परिवार या समाज के द्वारा बो दिया जाता है l उन्होंने महिला हिंसा के खिलाफ महिलाओं को तत्परता से खड़े होने का आह्वान किया l उन्होंने बताया कि महिलाओं के पदों में होने के बावजूद वह एक डमी की भांति कार्य करती हैं और उनकी भूमिका सिर्फ हस्ताक्षर या मुहर लगाने तक सीमित रह जाती है lइस इमेज से बाहर आने की जरूरत है और यही एक वजह है कि उनका राजनीतिक क्षेत्र में पदार्पण आज भी प्रमुखता से नहीं हो पाया हैl
इसके उपरांत उत्कृष्ट कार्यो हेतु उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की महिला कर्मचारियों मीनू भट्ट एवं श्वेता को कुलपति प्रो ओमप्रकाश नेगी जी द्वारा प्रशस्ति पत्र व नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया l
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर ओम प्रकाश नेगी जी ने यह कहा कि वैदिक युग से भारतवर्ष में महिलाओं की स्थिति भारतीय ज्ञान परंपरा में काफी सशक्त रही हैl लेकिन धीरे-धीरे समाज में अहम की भावना ने पुरुषों और महिलाओं के बीच में खाई को एक जगह देनी शुरू की lऔर आज वर्तमान में नारियों ने इस समाज में अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छा शक्ति के चलते बहुत सारी उपलब्धियां को हासिल किया है lऔर आज राष्ट्रपति पद तक महिलाएं आसीन हैं लेकिन आज के दौर में सबसे अच्छी शुरुआत है समावेशीकरण की शुरुआत जो की एक अच्छा प्रयास साबित होगा l
महिलाओं को सशक्त करने में प्रोफेसर ओम प्रकाश नेगी जी ने शिक्षा के अमूल योगदान को सबसे प्रभावी तरीका बताया l
कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुल सचिव एवं अकादमिक निदेशक प्रोफेसर पी डी पंत जी ने अपने उद्बोधन में विश्वविद्यालय की पूरी आयोजन समिति और कार्यक्रम में मौजूद आगंतुकों विशेष वक्ताओं ,विशेष अतिथियों और शिक्षकों , कर्मचारियों मीडिया कर्मी स्टूडेंट्स व सभी शिक्षकों का आभार व्यक्त किया व अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर सभी को शुभकामनाएं प्रेषित की।
कार्यक्रम में डॉ डिगर सिंह, डॉ नागेंद्र गंगोला,डॉ नीरज सिंह ,डॉ दीपंकर जोशी ,डॉ राकेश रयाल डॉ नीरज जोशी ,राजेंद्र सिंह क्वीरा ,डॉ प्रियंका लोहनी शैलजा और रेनू भट्ट इत्यादि मौजूद थे मंच संचालन डॉक्टर रुचि तिवारी जी द्वारा किया गयाl
