Category: देहरादून

  • आवारा पशुओं को आश्रय देने पर मिलेंगे ₹12,000 प्रतिमाह,,,,जानिए क्या है स्कीम..

    आवारा पशुओं को आश्रय देने पर मिलेंगे ₹12,000 प्रतिमाह,,,,जानिए क्या है स्कीम..

    उत्तराखंड—  सड़को और खेतों में घूम रहे आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए उत्तराखंड सरकार ने एक सराहनीय कदम उठाया है।

    पशुपालन विभाग द्वारा शुरू की गई दो नई योजनाओं के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा और निराश्रित मवेशियों को आश्रय देने वाले लोगों को हर महीने 12 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

    मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. योगेश शर्मा के अनुसार, पहली योजना “ग्राम गौर सेवक योजना” है। इसके अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति अधिकतम पांच नर आवारा पशुओं को पालता है तो उसे ₹80 प्रति पशु प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।

    इस तरह पांच पशुओं के लिए लाभार्थी को लगभग ₹12,000 प्रतिमाह मिलेंगे। इसके साथ ही पशुओं की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और इलाज की सुविधा भी दी जाएगी। वर्तमान में जिले में छह लोग इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।

    दूसरी योजना “गौशाला योजना” के नाम से शुरू की गई है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति अपने गौसदन में किसी भी संख्या में निराश्रित पशुओं को रख सकता है। इसके लिए भी सरकार की ओर से ₹80 प्रति पशु प्रतिदिन का भुगतान किया जाएगा।

    डॉ. शर्मा ने बताया कि जिले के मुनस्यारी और बारावे क्षेत्र में संचालित दो गौशालाओं में फिलहाल 225 निराश्रित पशुओं को आश्रय और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

    सरकार की यह पहल न केवल आवारा पशुओं की समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ग्रामीणों के लिए आय का एक नया और सम्मानजनक साधन भी बन रही है। साथ ही, इससे पशु कल्याण और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का गंभीर मामला:- छात्र को बेल्ट-चप्पलों से पीटा…।

    दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का गंभीर मामला:- छात्र को बेल्ट-चप्पलों से पीटा…।

    उत्तराखंड—  देहरादून स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। एमबीबीएस 2025 बैच के एक जूनियर छात्र ने अपने दो सीनियर छात्रों पर रैगिंग के नाम पर बेरहमी से मारपीट करने के आरोप लगाए हैं।

    पीड़ित छात्र के अनुसार, उसे बेल्ट और चप्पलों से पीटा गया, जबरन बाल कटवाने का दबाव बनाया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

    छात्र ने 13 जनवरी को वार्डन को लिखित शिकायत सौंपते हुए बताया कि 12 जनवरी को 2024 और 2023 बैच के दो सीनियर छात्रों ने पहले हॉस्टल परिसर में उसके साथ मारपीट की, फिर उसे कैंपस के बाहर ले जाकर प्रताड़ित किया।

    शिकायत में यह भी आरोप है कि उसे रात में कैंपस के बाहर बने ‘स्वास्तिक’ के पास सोने के लिए मजबूर किया गया। इस घटना के बाद छात्र खुद को असुरक्षित और भयभीत महसूस कर रहा है।

    मामले के सामने आते ही कॉलेज प्रशासन हरकत में आ गया। कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. गीता जैन ने स्पष्ट किया कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच एंटी-रैगिंग कमेटी को सौंप दी गई है।

    उन्होंने कहा कि कॉलेज में रैगिंग को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    प्राथमिक कार्रवाई के तहत एंटी-रैगिंग कमेटी ने दोनों आरोपित छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित कर दिया है। अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक वे कॉलेज परिसर में भी प्रतिबंधित रहेंगे।

    प्रशासन ने साफ किया है कि रिपोर्ट में आरोप सिद्ध होने पर निलंबन या इससे भी कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

    यह मामला एक बार फिर उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और रैगिंग जैसी अमानवीय प्रवृत्तियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    अब सबकी नजरें एंटी-रैगिंग कमेटी की अंतिम रिपोर्ट और कॉलेज प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

