
कोटद्वार— गढ़वाल राजपूत सभा क्षेत्रीय शाखा कोटद्वार भाबर द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में उत्तराखंड सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों, द्वितीय विश्व युद्ध के योद्धाओं, शौर्य पुरस्कार विजेताओं एवं 90 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित किया गया। सभा के पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों को शॉल, पुष्प गुच्छ, पटका एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
सभा द्वारा पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी को भी शॉल, पुष्प गुच्छ, पटका एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में नेगी जी ने गढ़वाल राजपूत सभा द्वारा समाज के उत्थान हेतु किए जा रहे कार्यों की सराहना की और युवाओं को नशे से दूर रहने, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक समरसता बनाए रखने का संदेश दिया। और पूर्व वीर सैनिकों को सम्मानित किया।

नेगी जी ने कहा, “गढ़वाल राजपूत सभा का समाज के प्रति योगदान अत्यंत सराहनीय है। ऐसे आयोजन युवाओं को प्रेरित करने और समाज में एकता व भाईचारा स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
गढ़वाल राजपूत सभा के प्रधान हरेंद्र बिष्ट, सचिव सुभाष गुसाई, कोषाध्यक्ष राजेंद्र बिलवाल, संगठन मंत्री कृपाल गुसाई, केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य, प्रवीन रावत , सूरमान सिंह नेगी, सुदर्शन भंडारी एवं क्षेत्रीय शाखा फरीदाबाद के सभी सदस्यगण कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
सम्मेलन में विशेष रूप से जिन महान विभूतियों को सम्मानित किया गया, उनमें शामिल हैं:
स्व. श्री राय सिंह जी (भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय,1934 से 1947 तक तीन बार लैंसडाउन जेल), मंगत सिंह गुसाई (आजाद हिंद फौज),स्व. पंचम सिंह रावत (द्वितीय विश्व युद्ध),स्व. मोहन सिंह बिलवाल (द्वितीय विश्व युद्ध),स्व. लुंगी सिंह (द्वितीय विश्व युद्ध, 6th गढ़वाल राइफल),स्व. शंकर,सिंह नेगी (द्वितीय विश्व युद्ध),स्व. बलदेव सिंह बिष्ट (शौर्य चक्र विजेता, 1991), श्याम सिंह जी (राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार विजेता, 1997)।
90 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक:-
गोपाल सिंह गुसाई (92 वर्ष), माल सिंह गुसाई (90 वर्ष), कुशाल सिंह (100 वर्ष),श्रीमती ह्रदयी देवी (98 वर्ष), जमन सिंह रावत (100 वर्ष), मन सिंह (97 वर्ष),श्रीमती विश्वेश्वरी देवी (97 वर्ष), प्रेम सिंह रावत (90 वर्ष।
यह सम्मेलन गढ़वाल की समृद्ध संस्कृति और परंपरा को सहेजने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
