Category: हल्द्वानी

  • कांग्रेस शुरू से ही उडाती आयी हैं देश के संविधान का मजाक:- अजय भट्ट

    कांग्रेस शुरू से ही उडाती आयी हैं देश के संविधान का मजाक:- अजय भट्ट

    हल्द्वानी—  भाजपा कुमाऊं संभाग कार्यालय हल्द्वानी में आयोजित प्रेस वार्ता में नैनीताल उद्यमसिंह नगर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अजय भट्ट ने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही देश के संविधान से खिलवाड़ को अपना मौलिक अधिकार समझती रही हैं। कांग्रेस ने तो पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जमाने से ही संविधान का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया था, जो आज तक रुका नहीं है।

     

     

    संविधान में समय और आवश्यकता के अनुसार परिवर्तन करना भी भारतीय संविधान का ही हिस्सा है। संविधान के अनुच्छेद 368 में ही इसमें संशोधन की भी व्यवस्था भी की गई है और संविधान लागू होने के बाद से अबतक 106 बार संविधान संशोधन हो चुके हैं।

     

     

    लेकिन, सवाल इसलिए उठता है कि कई बार हुए संविधान में बदलाव का मकसद पूरी तरह से राजनीतिक समझा गया है। कई बार तो इस तरह के संशोधन हुए हैं, जिसमें संविधान की आत्मा को ही पूरी तरह से बदलने के गंभीर आरोप लगते हैं।

     

     

    असल में कांग्रेस के शासनकाल में ही 80 बार देश का संविधान बदला जा चुका है। भारतीय गणतंत्र के पहले 14 वर्षों में ही देश का संविधान 17 बार बदल दिया गया था। यह कार्यकाल कांग्रेस नेता और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का था।

     

     

    नेहरू की बेटी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पहले से ही 42वें संविधान संशोधन के लिए कुख्यात हैं। इसमें इतने सारे बदलाव किए गए थे कि इसे ‘छोटा संविधान’ ही कहा जाने लगा।

     

     

    भारतीय संविधान के 74 वर्षों के इतिहास में यही ऐसा एकमात्र संशोधन है, जिसमें संविधान की प्रस्तावना के साथ भी ‘छेड़छाड़’ किया गया। इसी संशोधन के माध्यम से प्रस्तावना में ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ जैसे शब्द जोड़े गए।

     

     

    जबकि, संविधान निर्माताओं ने कभी इसकी आवश्यकता महसूस नहीं की थी। इंदिरा गांधी के शासनकाल में 40 बार से ज्यादा संविधान को बदलने का प्रयास हुआ। इंदिरा गांधी के दुखद निधन के साथ ही सत्ता की बागडोर अचानक उनके बड़े बेटे राजीव गांधी को सौंप दी गई। उनके कार्यकाल में भी कम से कम 11 बार संविधान में संशोधन किया गया।

     

     

    कुख्यात शाह बानो केस में सर्वोच्च अदालत का फैसला पलटना भी उनके कार्यकाल के इतिहास में दर्ज है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी संविधान की कॉपी लेकर लोकसभा चुनावों के समय से चल रहे थे।

     

     

    चुनाव के परिणाम आने के बाद भी वह संविधान की कॉपी साथ में रख रहे हैं और उसकी ‘रक्षा’ करने के दावे करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।

     

     

    जबकि, हकीकत ये है कि उनके कांग्रेस सांसद रहते हुए भी मनमोहन सिंह के दोनों कार्यकालों में कम से कम 7 बार संविधान संशोधन हुए। इस दौरान वे खुद कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे और बाकी समय उनकी मां सोनिया गांधी के पास पार्टी की कमान रही। कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ बाकी संविधान संशोधन उस दौर का है, जब पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे।

     

    आज संविधान का राग अलापने वाली कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करने की जगह मई 1951 में ही संवैधानिक संशोधन करके, नागरिकों के ‘Freedom of Speech and Expression’ को कुचल दिया। देश में पहला आम चुनाव भी नहीं हुआ था।

