नई दिल्ली/उत्तराखंड— लोकसभा में उत्तराखंड के पर्वतीय पर्यटन को लेकर अहम सवाल उठाते हुए नैनीताल-उधम सिंह नगर संसदीय क्षेत्र से सांसद अजय भट्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या देश में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पर्वतीय पर्यटन परिपथ विकसित करने की योजना है और क्या इसमें उत्तराखंड को भी शामिल किया गया है।
इस पर जवाब देते हुए केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट किया कि पर्यटन स्थलों का विकास मुख्य रूप से राज्य सरकारों का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राज्यों को वित्तीय सहायता देकर उनके प्रयासों को मजबूत करती है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में शुरू की गई स्वदेश दर्शन योजना के तहत देशभर में 76 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी, जिसे अब स्वदेश दर्शन 2.0 के रूप में और अधिक सस्टेनेबल एवं जिम्मेदार पर्यटन विकास के उद्देश्य से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत 53 नई परियोजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है। साथ ही प्रशाद योजना और चुनौती आधारित गंतव्य विकास (CBDD) के तहत भी कई अहम परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।
केंद्र सरकार ने ‘विशेष सहायता योजना’ के अंतर्गत देश के 23 राज्यों में 3295.76 करोड़ रुपये की 40 परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्रों का विकास करना है। बजट 2026-27 में उत्तराखंड समेत हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में पर्वतीय ट्रेल्स, ट्रैकिंग और हाइकिंग को बढ़ावा देने की भी घोषणा की गई है।
उत्तराखंड में तेज हुए विकास कार्य
केंद्र की योजनाओं के तहत उत्तराखंड में भी पर्यटन ढांचे को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। टिहरी झील क्षेत्र में इको-टूरिज्म और एडवेंचर स्पोर्ट्स के विकास के लिए 69.17 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
इसके अलावा चंपावत में टी गार्डन एक्सपीरियंस (19.89 करोड़), पिथौरागढ़ के गुंजी क्षेत्र में ग्रामीण पर्यटन क्लस्टर (17.86 करोड़) और जादूंग व माना गांव में भी पर्यटन विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है।
धार्मिक पर्यटन को भी विशेष प्राथमिकता देते हुए कैची धाम, केदारनाथ, बद्रीनाथ धाम, गंगोत्री और यमुनोत्री में तीर्थ सुविधाओं के विस्तार के लिए करोड़ों रुपये जारी किए गए हैं। वहीं ऋषिकेश में राफ्टिंग बेस स्टेशन के विकास हेतु 100 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजना भी स्वीकृत है।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए उत्तराखंड में पर्यटन को नया आयाम देने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है, जिससे राज्य को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत पहचान मिलने की उम्मीद है।
