
नैनीताल— उत्तराखण्ड के नैनीताल में लोगों को स्वच्छ पेयजल पिलाने के लिए, करोड़ों की लागत से बना हाई प्रेशर आर.ओ.और वाटर सॉफ्टनिंग सिस्टम की बेरुखी के कारण पिछले दस वर्षों से मशीन धूल फांक रही है।
नैनीताल शहर व आसपास की पेयजल सप्लाई व्यवस्था को स्वच्छ और सुचारू करने के लिए केंद सरकार ने एक योजना बनाई।
इसमें, पेयजल सप्लाई व्यवस्था के नवीनीकरण और वृद्धि के लिए JNNURM ने वर्ष 2014-15 में एक करोड़ तैतीस लाख रुपये की लागत से नैनीताल के हार्ड पानी को सॉफ्ट बनाने के लिए प्रोजेक्ट लांच किया।

योजना में मल्लीताल जल संस्थान के पास एक भवन का निर्माण किया गया। प्रोजेक्ट में प्लांट के लिए पानी के कई बड़े बड़े टैंक लगाए गए। योजना का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद जल संस्थान को हैंडओवर कर दिया गया।
नैनीझील में लगातार घुल रहे सीवर से हो रही पेट व अन्य बीमारियों को देखते हुए आमजन को शुद्ध पानी मुहैय्या कराने के लिए केंद्र सरकार की मदद से इस योजना को अमली जामा पहनाया गया।
हरियाणा के फरीदाबाद की स्वर्ण एक्वाटैक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने वर्ष 2014 से15 के बीच नियमानुसार माईकरो कार्टरिज फ़िल्टर वाला हाई प्रेशर मेम्ब्रेन क्लीनिंग सिस्टम का निर्माण किया।
लेकिन अफसोस, इस आर.ओ.(रिवर्स ओसमोसिस)बेस्ड वाटर सॉफ्टनिंग सिस्टम ने महज 3 से 4 माह तक ही काम किया और ये बन्द कर दिया गया। तब कहा गया कि इसमें से बड़ी संख्या में पानी वेस्ट होता है।
बताया गया है कि अभी नैनीझील से सामान्य फिल्टर किया पानी ही शहर व आसपास के क्षेत्रों में सप्लाई किया जा रहा है। बन्द फिल्टर प्लांट कूड़े की तरह पड़ा है और उसके उच्च स्तरीय फिल्टर भी खराब हो गए हैं।
अब ऐसी स्थिति में, बिना सोचे समझे प्लांट को लगाना एक गलत कदम कहा जा सकता है और शहर की सीधी साधी जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी किया गया है।
