Spread the love

नैनीताल—-   उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कार्बेट नैशनल पार्क में जिप्सी संचालन के लिए नए पंजीकरण स्थानीय वाहन स्वामियों को पार्क के द्वारा जारी लिस्ट में शामिल नहीं करने के मामले में दायर कई याचिकाओं में सुनवाई हुई।

खण्डपीठ ने सुनवाई के बाद डायरेक्टर कॉर्बेट को टाईगर कंजर्वेशन गाइडलाइन की प्रति पेश करने को कहा, ताकि कॉर्बेट में पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके और जंगल से जुड़े लोगों को इसका अधिक से अधिक लाभ मिले।

अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने बताया कि मुख्य न्यायधीश की खंडपीठ ने अगली सुनवाई 5 दिसम्बर के लिए तय की है। याचिकाकर्ता की ओर से न्यायालय को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सम्बंध में कई दिशा निर्देश जारी किए हैं, जिनका अनुपालन भी करवाया जाए।

मामले के अनुसार स्थानीय निवासी चक्षु करगेती, सावित्री अग्रवाल व अन्य ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा कि कॉर्बेट पार्क में जिप्सी के लिए लॉटरी प्रक्रिया भाग लेने के लिए जो गाइडलाइन बनाई गई है ।

सभी परमिट होल्डर जिनके पास वैलिड परमिट है और शर्तों को पूरा कर रहे हैं। चाहे वे पुराने परमिट धारक हो या फिर नए, उन सब को लॉटरी प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार है लेकिन जिम कॉर्बेट नैशनल पार्क द्वारा विशेष कैटिगरी की जिप्सी स्वामी को पंजीकृत किया जा रहा है और 2 वर्ष पुराने पंजीकृत जिप्सियों को प्रतिभाग नहीं करने दिया जा रहा है,

जबकि इन लोगों के पिछले वर्ष आरटीओ से परमिट प्राप्त किए हैं साथ ही कोर्ट के पूर्व आदेशों का उल्लंघन है। उनको इसमे प्रतिभाग न करने की वजह से जिप्सी संचालक बेरोजगार हो गए हैं। नए बेरोजगारों को रोजगार नही मिल पा रहा है।

See also  बागेश्वर में प्रेम विवाह के एक माह बाद नवविवाहिता ने फांसी लगाकर दी जान,,।

जबकि वे भी स्थानीय लोग है। उनको भी रोजगार दिया जाय। इसके जवाब में सरकार की तरफ से कहा गया कि जिन को परमिट दिया गया मानकों के अनुरूप दिया गया है। जो मानक पूर्ण नही करते हैं उन्हें लिस्ट से बाहर किया गया है।


Spread the love

You missed