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कोटद्वार—   कोटड़ीढांग स्थित प्राथमिक विद्यालय, जूनियर हाईस्कूल एवं इंटर कॉलेज की जर्जर और बदहाल *स्थिति का मौके पर निरीक्षण करने पहुंचे पूर्व कैबिनेट मंत्री माननीय  सुरेन्द्र सिंह नेगी विद्यालय की हालत देखकर बेहद दुखी और चिंतित नजर आए।

एक ही परिसर में संचालित इन तीनों विद्यालयों में वर्तमान में लगभग 350 से 400 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन विद्यालय भवन एवं परिसर की स्थिति बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

विद्यालय की टूटी हुई दीवारें, जर्जर भवन, बदहाल शौचालय, दीवारों से पानी का रिसाव तथा परिसर में चारों ओर उगी घनी झाड़ियां विद्यालय की स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट कर रही हैं।

विद्यालय के आसपास का क्षेत्र इतना झाड़ियों से भर गया है कि पूरा परिसर वन क्षेत्र जैसा दिखाई देता है। वहीं विद्यालय वन क्षेत्र से सटा होने के कारण यहां गुलदार की आवाजाही का खतरा भी बना हुआ है।

क्षेत्र में पिछले कुछ समय से गुलदार की सक्रियता और लोगों के घायल होने की घटनाओं के बीच विद्यालय परिसर के आसपास इस प्रकार घनी झाड़ियों का होना बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद चिंताजनक है। ऐसे में विद्यालय में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों में भी भय का वातावरण बना हुआ है।

विद्यालय की बदहाल स्थिति को देखकर माननीय श्सुरेन्द्र सिंह नेगी  ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को पत्र लिखकर विद्यालय की जर्जर स्थिति और बच्चों के सामने उत्पन्न समस्याओं से अवगत कराया है।

उन्होंने शिक्षा मंत्री से विद्यालय के आवश्यक मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर करवाने तथा बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

इसके साथ ही शिक्षा सचिव को भी पत्र लिखकर विद्यालय की स्थिति से अवगत कराया गया है तथा आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है।  नेगी जी ने शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों से भी दूरभाष पर वार्ता कर विद्यालय की समस्याओं की जानकारी दी और तत्काल स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

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नेगी जी ने जिलाधिकारी पौड़ी से भी वार्ता कर पूरे मामले की जानकारी दी। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया।

नेगी जी ने कहा कि विद्यालय की मरम्मत, भवन की सुरक्षा, पानी के रिसाव, शौचालयों की बदहाल स्थिति तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाना आवश्यक है।

विद्यालय परिसर के आसपास अत्यधिक बढ़ चुकी झाड़ियों और इससे उत्पन्न गुलदार के खतरे को देखते हुए  नेगी जी ने नगर आयुक्त कोटद्वार से भी दूरभाष पर वार्ता की। उन्होंने विद्यालय एवं आसपास के क्षेत्र की झाड़ियों को तत्काल साफ करवाने के निर्देश दिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और वन्यजीवों के छिपने के संभावित स्थानों को समाप्त किया जा सके।

उन्होंने कहा कि विद्यालय के आसपास इतनी अधिक झाड़ियां होना सामान्य सफाई का विषय नहीं है, बल्कि यह बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। विशेषकर ऐसे समय में जब क्षेत्र में गुलदार की सक्रियता बनी हुई है, विद्यालय के आसपास झाड़ियों का इस तरह बढ़ा होना किसी बड़ी घटना को आमंत्रण दे सकता है।

नेगी जी ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला है। आज के छात्र-छात्राएं ही देश का भविष्य हैं। यदि उन्हें सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध नहीं कराया जाएगा तो उनसे बेहतर भविष्य की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करने वाला शिक्षा का मंदिर है। ऐसे स्थान पर बच्चों को जर्जर भवन, टूटती दीवारों, खराब शौचालय, पानी के रिसाव और गुलदार के भय के बीच पढ़ने के लिए मजबूर होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

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पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि उनके कार्यकाल में क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार को विशेष प्राथमिकता दी गई थी। आवश्यकता के अनुसार नए विद्यालय एवं शिक्षण संस्थान स्वीकृत करवाए गए, विद्यालयों का उच्चीकरण किया गया तथा तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में भी संस्थानों का विस्तार किया गया, ताकि क्षेत्र के बच्चों को अपने घर के नजदीक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

उन्होंने कहा कि उस समय उद्देश्य स्पष्ट था कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए अनावश्यक रूप से दूर न जाना पड़े तथा प्रत्येक बच्चे को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध हों।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले लगभग एक दशक में शिक्षा के क्षेत्र में जिस गंभीरता और प्राथमिकता के साथ कार्य होना चाहिए था, वह दिखाई नहीं दे रहा है। एक ओर नए शिक्षण एवं तकनीकी संस्थानों के विस्तार की गति अपेक्षित नहीं है, वहीं दूसरी ओर पहले से स्थापित विद्यालयों के रखरखाव और सुदृढ़ीकरण पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जब कोटद्वार जैसे मैदानी क्षेत्र में विद्यालयों की यह स्थिति है तो पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है । उन्होंने कहा कि यह केवल विद्यालय भवन की मरम्मत का विषय नहीं है, बल्कि बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।

नेगी जी ने कहा कि कोटड़ीढांग सहित पनियाली, शिवपुर, ध्रुवपुर और अन्य कई क्षेत्र वन क्षेत्र से सटे हुए हैं। इन इलाकों में आबादी और जंगल के बीच दूरी लगातार कम हो रही है। ऐसे में वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी और संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित समीक्षा आवश्यक है।

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उन्होंने कहा कि क्षेत्र में गुलदार लगातार सक्रिय है और कई लोगों को घायल कर चुका है। ऐसे में विद्यालय के आसपास इतनी घनी झाड़ियों का होना बच्चों के लिए गंभीर खतरा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़ी जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए वन विभाग एवं संबंधित सक्षम अधिकारियों को मामले की गंभीरता से समीक्षा कर तत्काल प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि कोई गुलदार लगातार आबादी वाले क्षेत्र में सक्रिय रहकर मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है और सामान्य प्रयासों के बावजूद उसे पकड़ पाना संभव नहीं हो रहा है, तो वन विभाग एवं सक्षम अधिकारियों को नियमानुसार विशेषज्ञों की सलाह से आवश्यक एवं प्रभावी कार्रवाई के सभी विकल्पों की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि किसी बड़ी जनहानि की स्थिति उत्पन्न न हो।

नेगी जी ने कहा कि क्षेत्र के बच्चों का भविष्य किसी भी राजनीतिक विषय से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। विद्यालय की समस्याओं को लेकर उन्होंने संबंधित सभी अधिकारियों से वार्ता की है तथा शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव को पत्र भी भेजा है। उन्होंने कहा कि जब तक बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध नहीं हो जाता, तब तक इस विषय को संबंधित विभाग एवं सरकार के समक्ष उठाते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि आज के छात्र-छात्राएं ही कल के राष्ट्र निर्माता हैं। उन्हें सुरक्षित वातावरण, बेहतर शिक्षा और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए। नेगी जी ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से विद्यालय की सभी समस्याओं का स्थलीय निरीक्षण कर समयबद्ध तरीके से समाधान सुनिश्चित करने की अपेक्षा की, ताकि कोटड़ीढांग के सैकड़ों छात्र-छात्राओं को जल्द ही सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।


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