  • अहम फैसला– सरकार का मोबाइल और रील कल्चर पर बैन, जानिए कहां और क्यों ?,,,,

    अहम फैसला– सरकार का मोबाइल और रील कल्चर पर बैन, जानिए कहां और क्यों ?,,,,

    देहरादून—-   चारधाम यात्रा के दौरान मंदिरों की पवित्रता और मर्यादा बनाए रखने के लिए उत्तराखंड सरकार ने अहम और दूरदर्शी निर्णय लिया है।

    इस वर्ष बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन व कैमरा ले जाने पर प्रतिबंध रहेगा। रील-वीडियो और ब्लॉगिंग के चलते बढ़ते विवादों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, जिससे श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ दर्शन कर सकें।

    शनिवार को चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप में गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में गढ़वाल आईजी राजीव स्वरूप, जिलाधिकारी और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

    कहां-कहां रहेगा प्रतिबंध—

    बदरीनाथ : सिंहद्वार से आगे मोबाइल पूरी तरह प्रतिबंधित।
    केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री : मंदिर परिसरों में मोबाइल नहीं ले जा सकेंगे।
    बीकेटीसी व जिला प्रशासन धामों से पहले मोबाइल सुरक्षित रखने की व्यवस्था करेंगे।

    यात्रा तैयारियों पर सख्ती—

    फरवरी तक सभी जिलों को धनराशि जारी; 3 दिन में आवश्यक कार्यों की सूची, 1 सप्ताह में टेंडर फास्ट ट्रैक पर काम।

    31 मार्च तक यात्रा मार्गों की सड़कें दुरुस्त (NH, NHIDCL, लोनिवि, BRO)।

    बीएसएनएल को बेहतर संचार व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश।

    स्वास्थ्य विभाग डॉक्टरों की 15-15 दिन रोटेशन ड्यूटी, विशेषज्ञों की तैनाती और एयर एंबुलेंस की व्यवस्था।

    प्रशासन का संदेश स्पष्ट है।आस्था स्थलों की गरिमा सर्वोपरि है। यह फैसला श्रद्धा और व्यवस्था के बीच संतुलन बनाते हुए चारधाम यात्रा को अनुशासित और सुरक्षित बनाएगा।

  • States’ Startup Ecosystem Ranking 2025:- उत्तराखण्ड को ‘लीडर’ की मान्यता, राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा प्रदेश का मान।

    States’ Startup Ecosystem Ranking 2025:- उत्तराखण्ड को ‘लीडर’ की मान्यता, राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा प्रदेश का मान।

    देहरादून—   भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा जारी States’ Startup Ecosystem Ranking 2025 के पाँचवें संस्करण में उत्तराखण्ड ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

    मजबूत और प्रभावी स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने के लिए राज्य को ‘लीडर’ श्रेणी में स्थान दिया गया है। इस उपलब्धि पर राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड सरकार के उद्योग विभाग को प्रशंसा पत्र (Certificate of Appreciation) प्रदान किया गया।

    स्टार्टअप नीति की सफलता का प्रमाण–

    यह सम्मान उत्तराखण्ड की दूरदर्शी स्टार्टअप नीति और सरकार द्वारा किए गए निरंतर प्रयासों की पुष्टि करता है। राज्य में नवाचार को प्रोत्साहन, उद्यमिता के अवसर, निवेश-अनुकूल वातावरण और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए बनाई गई नीतियों ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। आज उत्तराखण्ड का स्टार्टअप मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर सराहना पा रहा है।

    मुख्यमंत्री धामी बोले – सामूहिक प्रयासों की जीत—

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि को प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि सरकार ने स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल नीतियां, सरल प्रक्रियाएं और मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया है। उन्होंने युवाओं की नवाचार क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार हर स्तर पर उन्हें सहयोग दे रही है। मुख्यमंत्री ने यह सम्मान प्रदेशवासियों, उद्यमियों और स्टार्टअप समुदाय को समर्पित करते हुए इसे सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया।