     

    कांग्रेस के पास कोई जनादेश नहीं था। लेकिन हड़बड़ी में पहला संविधान संशोधन कर दिया गया, जिससे आलोचकों को चुप किया जा सके और अभिव्यक्ति की आज़ादी को कुचला जा सके।

     

     

    हम सभी जानते हैं कि संविधान निर्माण में, बाबा साहेब अंबेडकर की ‘अग्रणी भूमिका थी। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं, कि संविधान लागू होने के बाद कांग्रेस सरकार द्वारा मौलिक अधिकारों को कमजोर करने के प्रयासों के खिलाफ बाबा साहेब हमेशा लड़ते रहे थे।

     

     

    जब कांग्रेस सरकार ने 1954 में संविधान में चौथा संशोधन लाकर मौलिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश की, तो बाबासाहेब आंबेडकर ने इसके खिलाफ कहा थाः “”मुझे यह कहते हुए खेद है कि मौलिक अधिकारों के साथ इस तरह का व्यवहार करना, मानो उनका कोई महत्व ही न हो, कि उन्हें किसी भी समय बहुमत की सुविधा या पार्टी प्रमुख की इच्छा के अनुसार कुचला जा सकता है, एक ऐसा रवैया है जो भविष्य में आसानी से कुछ खतरनाक परिणामों को जन्म दे सकता है। और इसलिए मुझे बहुत खेद है कि इस तरह के मामले को भी, अर्थात् मौलिक अधिकारों के उल्लंघन या उनसे विचलन को, सत्ता में पार्टी द्वारा इस तरह से माना जा रहा है जैसे कि यह कोई महत्वपूर्ण मामला ही न हो।”

     

     

    साल 1975 में हुए 38वें संविधान संशोधन से आपातकाल लगाने के निर्णय को ‘Non-Justiciable’ बनाने की कोशिश की गई। Election Law Amendment Bill लाया गया, जिसका एकमात्र उद्देश्य उन सभी Electroral Malpractices को ‘Immunity’ देना था, जिनके कारण श्रीमती इंदिरा गांधी के चुनाव को चुनौती दी गई थी।

     

     

    इसका मतलब यह था, कि सबसे जघन्य अपराध करने वाला व्यक्ति भी, अगर एक दिन के लिए भी संवैधानिक पद पर बैठ जाए तो उसके सभी अपराध माफ।

     

     

    संवैधानिक शक्तियों का दुरुपयोग यहीं नहीं रुका। 28 अगस्त 1976 को, 42वां संविधान संशोधन पेश किया गया था, जिसमें प्रावधान था कि किसी भी कानून की संवैधानिकता केवल सात न्यायाधीशों द्वारा ही तय की जा सकती है, और किसी भी कानून को केवल दो-तिहाई बहुमत से ही रद्द किया जा सकता है। क्या यह सब एक तानाशाह द्वारा अपने निजी स्वार्थ के लिए संविधान को विकृत करने का भरसक प्रयास नहीं था?

     

     

    एक निंदनीय संशोधन जो अंततः Lapse हो गया, वह था 1976 में किया गया 41वां संवैधानिक संशोधन विधेयक। इस संशोधन का उद्देश्य प्रधानमंत्री, राज्यपालों और राष्ट्रपति को पद ग्रहण करने से पहले और उनके कार्यकाल के दौरान किए गए सभी कार्यों के लिए आपराधिक मुक़दमे से Immunity प्रदान करना था।

     

     

    “Basic Structure” के सिद्धांत को नकारने के लिए, 42वें संविधान संशोधन के द्वारा यह प्रावधान किया गया था, कि ‘Article 368’ के तहत किया गया प्रत्येक संवैधानिक संशोधन वैध होगा।

     

     

