भारत— आज देश के सामने एक अजीब स्थिति है। एक तरफ नरेंद्र मोदी के पास 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का विजन है -जैसे:–
आत्मनिर्भर भारतका विजन , डिजिटल इंडिया का विजन , गरीब कल्याण का विजन , विश्व में भारत की साख का विजन
और दूसरी तरफ विपक्ष के पास क्या है? सिर्फ एक नारा – *”मोदी को हटाओ”*, मोदी को हटाओ।।।।

नीति विहीन विपक्ष—
आप किसी भी विपक्षी दल का घोषणापत्र या प्रेस कॉन्फ्रेंस देख लीजिए। तो ना उनके पास अर्थव्यवस्था पर कोई रोडमैप है, न राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई स्पष्ट नीति, न युवाओं के रोजगार पर कोई ठोस योजना।
उनका एक ही एजेंडा है –
– सुबह उठो, मोदी को गाली दो,
– संसद चलने मत दो,
– हर अच्छे काम में अड़ंगा लगाओ,
– विदेश में जाकर देश को बदनाम करो,
नकारात्मकता की राजनीति का कारण:–
विपक्ष के पास अपना कोई एजेंडा नहीं है,, इसलिए नहीं है क्योंकि उसके पास अपना कोई नेता भी नहीं है। कोई परिवारवाद बचाने में लगा है, कोई भ्रष्टाचार के केस छिपाने में लगा है, कोई तुष्टीकरण की राजनीति से बाहर नहीं निकल पा रहा।
जब खुद के पास बताने को कुछ न हो, तो एक ही रास्ता बचता है – जो काम कर रहा है, उसे ही गाली दो। यही “मोदी हटाओ” की मानसिकता है। यह देश बनाने की सोच नहीं, बल्कि कुर्सी पाने की बेचैनी है।

3. जनता सब समझती है—
2014 से पहले तक जनता नारे में आ जाती थी। लेकिन अब जनता पूछती है – मोदी को हटा कर लाओगे किसे? क्या लाओगे? कैसे लाओगे?,देश के विकास का रोडमैप क्या है?, विदेशनीति क्या है?,
विपक्ष के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं। इसीलिए चाहे एससी/एसटी एक्ट हो, चाहे राम मंदिर हो, चाहे रामलीला शुद्धिकरण हो – हर मुद्दे पर उनका स्टैंड सिर्फ मोदी विरोध तक सीमित रह जाता है। उन्हें इस बात से मतलब नहीं कि देश का भला किसमें है, उन्हें बस मोदी का विरोध करना है।
विकास बनाम विध्वंस:–
मोदी का एजेंडा है – जोड़ना, बनाना और देश को आगे ले जाना।
विपक्ष का एजेंडा है – तोड़ना, रोकना, देश को पीछे खींचना।
एक आदमी 18 घंटे काम करके देश को आगे ले जा रहा है, और विपक्ष की पूरी फौज सिर्फ उसे हटाने में लगी है।
यही कारण है कि जनता हर बार विपक्ष को नकार देती है। क्योंकि जनता को “मोदी हटाओ” नहीं, “देश बनाओ” वाला एजेंडा चाहिए।
लोकतंत्र में विपक्ष का काम बहुत महत्वपूर्ण होता है – सरकार को आइना दिखाना, बेहतर विकल्प देना।
लेकिन जब विपक्ष का एकमात्र विकल्प “मोदी हटाओ” बन जाए, तो समझ लीजिए वो विपक्ष खत्म हो चुका है।
देश को आज सकारात्मक विपक्ष की जरूरत है, नकारात्मक नारे वाले विपक्ष की नहीं।