    राष्ट्रीय पहचान, निवेश को नई रफ्तार—

    उत्तराखण्ड को ‘लीडर’ के रूप में मिली यह मान्यता न केवल राज्य की साख को मजबूत करती है, बल्कि निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन की दिशा में भी नए अवसर खोलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि प्रदेश को स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है और अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल बनेगी।

  • उत्तराखंड ब्यूरोक्रेसी में बड़ा फेरबदल,,,IAS – PCS अफसरों के हुए तबादले।

    उत्तराखंड ब्यूरोक्रेसी में बड़ा फेरबदल,,,IAS – PCS अफसरों के हुए तबादले।

    देहरादून–—उत्तराखंड से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। शासन ने बड़े पैमाने पर आईएएस और पीसीएस अधिकारियों की तैनाती में बड़ा फेरबदल किया है।

    आदेश …

    उत्तराखंड शासन ने शनिवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), वित्त सेवा एवं प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) के अधिकारियों के व्यापक तबादले करते हुए राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-01 द्वारा जारी आदेशों के अनुसार सभी तबादले तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।

    IAS संवर्ग में अहम बदलाव–

    वर्ष 2001 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी आर. मीनाक्षी सुन्दरम से प्रमुख सचिव ऊर्जा, नियोजन सहित अन्य अतिरिक्त प्रभार हटाते हुए उन्हें प्रमुख सचिव आवास, आयुक्त आवास एवं मुख्य प्रशासक उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    IAS शैलेश बगौली को सचिव मुख्यमंत्री, गृह, कारागार और सूचना विभागों के दायित्वों से मुक्त करते हुए सचिव पेयजल नियुक्त किया गया है।

    IAS सचिन कुर्वे को नागरिक उड्डयन विभाग से हटाकर सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तथा आयुक्त स्वास्थ्य बनाया गया है।

    इसके अलावा सहकारिता, आयुष, खाद्य, नियोजन, सैनिक कल्याण, राज्य सम्पत्ति, आपदा प्रबंधन और सचिवालय प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी वरिष्ठ अधिकारियों के दायित्वों में फेरबदल किया गया है।

    PCS अधिकारियों के भी तबादले–

    राज्य सिविल सेवा के तहत कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं..

    अरविन्द कुमार पाण्डे – मुख्य विकास अधिकारी, नैनीताल

    दिनेश प्रताप सिंह – अधिशासी निदेशक, चीनी मिल डोईवाला

    अनिल कुमार शुक्ला – डिप्टी कलेक्टर, हरिद्वार

    दयानन्द – उप मेलाधिकारी, कुम्भ मेला हरिद्वार

    आकाश जोशी – डिप्टी कलेक्टर, पौड़ी

    राहुल शाह – डिप्टी कलेक्टर, उधम सिंह नगर
    संदीप कुमार – डिप्टी कलेक्टर, पौड़ी

    मंजीत सिंह गिल – उप मेलाधिकारी, कुम्भ मेला हरिद्वार

    ललित मोहन तिवारी – डिप्टी कलेक्टर, पिथौरागढ़

  • धामी कैबिनेट की बड़े फैसलों पर मुहर,,, यूसीसी संशोधन, उपनल कर्मियों को समान वेतन..।

    धामी कैबिनेट की बड़े फैसलों पर मुहर,,, यूसीसी संशोधन, उपनल कर्मियों को समान वेतन..।

    देहरादून—  उत्तराखंड सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में दो बड़े और अहम फैसलों पर मुहर लगी है।

    कैबिनेट ने एक तरफ समान नागरिक संहिता (UCC) अध्यादेश 2025 में संशोधन को मंजूरी दी है, वहीं 2015 से पहले नियुक्त उपनल कर्मियों को समान कार्य–समान वेतन देने का फैसला किया गया है।

    इन फैसलों को सरकार के अहम नीतिगत निर्णयों में माना जा रहा है। उपनल कर्मियों से जुड़ा निर्णय लंबे समय से लंबित मांग से जुड़ा था, जबकि UCC अध्यादेश में संशोधन को लेकर भी कैबिनेट स्तर पर स्पष्ट रुख अपनाया गया है।