    जैसा कि आप जानते है कि आर्टिकल 368 के माध्यम से संविधान में संशोधन की व्यवस्था दी गयी है। संशोधन में लोकसभा का कार्यकाल भी बढ़ाकर छह (6) साल कर दिया गया। क्या यह पूरे संविधान को एक तानाशाह के उद्देश्यों की पूर्ति का एक माध्यम मात्र बनाने का षड्यन्त्र नहीं था? क्या यह सब जनता को फिर से प्रजा बनाने की साजिश नहीं थी? आज उसी पार्टी के लोग संविधान का इस्तेमाल दुष्प्रचार के लिए कर रहे हैं।

     

     

    हमारा संविधान, आपातकाल और भ्रष्ट सरकारों के सामने भी मजबूती से खड़ा रहा है। हमारे संविधान में समय के साथ कई संशोधन हुए हैं। लेकिन संविधान की मूल भावना आज भी बनी हुई है। यह हमेशा बनी रहेगी।

     

     

    कांग्रेस चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन हम कभी भी संविधान के मूल चरित्र को बदलने नहीं देंगे। आप इतिहास देखें, हमने आपातकाल के काले दिनों में भी संविधान के मूल चरित्र को चोट पहुंचाने के हर प्रयास का मजबूती के साथ विरोध किया था। लाखों की संख्या में संविधान के सिपाहियों ने जेल की यातनाएं सही। लाखों लोग इन यातनाओं का भुक्तभोगी रहे है।

     

     

    कांग्रेस ने न कभी संविधान, न संवैधानिक मूल्यों, न संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान किया है। कांग्रेस के नेताओं ने हमेशा ‘Personal Interest’ को ‘Constitutional Values’ और ‘Institutional Dignity’ के ऊपर रखा है। ये एक ‘Documented fact’ है कि 1973 में तीन ‘Senior Most Judges’ को ‘Supersede’ करने के फैसले से तत्कालीन राष्ट्रपति श्री वी. वी. गिरी सहमत नहीं थे। पर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपनी जिद, हठ और राजनैतिक दंभ के कारण राष्ट्रपति के पद का भी सम्मान नहीं किया। आज संविधान के तथाकथित हितैषी ये भूल जाते हैं, कि श्रीमती इंदिरा गांधी ने पचास बार Article 356 का दुरुपयोग करके, चुनी हुई सरकारों को गिराने का कार्य किया था।

     

     

    आप याद कीजिए शाहबानो केस जो कि भारत में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के लिए यह एक ऐतिहासिक निर्णय था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तलाकशुदा महिला शाहबानो के पक्ष में फ़ैसला सुनाया था। इस फ़ैसले के ज़रिए, सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा था कि मुस्लिम महिलाएं भी गुज़ारा भत्ता पाने की हकदार हैं।

     

     

    लेकिन तुष्टीकरण के रास्ते चलते हुए तत्कालीन काँग्रेस सरकार ने कानून बनाकर इस जजमेंट को पलट दिया। इस लिए जब काँग्रेस के लोग जो हमेशा तुष्टीकरण की राजनीति करते आए हैं, वे जब “मोहब्बत की दुकान” की बात करते हैं, तो हंसी आती है।

     

     

    अजय भट्ट ने कहा कांग्रेसी शासन मनमाने तरीके से राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए भी कुख्यात रहा है। आंकड़े बताते हैं कि आजादी के बाद अलग-अलग राज्यों में अब तक सौ से अधिक बार राष्ट्रपति शासन कांग्रेस या उसके सहयोग से बनी सरकारों के दौरान लगे हैं। इमरजेंसी वाली इंदिरा इस मामले में भी सबसे आगे रही थीं, जिनके शासनकाल के दौरान कुल 50 बार राष्ट्रपति शासन लगाए गए थे।

     

     

