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हल्द्वानी—   आज गन्ना सेंटर के रामलीला मैदान में किसान मकान बचाओ संघर्ष समिति द्वारा प्रीपेड स्मार्ट मीटर को लेकर एक खुली चर्चा आयोजित की गई,। इस बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि वे अपने घरों में स्मार्ट मीटर नहीं लगने देंगे।

 

 

संघर्ष समिति और ग्रामीणों ने यह तय किया है कि आगामी तीन दिनों में गांव-गांव और घर-घर जाकर स्मार्ट मीटर के विरोध में संयुक्त मेमोरेंडम (मेजरनामा) पर हस्ताक्षर कराए जाएंगे, जिसे उत्तराखंड सरकार के मुख्य सचिव एवं मुख्यमंत्री को प्रेषित किया जाएगा।

 

सरकार किसानों के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाकर उन पर आर्थिक और मानसिक दबाव बनाना चाहती है।

 

किसानों के हितों की असुरक्षा बढ़ेगी, क्योंकि यदि किसान छह माह में फसल काटने के बाद एक साथ बिल जमा करना चाहे, तब भी सरकार उसका कनेक्शन नहीं काट सकती है।
पहले पैसा भरो, फिर बिजली लो की नीति से गांवों में अंधकार फैलाने की साजिश रची जा रहीं है।

 

गांवों में बिजली विभाग के कर्मचारी अकेली महिलाओं को डराकर जबरन स्मार्ट मीटर लगा रहे हैं। यह कहा जा रहा है कि आज मीटर नहीं लगवाया तो भविष्य में ₹5000 देने होंगे।

 

किसानों की आर्थिक स्थिति दयनीय है, हर किसान कर्ज में है और उसके पास नियमित भुगतान की व्यवस्था नहीं होती। ऐसे में प्रीपेड स्मार्ट मीटर अन्यायपूर्ण है।

 

संघर्ष समिति ने आगे की लड़ाई में   लगभग 1000 ग्रामीणों के हस्ताक्षर युक्त मेमोरेंडम को उपजिलाधिकारी हल्द्वानी के माध्यम से सरकार को सौंपा जाएगा।

 

यदि सरकार इस पर गंभीरता से विचार नहीं करती और गांवों में जबरन स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य जारी रहता है, तो संघर्ष समिति बड़े स्तर पर जन आंदोलन करेगी।

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गांव के रामलीला मैदान में सरकार की इस नीति के खिलाफ महापंचायत आयोजित की जाएगी । गांव के भीतर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

 

“गांव में स्मार्ट मीटर न लगे, इसके लिए दो दिन पूर्व ही बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को लिखित में सूचना दी गई थी। इसके बावजूद, आज गांवों में घरों के भीतर अकेली महिलाओं को देखकर जबरदस्ती मीटर लगाए गए हैं।

 

यह गंभीर अन्याय है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। संघर्ष समिति मजबूती से इस आंदोलन को लड़ेगी।”

 

“सरकार यदि किसानों की आर्थिक स्थिति पर नजर डाले, तो स्पष्ट होगा कि किसानों के घर में आज भी पैसा नहीं होता और वे कर्ज में डूबे हैं।

 

सरकार किसानों के घरों में जागरूकता के बिना जबरन स्मार्ट मीटर लगाकर गांवों को अंधकार में डालना चाहती है। संघर्ष समिति के साथ मिलकर इस अन्याय के खिलाफ व्यापक विरोध किया जाएगा।

संघर्ष समिति गांव के भीतर जागरूकता अभियान चलाएगी, ताकि ग्रामीणों को उनके अधिकारों की जानकारी हो और वे इस अन्यायपूर्ण नीति का पुरजोर विरोध कर सकें।

हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि यदि सरकार ने जबरन स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य बंद नहीं किया, तो इसका विरोध सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। इस स्थिति की संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।


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