    करीब ढाई घंटे चली इस कैबिनेट बैठक में कुल 19 प्रस्तावों पर चर्चा की गई, जिनमें कर्मचारियों, न्यायिक व्यवस्था, इन्फ्रास्ट्रक्चर, विधानसभा सत्र और पर्यटन से जुड़े फैसले शामिल हैं।

    प्रमुख बड़े फैसले—

    उपनल कर्मचारी को लेकर मंत्रिमंडल की बैठक में विस्तृत रूप से चर्चा की गई। साथ ही उपनल कर्मचारी के हक में निर्णय लिया गया है। बैठक में समान कार्य समान वेतन पर बनी सहमति बनी है, जिसका लाभ कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से मिलेगा। पहले चरण में 7000 से अधिक उपनल कर्मचारियों को उसका लाभ मिलेगा।

    गन्ना एवं चीनी उद्योग विभाग के तहत चीनी मिल बैंकों से ले सकेंगे ऋण, सरकार लेंगी गारंटी

    निर्वाचन विभाग में वरिष्ठ निजी सचिव, निजी सचिव, सचिव के लिए नई सेवा नियमावली बनाई गई

     

    संस्कृत शिक्षा विभाग उत्तराखंड संस्कृत संस्थाओं किया गया है
    विज्ञान प्रतियोघीकी विभाग के तहत अल्मोड़ा और चंपावत के लिए 6-6 पद की स्वीकृति दी गई

     

    ऊर्जा विभाग में 2024-25 एनुअल फाइनेंशियल रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखने की सहमति बनी

    बागवानी मिशन के अंतर्गत NT हैलेट राज्य सहायता 25%
    दून विश्वविद्यालय, हिंदू अध्ययन केंद्र के लिए 6 पद सृजित किए गए हैं

    सैनिक कल्याण विभाग में पूर्व में उपनल कार्मिकों की प्रथम चरण में 2015 से 7 हजार तक समान कार्य समान वेतन

     

    न्याय विभाग के तहत विशेष न्यायालय बनाने को लेकर प्रथम चरण में 16 विशेष न्यायालय बनाए जाएंगे 144 पद सृजित किए जाएंगे, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, उधम सिंह नगर में बनाए जाएंगे।

    उत्तराखंड की पंचम विधानसभा सत्र सहित करने मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है

     

    युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल में खेल महाकुंभ में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में इस विधायक स्तर पर ट्रॉफी और 1 लाख की धनराशि दी जाएगी, संसदीय स्तर पर 2 लाख की धनराशि दी जाएगी, राज्य स्तर पर ₹5 लाख की धनराशि दी जाएगी

     

    ग्रह विभाग की नियमावली में किया संशोधन—

    UCC में संशोधन को मंजूरी
    न्यूनतम अपर सचिव लेवल के अधिकारी बनाने का निर्णय लिया गया है, सब रजिस्टार को अपील का भी अधिकार दिया गया है
    पर्यटन विभाग के तहत होम स्टे रोजाना को लेकर स्थानीय निवासी को लाभ देने की व्यवस्था की गई है, पहले ऐसा नहीं था, GST में रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा

    पर्यटन विभाग में गोबर के उपला और चीड़ की पत्तियों को 50-50% मिक्स करके नगर पालिका द्वारा टेकओवर किया जाएगा।

  • धामी कैबिनेट की अहम बैठक आज,,,, बड़े फैसलों पर लग सकती है मुहर।

    धामी कैबिनेट की अहम बैठक आज,,,, बड़े फैसलों पर लग सकती है मुहर।

    देहरादून—-  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज गुरुवार को राज्य सचिवालय में उत्तराखंड कैबिनेट की अहम बैठक आयोजित की जाएगी।

    बैठक को लेकर शासन-प्रशासन पूरी तरह तैयार है और इसमें प्रदेश हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है।

    सूत्रों के मुताबिक बैठक में पर्यटन, स्वास्थ्य, शहरी विकास, शिक्षा, लोक निर्माण, ग्रामीण विकास और ऊर्जा जैसे प्रमुख विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। साथ ही चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा और नई योजनाओं को मंजूरी देने पर भी चर्चा होगी।