    अजय भट्ट ने कहा कि हमारे समय पर 2003 में जब श्रद्धेय अटल जी प्रधानमंत्री थे तब हमने सुशासन को मजबूत करने के लिए 91 वें संशोधन से ‘Minimum Government and Maximum Governance’ की भावना से मंत्रि-परिषद के आकार को सीमित कर दिया। इस संशोधन ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत जरूरी बदलाव किये ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम कसी जा सके। और राजनीतिक स्थिरता को बढ़ावा मिले।

     

     

    सौ बात की एक बात जब भी कांग्रेस के नेताओं को सत्ता और संविधान में से एक को चुनना था, उन्होंने हमेशा सत्ता को चुना।

     

     

    75 वर्षों के बाद, आज हमें अपने संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर से दोहराना चाहिए। भारत का संविधान भारतवासियों की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए, उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए, एक सशक्त माध्यम साबित हुआ है।

     

     

    पत्रकार वार्ता के दौरान जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट , मेयर हल्द्वानी गजराज सिंह बिष्ट , प्रदेश मीडिया प्रभारी चंदन बिष्ट , महामंत्री रंजन बर्गली, नवीन भट्ट , मौजूद रहे ।

  • महापौर गजराज बिष्ट से दमुवाढुंगा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि ने मिलकर सौपा ज्ञापन, रक्खी यह मांग,,,,,

    महापौर गजराज बिष्ट से दमुवाढुंगा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि ने मिलकर सौपा ज्ञापन, रक्खी यह मांग,,,,,

    हल्द्वानी/काठगोदाम—   आज नगर निगम कार्यालय में महापौर गजराज बिष्ट से दमुवाढुंगा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि ने मिलकर ज्ञापन दिया

     

    क्षेत्रवासियों द्वारा कहा गया कि क्षेत्र को चल रही 125 करोड़ की योजना का लाभ मिल रहा हैं, कार्य और त्वरित गति से कार्य हो सके , उसके लिये भवन कर लगाने की मांग की गई है।

     

    महापौर बिष्ट ने कहा , कि  क्षेत्रवासियों द्वारा यह पहल एक सराहनीय कदम है। इस विषय में विधि सलाह लेकर आगामी बोर्ड बैठक में लाकर कार्यवाही की जायेगी।

     

    ज्ञापन देने वालों में पूर्व प्रधान महेश जोशी,विजय कुमार(पप्पू प्रधान),हृदयेश कुमार,कैलाश चन्द्र,पन राम,भुवन आर्य,भरत वलदिया,पंकज अधिकारी,गोधन बिष्ट,दीपक कुमार समेत बहुत से क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

  • हल्द्वानी गौजलाली क्षेत्र में नकली ड्रिंक फैक्ट्री का भंडाफोड़, बच्चों की सेहत से हो रहा था खिलवाड़….

    हल्द्वानी गौजलाली क्षेत्र में नकली ड्रिंक फैक्ट्री का भंडाफोड़, बच्चों की सेहत से हो रहा था खिलवाड़….

    हल्द्वानी – गौजलाली क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया जब एसडीएम राहुल शाह और नगर आयुक्त ऋचा सिंह ने एक गुप्त सूचना के आधार पर एक नकली रसना और छोटे बच्चों के लिए ड्रिंक बनाने वाली अवैध फैक्ट्री पर छापा मारा। फैक्ट्री से भारी मात्रा में नकली पेय पदार्थ, पैकिंग के लिए उपयोग की जाने वाली पॉलिथीन और हानिकारक केमिकल बरामद किए गए।

    इस फैक्ट्री में तैयार किए जा रहे नकली ड्रिंक्स में इस्तेमाल होने वाला केमिकल बच्चों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक पाया गया है। मौके पर जब अधिकारी पहुंचे, तो अवैध तरीके से यह उत्पादन और पैकिंग का सिलसिला जारी था। एसडीएम राहुल शाह ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और फैक्ट्री संचालकों के दस्तावेजों और सत्यापन की भी जांच कराई जा रही है।

    नगर आयुक्त ऋचा सिंह ने कहा कि इस तरह की अवैध गतिविधियों से न केवल कानून का उल्लंघन हो रहा है बल्कि मासूम बच्चों की जान भी खतरे में डाली जा रही है। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए फैक्ट्री को सील कर दिया है और आगे की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह के कृत्यों पर रोक लगाई जा सके।

  • एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा के निर्देश पर जनपद नैनीताल में अपराधों के खिलाफ अभियान तेज….

    एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा के निर्देश पर जनपद नैनीताल में अपराधों के खिलाफ अभियान तेज….

    हल्द्वानी – वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जनपद नैनीताल, प्रहलाद नारायण मीणा द्वारा जनपद में अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाए जाने हेतु निरंतर सत्यापन अभियान चलाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक नगर हल्द्वानी प्रकाश चंद्र के निर्देशन एवं क्षेत्राधिकारी हल्द्वानी नितिन लोहनी, लालकुआं दीपशिखा के पर्यवेक्षण में, थानाध्यक्ष वनभूलपुरा नीरज भाकुनी के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा थाना क्षेत्र अंतर्गत वनभूलपुरा क्षेत्र में सघन सत्यापन अभियान चलाया गया।

    अभियान के दौरान किरायेदारों, श्रमिकों, चौकीदारों एवं घरेलू नौकरों का सत्यापन न कराने पर कुल 17 व्यक्तियों के विरुद्ध पुलिस अधिनियम के अंतर्गत चालानी  कार्यवाही कर  2,500 रुपए जुर्माना जमा करवाया गया। तथा पहचान एप के माध्यम से सत्यापन भी कराया गया। साथ ही, 83 पुलिस अधिनियम के अंतर्गत 7 मकान मालिकों द्वारा किरायेदारों का सत्यापन न कराए जाने पर उनके विरुद्ध चालानी कार्यवाही करते हुए 10-10 हज़ार रुपये कुल 70,000 रुपए का जुर्माना कर संबंधित रिपोर्ट माननीय न्यायालय प्रेषित की गई है।

     पुलिस द्वारा क्षेत्र में निरंतर सत्यापन अभियान जारी है ।

     अपील 

    जनपद नैनीताल पुलिस आमजन से अपील करती है कि सुरक्षा के दृष्टिगत अपने किरायेदारों, कर्मचारियों, घरेलू सहायकों आदि का अनिवार्य रूप से पुलिस सत्यापन कराएं। सत्यापन न कराए जाने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध विधि सम्मत कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

  • नकली जूस बनाने वाली फैक्टरी पकड़ी,  बड़ी मात्रा में खतरनाक रसायन बरामद।

    नकली जूस बनाने वाली फैक्टरी पकड़ी, बड़ी मात्रा में खतरनाक रसायन बरामद।

    हल्द्वानी—   गौजाजाली क्षेत्र के एक आवासीय इलाके में अवैध जूस पाउच निर्माण करने की शिकायत मिलने पर हल्द्वानी के एसडीएम राहुल शाह एवं नगर आयुक्त ऋचा सिंह के नेतृत्व में अचानक निरीक्षण किया गया।

     

     

    निरीक्षण में यह पाया गया कि मेरठ निवासी मोहम्मद राशिद ने उक्त स्थान पर पूर्णतया अवैध जूस पाउच निर्माण इकाई स्थापित कर रखी थी।

     

    निरीक्षण के दौरान डिटर्जेंट एवं अन्य रसायनों का उपयोग हो रहा था, तथा खाद्य सुरक्षा लाइसेंस  मौके पर नहीं  पाया गया।

     

    संचालन हेतु कोई वैध अनुमति पत्र भी नहीं मिला, घरेलू जल एवं विद्युत कनेक्शन का व्यावसायिक उपयोग करते हुए पाया गया। क्रय-विक्रय के बिल रिकॉर्डका भी कोई प्रूफ नही मिला।

     

