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उत्तराखंड—-  देवभूमि उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों को लेकर अब बड़ा प्रशासनिक और कानूनी एक्शन शुरू होने जा रहा है। राज्य में दर्ज 7 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों में से 4,632 संपत्तियों का ब्यौरा अब तक केंद्र सरकार के ‘उम्मीद पोर्टल’ पर अपलोड नहीं किया गया है।

इसे महज लापरवाही नहीं बल्कि संदिग्ध मामलों से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार को आशंका है कि कई संपत्तियां सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे के बाद वक्फ बोर्ड में दर्ज कराई गई हो सकती हैं। इसी को लेकर अब धामी सरकार ने भूमि रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू कर दी है।

सरकार_की_सख्ती_अब_दस्तावेज_दिखाने_होंगे

केंद्र सरकार द्वारा वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए ‘उम्मीद पोर्टल’ लागू किया गया था, जिसमें सभी मुतवल्लियों और कब्जेदारों को अपनी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज अपलोड करने थे।

इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए गए और समयसीमा बढ़ाकर फरवरी 2026 तक कर दी गई, लेकिन उत्तराखंड में बड़ी संख्या में संपत्तियां अब भी पोर्टल पर दर्ज नहीं हुईं। राज्य में कुल 7,288 संपत्तियां सूचीबद्ध हैं, जिनमें औकाफ संपत्तियों के साथ मस्जिद, मदरसे, कब्रिस्तान, ईदगाह, मजार और इमामबाड़े शामिल हैं। लेकिन अब तक केवल सीमित संपत्तियां ही सत्यापित होकर पोर्टल पर दर्ज हो पाई हैं।

जमीनों_के_दस्तावेज_न_होने_की_आशंका

सरकारी सूत्रों और जानकारों का मानना है कि बड़ी संख्या में लोग इसलिए जानकारी देने से बच रहे हैं क्योंकि कई संपत्तियों के पास जमीन के पुख्ता दस्तावेज नहीं हैं। अब जब सरकार असली भूमि रिकॉर्ड और वैध दस्तावेज मांग रही है, तो कई कब्जेदार चुप्पी साधे हुए हैं।

5_जून_के_बाद_सीधी_कार्रवाई_की_चेतावनी

अल्पसंख्यक मामलों के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने स्पष्ट कहा है कि 5 जून तक जो संपत्तियां पोर्टल पर दर्ज नहीं होंगी, उन्हें अवैध कब्जा मानते हुए सरकार अपने अधीन लेने की कार्रवाई करेगी।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी दो टूक कहा है कि सरकार ने पर्याप्त समय और अवसर दिया है। इसके बाद भी नियमों का पालन नहीं करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अब उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों को लेकर शुरू हुई यह पड़ताल आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासों और प्रशासनिक फैसलों का कारण बन सकती है।


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