    पर्यटन को मिल सकता है नया विस्तार—

    चारधाम यात्रा, शीतकालीन और साहसिक पर्यटन, होमस्टे योजनाओं के विस्तार के साथ-साथ पर्यटन ढांचे को मजबूत करने से जुड़े प्रस्तावों पर कैबिनेट की मुहर लग सकती है।

    स्वास्थ्य और शिक्षा पर फोकस—

    सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं के विस्तार, नए चिकित्सा पदों के सृजन, मेडिकल कॉलेजों और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने पर अहम फैसले संभव हैं। वहीं शिक्षा क्षेत्र में नए विद्यालय-कॉलेज, शिक्षक भर्ती और गुणवत्ता सुधार से जुड़े प्रस्तावों पर निर्णय लिए जा सकते हैं।

    शहरी विकास, बुनियादी ढांचे और जनकल्याण से जुड़े निर्णयों के जरिए सरकार विकास कार्यों को गति देने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

    कुल मिलाकर,   धामी कैबिनेट की यह बैठक प्रदेश के विकास एजेंडे के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • एसआईटी ने उर्मिला सनावर से 6 घंटे की पूछताछ,,,, बोलीं ,सारे सबूत सौंपे।

    एसआईटी ने उर्मिला सनावर से 6 घंटे की पूछताछ,,,, बोलीं ,सारे सबूत सौंपे।

    देहरादून—   अंकिता भंडारी प्रकरण की जांच के सिलसिले में गुरुवार को विशेष जांच दल (SIT) ने एक्ट्रेस उर्मिला सनावर से करीब छह घंटे तक गहन पूछताछ की।

    एसआईटी की टीम दोपहर करीब डेढ़ बजे उर्मिला को हरिद्वार स्थित एसओजी कार्यालय लेकर पहुंची थी, जहां शाम साढ़े छह बजे तक उनसे पूछताछ की गई। इसके बाद करीब पौने सात बजे उन्हें जाने की अनुमति दे दी गई।

    पूछताछ के बाद पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। हालांकि, उर्मिला के वकील ने जांच में पूर्ण सहयोग की बात कही है। इससे पहले बुधवार को उर्मिला देहरादून पहुंची थीं, जहां उनसे प्रारंभिक पूछताछ की गई थी।

    हरिद्वार SOG कार्यालय में हुई गहन पूछताछ–

    गुरुवार को एसआईटी प्रमुख और हरिद्वार के एसपी सिटी अभय सिंह के नेतृत्व में उर्मिला सनावर से पूछताछ की गई। इस दौरान अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े सबूतों, ऑडियो-वीडियो और अन्य तथ्यों को लेकर जानकारी जुटाई गई। पूछताछ में सीओ लक्सर नताशा सिंह और एसपी देहात शेखर चंद सुयाल सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

    सूत्रों के अनुसार, पहले विभिन्न थानों से जुड़े अधिकारियों ने अलग-अलग बिंदुओं पर सवाल किए, जिसके बाद एसआईटी अधिकारियों ने मामले से संबंधित तथ्यों को विस्तार से खंगाला। हालांकि पूछताछ की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    वकील का बयान – जांच में पूरा सहयोग—

    उर्मिला के अधिवक्ता अंकुज कुमार ने मीडिया को बताया कि उनसे की गई पूछताछ जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उर्मिला पर लगाए गए अधिकांश आरोप जमानती हैं, जिनमें गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है। कानून सभी के लिए समान है और पूरे मामले में विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि रानीपुर कोतवाली में दर्ज मामलों, जिनमें उर्मिला के खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी हुए हैं, उनका निपटारा भी कानून के अनुसार किया जाएगा। उर्मिला की ओर से जांच में हर स्तर पर सहयोग किया जा रहा है और उनके पास मौजूद सभी साक्ष्य एसआईटी को उपलब्ध कराए जा चुके हैं।