    जिस पर निरीक्षण के पश्चात तत्काल परिसर को सील कर उत्पादन बंद करवा दिया गया । खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सभी उत्पादों के नमूने लिए गए । अवैध उत्पादन के आरोप में मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गईहैं।पुलिस सत्यापन हेतु आवश्यक निर्देश जारी किए गए

     

     

    निरीक्षण के दौरान  तहसीलदार मनीषा बिष्ट,  सहायक नगर आयुक्त गणेश भट्ट, मुख्य स्वच्छता निरीक्षक अमोल असवाल ,खाद्य सुरक्षा अधिकारी कैलाश टम्टा  आदि उपस्थित रहे।

  • वनभूलपुरा क्षेत्र में सघन सत्यापन अभियान- 17 व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही, 7 मकान मालिकों पर 10-10 हज़ार का चालान।

    वनभूलपुरा क्षेत्र में सघन सत्यापन अभियान- 17 व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही, 7 मकान मालिकों पर 10-10 हज़ार का चालान।

    हल्द्वानी— वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जनपद नैनीताल,  प्रहलाद नारायण मीणा द्वारा जनपद में अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाए जाने हेतु निरंतर सत्यापन अभियान चलाए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

     

     

    इसी क्रम में थानाध्यक्ष वनभूलपुरा  नीरज भाकुनी के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा थाना क्षेत्र अंतर्गत वनभूलपुरा क्षेत्र में सघन सत्यापन अभियान चलाया गया।

     

    अभियान के दौरान किरायेदारों, श्रमिकों, चौकीदारों एवं घरेलू नौकरों का सत्यापन न कराने पर कुल 17 व्यक्तियों के विरुद्ध पुलिस अधिनियम के अंतर्गत चालानी कार्यवाही कर 2,500 रुपए जुर्माना जमा करवाया गया। तथा पहचान एप के माध्यम से सत्यापन भी कराया गया।

    तथा साथ ही, पुलिस अधिनियम के अंतर्गत 7 मकान मालिकों द्वारा किरायेदारों का सत्यापन न कराए जाने पर उनके विरुद्ध चालानी कार्यवाही करते हुए 10-10 हज़ार रुपये कुल 70,000 रुपए का जुर्माना कर संबंधित रिपोर्ट माननीय न्यायालय प्रेषित की गई है।

     

    पुलिस द्वारा क्षेत्र में निरंतर सत्यापन अभियान जारी रहेगा।

     

    जनपद नैनीताल पुलिस आमजन से अपील करती है कि सुरक्षा के दृष्टिगत अपने किरायेदारों, कर्मचारियों, घरेलू सहायकों आदि का अनिवार्य रूप से पुलिस सत्यापन कराएं। सत्यापन न कराए जाने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध विधि सम्मत कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

  • कुमाऊँ के जंगलो में कई जगह लगी आग, जांनिये कहाँ कहाँ वन विभाग ने पाया काबू।

    कुमाऊँ के जंगलो में कई जगह लगी आग, जांनिये कहाँ कहाँ वन विभाग ने पाया काबू।

    हल्द्वानी–   वन संरक्षक डा0 विनय भार्गव ने जानकारी देते हुए बताया कि जनपद में सोमवार कोे वन प्रभाग नैनीताल के भवाली रेंज के गरमपानी के जंगल में आग की सूचना प्राप्त हुई।

     

    इसके साथ ही कोसी रेंज के चिलकाना, बेतालघाट कक्ष संख्या 13 व 14 के जंगल में आग की सूचना प्राप्त हुई। उन्होंने कहा वन प्रभाग द्वारा आग बुझाने का कार्यवाही गतिमान है।

     

    वन प्रभाग रामनगर के फतेहपुर रेंज के उनयाली विकासखण्ड हल्द्वानी बीट कक्ष संख्या 08 के जंगल में आग की सूचना प्राप्त हुई है तथा देचौरी के बेलगड कक्ष संख्या -03 के जंगल में आग की सूचना प्राप्त हुई है। उन्होंने जंगल की आग कन्ट्रोल कर दी गई है।

