उत्तराखंड—  5 दिसंबर को जारी नियमितीकरण के शासनादेश मसौदे ने राज्यभर के अस्थायी कर्मचारियों में हलचल पैदा कर दी है।

नगर निकाय, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता विभागों में वर्षों से काम कर रहे कर्मचारी कट-ऑफ तिथि जैसे प्रावधानों को लेकर खासे चिंतित हैं।

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उनका कहना है कि सालों तक नियमित कर्मचारियों की तरह काम करने के बावजूद उन्हें अभी भी अस्थिरता झेलनी पड़ रही है। इसलिए नियम ऐसे होने चाहिए जो न्यायपूर्ण और सभी पात्र कर्मचारियों को साथ लेने वाले हों।

देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ ने इस मसौदे को अत्यंत संवेदनशील विषय बताते हुए सरकार से पहले संवाद और फिर सुधार का रास्ता अपनाने की मांग की है। संघ का कहना है कि सरकार को इस फैसले को सिर्फ नियम नहीं, बल्कि कर्मचारियों के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा के रूप में देखना चाहिए।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष राहत मसीह ने साफ कहा कि कर्मचारी केवल नियमितीकरण नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षित भविष्य* की उम्मीद रखते हैं।

उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार प्रावधानों में आवश्यक सुधार कर सभी पात्र कर्मचारियों को लाभ पहुंचाएगी, जिससे न सिर्फ कर्मचारियों का विश्वास बढ़ेगा बल्कि शासन व्यवस्था भी मजबूत होगी।

संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अपनी बात शांतिपूर्वक और मजबूत तरीके से रखते रहेंगे, और उम्मीद है कि मुख्यमंत्री कर्मचारियों के हित में सकारात्मक निर्णय लेकर मसौदे में जरूरी संशोधन करेंगे।

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