    हरिद्वार जिले में दर्ज हैं चार मुकदमे—

    उर्मिला सनावर के खिलाफ हरिद्वार जिले में कुल चार मुकदमे दर्ज हैं। इनमें ज्वालापुर और रानीपुर कोतवाली में पहले से दर्ज दो मामले शामिल हैं। इसके अलावा अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े ऑडियो-वीडियो वायरल होने के बाद बहादराबाद और झबरेड़ा थाने में भी दो नए मुकदमे दर्ज किए गए थे।

    इन सभी मामलों की जांच के लिए हरिद्वार के एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल के निर्देश पर एसपी सिटी अभय सिंह के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है। नौ दिनों तक सामने न आने के बाद उर्मिला बुधवार को देहरादून पहुंची थीं, जिसके बाद जांच तेज हुई।

    “अंकिता पूरे देश की बेटी, उसे न्याय दिलाकर रहूंगी”

    पूछताछ के बाद उर्मिला सनावर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है और उनके पास मौजूद सभी जरूरी सबूत एसआईटी को सौंप दिए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके बारे में यह कहना कि वह अपने रुख से बदल गई हैं, पूरी तरह गलत है।

    उर्मिला ने कहा,“अंकिता भंडारी पूरे देश की बेटी है। मैं उसे न्याय दिलाकर रहूंगी।” उन्होंने बताया कि कुछ सबूतों को सुरक्षित रखना जरूरी था, जिसे लेकर उन्होंने एसआईटी के सभी सवालों के जवाब दिए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है और वह शुक्रवार को कोर्ट में अपना मोबाइल भी जमा करेंगी।

  • नशामुक्ति केन्द्र, तपस्थली द्वारा उडाई जा रही नियमों की धज्जियां।

    नशामुक्ति केन्द्र, तपस्थली द्वारा उडाई जा रही नियमों की धज्जियां।

    देहरादून—  उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल एवं माननीय जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून  प्रेम सिंह खिमाल जी के निर्देशानुसार आज दिनांक 08 जनवरी 2026 को सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून श्रीमती सीमा डुँगराकोटी द्वारा तपस्थली कॉउन्सिलिंग पुनर्वास एवं नशामुक्ति केन्द्र (Tapasthali Counselling Rehabilitation and De-Addiction Centre) रांझावाला रोड, निकट सेन्ट्रल बैंक, डी०एन०एस० कॉम्प्लेक्स, रायपुर, देहरादून का संयुक्त औचक निरीक्षण किया गया,

    जिसमें  प्रदीप राणा, डिप्टी मुख्य चिकित्साधिकारी, देहरादून, डॉक्टर विनय शर्मा, मनोचिकित्सक, राज्य मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, सेलाकुई,  प्रशांत लैब टेक्निशियन, सी०एस०सी० सहसपुर और ए०एन०टी०एफ० की टीम से उपनिरीक्षक सुश्री प्रेरणा चौधरी एवं आरक्षी मोहित राठी उपस्थित रहें।

    नशामुक्ति केन्द्र में प्रवेश करते ही वहां के संचालक श्रेष्ठ पुण्डीर मिलें। उनके द्वारा बताया गया कि नशामुक्ति केन्द्र का रजिस्ट्रेशन उनके और लक्की राम के नाम पर है।

    उक्त नशामुक्ति केन्द्र का निरीक्षण दो घंटे से अधिक चला, किन्तु संचालक लक्की राम बार-बार बुलाने पर भी उपस्थित नहीं हुए और ए०एन०टी०एफ० टीम द्वारा बताया गया कि पूर्व में उनके द्वारा इसी नशामुक्ति केन्द्र का दो-तीन बार निरीक्षण किया गया था, किन्तु संचालक लक्की राम अनुपस्थित पाये गए। उसके बाद नशामुक्ति केन्द्र का रजिस्ट्रेशन प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गए, किन्तु श्रेष्ठ पुण्डीर द्वारा जो रजिस्ट्रेशन प्रस्तुत किया गया, उसमें मात्र एक ही संचालक लक्की राम का नाम दर्ज है और वह दिनांक 05.12.2024 तक ही वैध था।

    निरीक्षण टीम द्वारा रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण के सम्बंध में पूछताछ की गयी, जो संचालक द्वारा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। संचालक द्वारा बताया गया कि उनके नशामुक्ति केन्द्र में वर्तमान में 35 मरीज निवासरत है।