     

    वन विभाग एवं जिला प्रशासन की टीमों द्वारा वनाग्नि को नियंत्रित किया गया है।

    इसके अलावा वन संरक्षक ने बताया कि वन प्रभाग हल्द्वानी, तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी, तराई केन्द्रीय वन प्रभाग रामनगर तथा भूमि संरक्षण वन प्रभाग नैनीताल में वनाग्नि की कोई सूचना प्राप्त नही हुई है।

    उन्होने स्थानीय जनता से अपील की है कि वन क्षेत्र में कोई भी अग्नि दुर्घटना होने पर विभागीय टोल फ्री नम्बर 18001804141,आपदा कन्ट्रोल रूम 05942-231179, पश्चिमी वृत्त 05946-220003 एवं दक्षिणी वृत्त 05946-235452 पर सूचना दे सकते हैं।

  • भीषण सड़क हादसे में दो कारो में लगी आग, एक व्यक्ति की मौके मौत।

    भीषण सड़क हादसे में दो कारो में लगी आग, एक व्यक्ति की मौके मौत।

    हल्द्वानी–। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद अंतर्गत हल्द्वानी के प्रतापपुर क्षेत्र में शनिवार को एक भीषण सड़क हादसा हुआ।

     

    जिसमें एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह दर्दनाक हादसा कर प्रतापपुर क्षेत्र के पास चोरगलिया सितारगंज मार्ग पर उस समय हुआ जब दो कारों UK05E 0930 और UP32MJ9754 एक आल्टो और एक Hyundai i20—की आमने-सामने टक्कर हो गई।

     

     

    हादसा इतना भयानक था कि टक्कर के बाद दोनों वाहनों में आग लग गई। विशेष रूप से i20 कार पूरी तरह से आग की चपेट में आ गई। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आस-पास के लोग तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी।

     

     

    सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाया गया। पुलिस ने तत्काल घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। मृतक की शिनाख्त की जा रही है, वहीं घायलों की पहचान भी की जा रही है।

     

     

    प्राथमिक जांच के अनुसार, हादसे का कारण तेज रफ्तार और गलत दिशा से आ रही गाड़ी हो सकती है। फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है

  • दिव्यांग बच्चों के लिए आशा और उम्मीद की किरण बना “सेवालय”।

    दिव्यांग बच्चों के लिए आशा और उम्मीद की किरण बना “सेवालय”।

    हल्द्वानी—  हल्द्वानी के फतेहपुर में सरकार से पंजीकृत ‘जय शारदा स्वयं सहायता समूह’ के माध्यम से संचालित केंद्र “सेवालय” एक असामान्य एवम अनोखा सपना साकार कर रहा है,

     

    ऐसा सपना जिसमें दिव्यांग बच्चे सिर्फ सहानुभूति नहीं, बल्कि अधिकार और सम्मान के साथ जीना सीख रहे है।

     

     

    यह केंद्र शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए गतिविधियों का ऐसा मंच बन चुका है, जहां वो न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बन रहे है, बल्कि समाज की मुख्यधारा में आत्मविश्वास के साथ जुड़ भी पा रहे है।

     

     

    केंद्र के संचालक  रोहित जोशी बताते है कि इस केंद्र में कुमाऊं के हर जिले से बच्चे निवासरत है। यहां बच्चों को इनडोर, आउटडोर खेल, ऐपन कला, क्राफ्ट कंप्यूटर शिक्षा के साथ ही सामाजिक व्यवहार के बारे में पूर्ण जानकारी दी जाती है। इसके साथ ही इन बच्चों को डांस भी सिखाया जाता है।

     

     

