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उत्तराखंड—   पौड़ी गढ़वाल के रांसी स्थित बहुउद्देश्यीय भवन में आयोजित बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि प्रदेश का आगामी बजट जनसहभागिता के आधार पर तैयार किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा जनोन्मुखी बजट प्रस्तुत करेगी, जो जमीनी आवश्यकताओं, क्षेत्रीय विशेषताओं और जनअपेक्षाओं के अनुरूप हो।

मुख्यमंत्री ने कहा, “बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण की दिशा तय करने वाला विज़न डॉक्यूमेंट है।”उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों, महिला समूहों, उद्यमियों, पर्यटन व्यवसायियों, युवाओं और सीमांत क्षेत्रों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी।

पर्वतीय विकास, रोजगार और आधारभूत संरचना पर विशेष फोकस

संवाद में ग्रामीण और शहरी विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए।

पंचायतों को सशक्त बनाने, ग्रामीण अनुदान बढ़ाने और सोलर प्लांट संचालन को बढ़ावा देने की मांग।

शहरी निकायों के संसाधन बढ़ाने, सोलर सिटी अवधारणा, पार्किंग और सफाई व्यवस्था सुदृढ़ करने पर जोर।

पर्वतीय कृषि, बागवानी, क्लस्टर आधारित खेती, कोल्ड स्टोरेज और पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने के सुझाव।

एमएसएमई और उद्योगों को मिलेगा प्रोत्साहन

पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योग स्थापना हेतु पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज अनुदान और मशीनरी पर विशेष छूट की मांग रखी गई। आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों को उद्योगों से जोड़कर स्थानीय युवाओं को रोजगार देने और पलायन रोकने पर भी जोर दिया गया।

महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार पर विशेष ध्यान

प्रत्येक जनपद में महिला प्रशिक्षण केंद्र, ब्याज-मुक्त ऋण, गौशालाओं के लिए भूमि, जैविक खाद उत्पादन और आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों को बढ़ावा देने जैसे सुझाव दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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पर्यटन, संस्कृति और ऊर्जा क्षेत्र में नई पहल

होमस्टे को रियायती ऋण, हैली सेवा विस्तार, वैकल्पिक मार्ग निर्माण, छोटे पर्यटन स्थलों का विकास और एग्री-टूरिज्म को बढ़ावा देने पर बल दिया गया। ऊर्जा नेटवर्क सुदृढ़ करने और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण व सौंदर्यीकरण के सुझाव भी प्राप्त हुए।

2047 तक आत्मनिर्भर और अग्रणी राज्य बनेगा उत्तराखण्ड

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक राज्य को आत्मनिर्भर और अग्रणी बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि बजट पूर्व संवाद से प्राप्त सभी सुझावों का गंभीर परीक्षण कर उन्हें नीतिगत निर्णयों में शामिल किया जाएगा।

कार्यक्रम में 200 से अधिक जनप्रतिनिधि, उद्यमी, कृषक और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। जनभागीदारी से तैयार होने वाला यह बजट प्रदेश के समावेशी, संतुलित और सतत विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।


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