    नशामुक्ति केन्द्र में वहां उपस्थित सभी नशे से ग्रसित मरीजों से बातचीत कर उनकी कॉउन्सिलिंग की गयी। सभी से उनकी समस्याओं के बारे में भी पूछताछ की गयी। साथ ही नशामुक्ति केन्द्र में उनके दैनिक दिनचर्या, खान-पान, उपचार आदि के बारे में भी जानकारी ली गयी।

    नशामुक्ति केन्द्र में बुनियादी आवश्यकताएं जैसे मनोचिकित्सक, कॉउन्सलर, मेडिकल ऑफिसर, स्टॉफ नर्स, योगा प्रशिक्षक, ऑक्सीजन सिलेन्डर, लैब आदि नहीं पाए गये और न ही उनके सम्बंध में कोई संतोषजनक जवाब उका नशामुक्ति केन्द्र द्वारा निरीक्षण टीम को दिया गया। मरीजों के रिकॉर्ड भी पूर्ण नहीं मिली, कई दाखिले फॉर्म में अभिभावक के सहमति पत्र नहीं मिले।

    अधिकतर मरीज स्थानीय निवासी है. कुछ ही बाहर के राज्यों के मरीज भी पाये गए। निरीक्षण में पाया गया कि अनेक मरीज 06 माह से अधिक का समय होने पर भी नशामुक्ति केन्द्र में इलाज करा रहे है और वहीं स्टॉफ की तरह कार्य भी कर रहें है। नशामुक्ति केन्द्र में कोई भी बाहरी वेतन पर कर्मचारी नियुका नहीं मिला।

    सभी कर्मचारी/स्टॉफ पूर्व के इलाजरत मरीज पाये गए, जिनके द्वारा खाना बनाना, साफ-सफाई, नशे पर क्लासेस, योगा सिखाना आदि कार्य किये जाते हैं। अनेक मरीजों द्वारा बताया गया कि उनका उनके परिजनो या घरवालों से नियमित बातचीत भी नहीं हो पाती है. जिसपर निरीक्षण टीम द्वारा एक मरीज की उसकी मां से तत्काल बातचीत कराई गयी।

    संचालक श्रेष्ठ पुण्डीर द्वारा बताया गया कि उनका नशामुक्ति केन्द्र किराये पर है, किन्तु उनके द्वारा किरायानामा और अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किये गए और न ही कोई संतोषजनक जवाब निरीक्षण टीम को दिया गया। साथ ही नशामुक्ति केन्द्र में मौजूद व्यक्तियों का पुलिस सत्यापन भी नहीं पाया गया।

    ए०एन०टी०एफ० टीम द्वारा बताया गया कि उक्त नशामुक्ति केन्द्र में नियमों की अनदेखी पर पूर्व में दो बार पुलिस अधिनियम की धारा 83 के तहत चालान किया गया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गए थे, किन्तु आज दिन तक उन निर्देशों का अनुपालन नहीं किया गया और आज मिले गंभीर अनियमितताओं के मद्देनजर आज भी अधिक से अधिक चालान किया गया है।

    तपस्थली में दर्शित उक्त गंभीर अनियमितताओं पर सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून श्रीमती सीमा डुँगराकोटी द्वारा  जिलाधिकारी देहरादून को रांझावाला रोड, निकट सेन्ट्रल बैंक, डी०एन०एस० कॉम्प्लेक्स, रायपुर देहरादून स्थित तपस्थली कॉउन्सिलिंग पुनर्वास एवं नशामुक्ति केन्द्र (Tapasthali Counselling Rehabilitation and De-Addiction Centre) पर आवश्यक एवं कड़ी कार्यवाही करने की मांग कर रिपोर्ट प्रेषित की गई है।

  • उत्तराखंड की बेटी अंकिता को न्याय, सरकार का संकल्प,,, माता-पिता की भावना सर्वोपरि :- सीएम धामी

    उत्तराखंड की बेटी अंकिता को न्याय, सरकार का संकल्प,,, माता-पिता की भावना सर्वोपरि :- सीएम धामी