    यहां बच्चों की हर क्रियाकलापों एक निश्चित समय के अंतर्गत करवाया जाता है। यह केंद्र आज सिर्फ एक प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि दिव्यांग बच्चों के सपनों की पहली सीढ़ी बन चुका है, जहां इन बच्चों को सम्मान, स्वतंत्रता और स्वाभिमान मिल रहा है।

     

    यह केंद्र दिखाता है, कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और सरकार का सही मार्गदर्शन हो, तो कोई भी बच्चा समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकता है।

  • सामाजिक न्यांय और भारतीय पुनर्वास परिषद का यु ओ यू में तीन दिवसीय कार्यशाला का हुआ समापन।

    सामाजिक न्यांय और भारतीय पुनर्वास परिषद का यु ओ यू में तीन दिवसीय कार्यशाला का हुआ समापन।

    हल्द्वानी—    उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा केंद्रीय सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय के सांविधानिक निकाय भारतीय पुनर्वास परिषद के सहयोग से तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर ओम प्रकाश सिंह नेगी की अध्यक्षता में मुख्य अतिथि उत्तराखंड राज्य उच्च शिक्षा उन्नयन परिषद के उपाध्यक्ष व दायित्वधारी प्रोफेसर देवेंद्र भसीन द्वारा किया गया।

     

     

    शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा के निदेशक प्रो.डिगर सिंह फस्वार्ण द्वारा अपने स्वागत उद्बोधन में सभी का स्वागत किया गया व समावेशी समाज के निर्माण में इस तरह की कार्यशालाओं के आयोजन को आवश्यक बताया।

     

     

    मुख्य अतिथि प्रोफेसर देवेंद्र भसीन द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि वर्तमान समय में हमको दिव्यांगजनों के लिए कौशल व रोजगार से संबंधित पाठ्यक्रमों को प्रारंभ करना आवश्यक है। और उनको सभी संसाधन और समान अवसर उपलब्ध करायें,, जिससे कि हम दिव्यांगजनों को समाज की मुख्य धारा में शामिल कर सके।

     

     

    कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हैं उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर ओम प्रकाश सिंह नेगी जी द्वारा अपने उद्बोधन में दिव्यांगजनों के लिए विशेष शिक्षकों के लिए इस तरह की कार्यशालाओं के आयोजनों की सराहना की।

     

     

    उन्होंने सभी प्रतिभागियों से अपेक्षा की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला से यूनिवर्सल डिजाइन फॉर लर्निंग विषय पर जो भी सीखें वह उसको दिव्यांगजनों के शिक्षण में अवश्य प्रयोग में लायें।

     

     

    कार्यशाला में शकुंत मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ से आए डॉक्टर महेश चौधरी द्वारा दिव्यांग जनों के लिए शिक्षण व प्रशिक्षण से संबंधित पाठ योजना के सार्वभौमिक मॉडल पर व्याख्यान दिया गया।

     

     

    इससे पूर्व कार्यशाला के संयोजक व विशेष शिक्षा विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ सिद्धार्थ पोखरियाल द्वारा तीन दिवसीय कार्यशाला की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और कार्यशाला को सभी के लिए लाभकारी बताया।

     

     

    कार्यशाला इसे बोलो राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान, देहरादून के विशेष शिक्षा विभाग के विभाग ध्यक्ष प्रोफेसर विनोद केन द्वारा यूनिवर्सल डिज़ाइन ऑफ़ लर्निंग की फिलासफी पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया गया साथ ही देहरादून से आए प्रोफेसर पंकज कुमार द्वारा यूनिवर्सल डिजाइन ऑफ़ लर्निंग की उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया।

     

    कार्यशाला में विशेष शिक्षा विभाग से श्रीमती भावना धोनी, श्री तरुण नेगी, श्रीमती रश्मि सक्सेना, डॉ बबीता खाती श्रीमती पूजा शर्मा, सौरभ सुयाल, अंकिता सिंह, निशा राणा समेत विभिन्न प्रांतों से आये प्रतिभागी उपस्थित रहे।