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नईदिल्ली—   उत्तराखंड के चर्चित ‘मोहम्मद दीपक’ मामले में सुप्रीम कोर्ट से दीपक कुमार को बड़ी कानूनी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज FIR पर फिलहाल किसी भी तरह की कार्रवाई करने से रोक लगा दी है। इसके साथ ही उत्तराखंड हाई कोर्ट की ओर से मामले से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो अपलोड करने पर लगाई गई रोक को भी हटा दिया गया है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दीपक की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले से जुड़े प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। हालांकि यह सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश है और इससे मामले का अंतिम निपटारा नहीं हुआ है।

आखिर क्यों चर्चा में आया ‘मोहम्मद दीपक’ नाम?

दीपक कुमार का वास्तविक नाम ‘मोहम्मद दीपक’ नहीं है। यह नाम उन्हें 26 जनवरी 2026 को हुई एक झड़प के बाद मिला, जब वे एक मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में खड़े हुए थे।

मामला तब शुरू हुआ जब बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं ने एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान में ‘बाबा’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। इसे लेकर विवाद बढ़ गया और दुकानदार के साथ झड़प हो गई। इसी दौरान हल्क जिम चलाने वाले दीपक कुमार मौके पर पहुंचे और दुकानदार का पक्ष लेते हुए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से भिड़ गए।

घटना के दौरान दीपक को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया ‘मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।’ इसके बाद घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए और दीपक ‘मोहम्मद दीपक’ नाम से चर्चा में आ गए।

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शिकायत दीपक ने की, FIR उन्हीं के खिलाफ दर्ज हुई

दीपक की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि घटना के बाद उन्होंने खुद पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके उलट उनके खिलाफ ही FIR दर्ज कर दी गई।

दीपक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में FIR और लगाई गई धाराओं पर सवाल उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने दलील दी कि दीपक पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 लगाई गई थी, जो दंगा संबंधी आरोप से जुड़ी है। उनका तर्क था कि इस धारा को लगाने के लिए जरूरी परिस्थितियां मौजूद नहीं थीं और बाद में यह आरोप हटा भी दिया गया।

हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कराने के लिए दीपक ने उत्तराखंड हाई कोर्ट का रुख किया था। हाई कोर्ट ने FIR में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था।

इसके अलावा हाई कोर्ट ने दीपक और मामले से जुड़े एक अन्य व्यक्ति को प्रकरण के संबंध में सार्वजनिक बयान देने तथा सोशल मीडिया पर वीडियो या अन्य सामग्री अपलोड करने से भी रोक दिया था।

दीपक ने हाई कोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल दीपक के खिलाफ दर्ज FIR पर आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही सोशल मीडिया से जुड़ी हाई कोर्ट की रोक को भी हटा दिया गया है।

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हालांकि, यह अंतरिम राहत है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है और आगे की सुनवाई में पूरे मामले के कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का आदेश दीपक कुमार के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है।


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