    देहरादून–  अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि राज्य सरकार अंकिता को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

    सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहा है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले, और इसके परिणामस्वरूप तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस जघन्य अपराध की निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए महिला अधिकारी रेणुका देवी की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था।

    एसआईटी ने मामले के हर पहलू की गहराई से जांच की और सरकार की सशक्त व प्रभावी न्यायालयीय पैरवी के चलते आरोपियों को कठोरतम सजा मिली। उन्होंने बताया कि न केवल निचली अदालत, बल्कि माननीय उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने भी एसआईटी की जांच पर संतोष व्यक्त किया है, जो जांच की निष्पक्षता और मजबूती को दर्शाता है।

    सीएम धामी ने कहा कि वर्तमान में एक कथित वायरल ऑडियो के आधार पर प्रदेश में अनावश्यक भ्रम और माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि न्यायिक प्रक्रिया अपने निष्कर्ष तक पहुंच चुकी है और दोषियों को सजा मिल चुकी है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी ऑडियो या नए आरोप पर आगे बढ़ने से पहले उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस महिला का नाम ऑडियो से जोड़ा जा रहा है, वह बार-बार अलग-अलग नामों से सामने आ रही है, ऐसे में जांच एजेंसियों को तथ्यों और ठोस सबूतों के आधार पर ही आगे बढ़ना चाहिए।

    सीबीआई जांच के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की जनता की भावनाएं पूरी तरह से अंकिता के साथ हैं, लेकिन इस त्रासदी से सबसे अधिक प्रभावित उसके माता-पिता हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं अंकिता के माता-पिता से बातचीत करेंगे और उनकी भावनाओं, पीड़ा और अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में बने भ्रम और पीड़ा के माहौल से पूरी तरह अवगत है। “जिस परिवार ने अपनी बेटी को खोया है, वह केवल एक परिवार नहीं, बल्कि पूरा उत्तराखंड उसका परिवार है।

    अंकिता हमारी भी बेटी थी,” यह कहते हुए मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार इस दर्द को पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ समझती है।

    उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी भी स्तर पर किसी भी प्रकार की अतिरिक्त जांच की आवश्यकता महसूस होती है, तो राज्य सरकार हर तरह की जांच के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार किसी जांच से पीछे हटने वाली नहीं है और न्याय से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

    पूर्व के एक बड़े छात्र-हित से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब लंबे समय तक अविश्वास की स्थिति बनी रही थी, तब सरकार ने बिना किसी दबाव के सीबीआई जांच की संस्तुति की थी, समिति गठित की गई थी और आवश्यकता पड़ने पर परीक्षा तक रद्द की गई थी। “तब भी सरकार की प्राथमिकता न्याय थी और आज भी न्याय ही है,” उन्होंने कहा।

    मुख्यमंत्री ने दोहराया कि अंकिता प्रकरण में सरकार ने शुरू से यह सुनिश्चित किया कि आरोपियों को किसी भी सूरत में राहत न मिले। तीनों आरोपी एक भी दिन जेल से बाहर नहीं आ पाए और आज उन्हें उम्रकैद की सजा मिल चुकी है, जो इस बात का प्रमाण है कि सरकार ने बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई की।

    वायरल ऑडियो के आधार पर नाम उछाले जाने पर मुख्यमंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि इससे राज्य में भ्रम और अविश्वास का माहौल बनाया जा रहा है।

    उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कुछ लोग बेटी अंकिता के नाम पर राजनीति कर उसकी आत्मा को बार-बार आहत करने का प्रयास कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनके संबंध में पुलिस द्वारा तथ्यों का सत्यापन कर लिया गया है। सोशल मीडिया अकाउंट, यात्रा रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि संबंधित व्यक्ति उस समय उत्तराखंड में मौजूद ही नहीं थे।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि यदि किसी के पास ठोस और प्रमाणिक सबूत हैं तो वे सामने आएं। सरकार और पुलिस लगातार संपर्क में हैं और जो भी दोषी होगा, वह किसी भी हाल में बचेगा नहीं।

    अंत में मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और न्याय के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।