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उत्तराखंड में जिला‑पंचायत चुनावों के बीच कई चुनौतियाँ देखने को मिल रही हैं। सबसे पहले, वैश्विक मानसून प्रणाली की सक्रियता के चलते बागेश्वर और उत्तरकाशी जिलों में भारी बारिश ने तीन‑स्तरीय मतदान प्रक्रिया को बाधित किया; कई पुल ध्वस्त और रास्ते बंद हो गए, जिससे चुनाव अधिकारी 10 किलोमीटर तक पैदल बूथ तक पहुँचे । इस बीच, राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने दो चरणों में निर्धारित मतदान (24 और 28 जुलाई) की तारीखों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन संभावित बाधा के लिए रिज़र्व डेट (28 और 30 जुलाई) तय की है और पुनः‑मतदान की संभावनाओं के लिए 31 जुलाई को मतगणना की समय सीमाएँ घोषित की हैं।

वहीं, देहरादून में गेस्ट टीचर्स का आंदोलन उभरा है, जिन्होंने पंचायत चुनाव ड्यूटी से इनकार किया है क्योंकि उन्हें समर वेज या अवकाश काल का वेतन नहीं मिला है। लगभग 4,700 शिक्षकों में से 3,700 अधिक सेवाकाल वाले हैं, जिन्होंने स्थायी नियुक्ति, पूर्ण वेतन, पेंशन व बीमा की मांग की है । इनके अभाव के कारण कई प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई बाधित हो रही है और बच्चों व अभिभावकों में चिंता का स्तर बढ़ रहा है ।

इन चुनौतियों के बीच चुनाव आयोग और राज्य सरकार सक्रिय नजर आ रहे हैं। SEC ने आपदा‑प्रबंधन योजनाएँ सक्रिय की हैं, जिसमें टेलीफोन संचार, हेल्थ‑टिम तथा एसडीआरएफ‑पुलिस की तैनाती शामिल है । इसके अलावा, उच्च न्यायालय ने पंचायत चुनावों के दौरान मॉनसून और धार्मिक यात्राओं (कांवड़ व चढ़ी धाम) के मद्देनज़र सुरक्षा योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।


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