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हल्द्वानी—   शहर के ऊंचापुल क्षेत्र में पत्रकार दीपक अधिकारी पर हुए जानलेवा हमले के बाद प्रशासन और पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है।

वो जगह, जहां अवैध निर्माण की कवरेज के दौरान पत्रकार पर हमला हुआ था —  उसे आज प्रशासन और नगर निगम की टीम ने जेसीबी से ध्वस्त कर दी।

हमले के दोनों आरोपी अजीत चौहान और अनिल चौहान को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

मामले की पूरी कहानी——

11 नवंबर की शाम पत्रकार दीपक अधिकारी, ऊंचापुल के पास नहर किनारे चल रहे अवैध निर्माण की कवरेज कर रहे थे।

रिपोर्टिंग के दौरान ही चौहान बिल्डर से जुड़े दो बदमाशों ने उन पर बेरहमी से हमला कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने उन्हें पीट-पीटकर अधमरा कर दिया और करीब 20 फीट गहरे गड्ढे में फेंक दिया।

स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायल पत्रकार को तत्काल कृष्णा हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

पुलिस की सख्त कार्रवाई—-

पीड़ित पत्रकार की तहरीर के आधार पर थाना मुखानी पुलिस ने अजीत चौहान और अनिल चौहान के खिलाफ
धारा 147, 148, 149, 323, 307, 504, 506 IPC के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

एसएसपी डॉ. मंजुनाथ टी.सी. ने इस घटना को “अत्यंत निंदनीय और अक्षम्य”करार देते हुए एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल की निगरानी में विशेष टीम (SIT) गठित की।

पुलिस टीम ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और जांच अग्रसर  है।

SSP मंजुनाथ टी.सी. का बयान: “कानून को अपने हाथ में लेने वालों को किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा। पत्रकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

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अवैध निर्माण पर गरजी जेसीबी—

घटना के बाद डीएम नैनीताल ललित मोहन रयाल और कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने कड़ा रुख अपनाया।

सुबह-सुबह प्रशासन, पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और अवैध निर्माण को जेसीबी मशीन से जमींदोज़ कर दिया।यह वही निर्माण था जिसके खिलाफ दीपक अधिकारी रिपोर्टिंग कर रहे थे। बरसाती नाले पर बुनियाद डालकर अवैध अतिक्रमण किया जा रहा था, जिसके पीछे स्थानीय प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

पत्रकार संगठनों में आक्रोश—-

इस घटना ने पत्रकारिता जगत को झकझोर दिया है।, स्थानीय पत्रकार संगठनों ने दीपक अधिकारी पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए हमलावरों को सख्त सजा और पीड़ित पत्रकार को सुरक्षा देने की मांग की है।

बड़ा सवाल—-

क्या सच्चाई दिखाना अब अपराध बन गया है?
जिस पत्रकार ने अवैध कब्जों और मिलीभगत पर सवाल उठाए,
उसी पर जानलेवा हमला कर दिया गया —
लेकिन अब प्रशासन की यह कार्रवाई एक सख्त संदेश है कि कानून से ऊपर कोई नहीं।

हल्द्वानी की यह घटना न केवल पत्रकारिता की आज़ादी पर हमला है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सच्चाई की कीमत आज भी बहुत भारी है।

फिलहाल, दोनों आरोपी सलाखों के पीछे हैं और अवैध निर्माण ढहा दिया गया है।


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